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आढ़तियों की हड़ताल के बीच 515 टन गेहूं की खरीद

Tue, 21 Apr 2020 12:03 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Tue, 21 Apr 2020 12:03 AM IST
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trader strike, 515 ton wheat purchase
सोमवार को नई अनाज मंडी में गेहूं की खरीद को लेकर अढ़तियों की हडताल के कारण सूनी पड़ी मंडी और अढ़ति? - फोटो : RohtakCity
रोहतक। जिले की तमाम मंडियों में आढ़तियों की हड़ताल के बीच सोमवार को गेहूं की खरीद शुरू हुई। पहले दिन सिर्फ 515 मीट्रिक टन गेहूं ही खरीदा जा सका। आढ़ती अपने रुख पर डटे हैं और प्रशासन की नजरें अब सरकार की तरफ लगी हैं।
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रविवार को दोनों पक्षों के बीच बातचीत बेनतीजा रहने के बाद आढ़तियों ने गेहूं खरीद के बायकॉट का एलान कर दिया था। प्रशासन को भी पता था कि कहां पर खरीद हो सकेगी और कहां नहीं। सुबह से ही रोहतक और कलानौर मंडियों में पूरी तरह सन्नाटा पसरा रहा, यहां एक भी किसान अपना गेहूं लेकर नहीं पहुंचा। प्रशासन के लिए राहत की बात यह थी कि सांपला मंडी के कई आढ़ती सरसों खरीद के समय से उनके साथ थे। जिन्होंने सोमवार को गेहूं की खरीद भी शुरू की। दिन खत्म होने तक संपला में 439 एमटी गेहूं की खरीद हुई थी। महम के आढ़ती भी हड़ताल में शामिल थे। पर वहां स्थानीय अधिकारियों ने अपने स्तर पर लेबर का इंतजाम किया। उसके बाद हरियाणा वेयरहाउस ने सोसाइटी के जरिए गेहूं की खरीद की। हालांकि यहां खरीदी गई 76 एमटी गेहूं का आंकड़ा बहुत आकर्षक नहीं था, लेकिन इसने प्रशासन को राहत जरूर दी। लाखनमाजरा, सांघी, किलोई, मदीना जैसी कच्ची मंडियों में भी एक भी आढ़ती नहीं आया। आखिर शाम छह बजे मार्केट कमेटियों का स्टाफ भी लौट गया। मार्केट कमेटी ने एक दिन पहले गेहूं खरीद करने के इच्छुक लोगों को टेंपरेरी लाइसेंस देने का ऑफर भी दिया था, लेकिन किसी ने भी आवेदन नहीं किया। इसके पीछे तकनीकी कारण भी था। अगर कोई आवेदन करता तो उसे खरीद के लिए जरूरी साजो-सामान और उपकरण भी लाने पड़ते। लेकिन लॉक डाउन के कारण इस समय ऐसा संभव नहीं था। आढ़ती परंपरागत मैनुअल ढंग से खरीद पर अड़े हैं। उन्हें लग रहा है कि राज्य की कई मंडियों में हड़ताल को देखते हुए सरकार मान जाएगी। यह शर्त पूरी करना प्रशासन के बस के बाहर है, इसलिए वह भी सरकार के फैसले का इंतजार कर रहा है।
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जहां खरीद होनी थी, वहीं बुलाए किसान
मार्केट कमेटियों ने तय किया था कि पहले दिन दोनों शिफ्टों में सभी मंडियों में 25-25 किसानों को बुलाया जाएगा। किसानों की लिस्टें भी तैयार कर ली गईं। लेकिन सिर्फ उन्हीं जगह किसानों को बुलाया गया, जहां खरीद होने की उम्मीद थी। रोहतक के किसानों को फोन कर कह दिया गया था कि जब बुलाया जाएगा, तभी आएं। प्रशासन को पता था कि अगर किसानों को बुला लिया और खरीद न हुई तो कानून-व्यवस्था की नई समस्या खड़ी हो जाएगी। इसलिए रोहतक, कलानौर में किसानों को बुलाया ही नहीं गया।
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बीस क्विंटल की नई शर्त
सरकार ने पहले शर्त रखी थी कि एक किसान का एक दिन में अधिकतम पचास क्विंटल गेहूं खरीदा जाएगा। किसानों से लेकर आढ़ती तक इसका विरोध कर रहे थे। सोमवार को इसे वापस लेकर नई शर्त लागू कर दी गई। अब एक किसान का प्रति एकड़ सिर्फ बीस क्विंटल गेहूं खरीदा जाएगा। अगर किसी किसान का दस एकड़ का रजिस्ट्रेशन है तो उसका सारा 200 क्विंटल गेहूं खरीदा जाएगा। किसान सभा के प्रधान प्रीत सिंह ने कहा कि सरकार ने औसत लिया है, लेकिन बहुत से किसानों की प्रति एकड़ उपज बीस क्विंटल से ज्यादा भी है। वे बाकी की फसल कहां लेकर जाएंगे। इस आदेश को वापस लेकर किसानों की सारी फसल खरीदी जाए।
सरसों भी नहीं खरीदी
हड़ताल पर गए आढ़तियों ने सोमवार को सरसों भी नहीं खरीदी। रोहतक की नई अनाज मंडी में सुबह सरसों की कई ट्रॉलियां आईं, पर उन्हें वापस लौटा दिया गया। हालांकि पहले आढ़तियों ने कहा था कि वे सरसों की खरीद करेंगे।
प्रशासन ने गेहूं खरीद को पुख्ता प्रबंध किए हैं। आढ़तियों को भी खरीद प्रक्रिया में शामिल होना चाहिए। उनकी मांगों पर राज्य सरकार ने फैसला लेना है। सरकार के निर्देशानुसार कार्रवाई की जाएगी।

-आरएस वर्मा, डीसी, रोहतक
रोहतक, कलानौर और महम में आढ़तियों ने बिल्कुल भी गेहूं खरीद नहीं की है। राज्य की ज्यादातर मंडियों में आढ़ती हड़ताल पर हैं। सरकार को किसानों के हित में फैसला लेकर मैनुअल खरीद की इजाजत देनी चाहिए।
-डिंपल बधवार, प्रधान, आढ़ती एसोसिएशन रोहतक
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