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Rohtak News: हरियाणा-यूपी सीमा विवाद को सुलझाने के लिए 30 जून से पहले लगेंगे यमुना सीमा पर 173 पिलर
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फोटो 18- सोनीपत के राई क्षेत्र स्थित गांव गढ़मिरकपुर के पास यमुना क्षेत्र का दृश्य। संवाद
सोनीपत। हरियाणा-उत्तर प्रदेश सीमा पर करीब पांच दशक से चले आ रहे जमीन के विवाद को निपटाने की कवायद शुरू हो गई है। सोनीपत के गन्नौर और राई क्षेत्र में यमुना सीमा पर 173 पिलर लगाकर सीमांकन किया जाएगा। इससे आपसी मतभेद दूर करने में मदद मिलेगी। गृह विभाग की अतिरिक्त मुख्य सचिव (एसीएस) डाॅ. सुमिता मिश्रा ने वीडियो कॉन्फ्रेंस से उपायुक्त, लोक निर्माण विभाग व पुलिस अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक कर 30 जून तक काम पूरा करने के निर्देश दिए हैं।
उपायुक्त डॉ. मनोज कुमार ने बताया कि विभाग की ओर से कार्य शुरू कर दिया गया है। इसके लिए टेंडर प्रक्रिया पूरी की जा चुकी है। करीब 5.13 करोड़ रुपये की लागत से पिलर लगाने का कार्य 30 जून तक पूरा कर लिया जाएगा। इससे जमीन का विवाद व रेत खनन जैसे मामलों में कमी आ सकती है ।
बैठक में विभाग के एक्सईएन पंकज गौड़, सिंचाई विभाग के एसडीओ विक्रम सिंह सहित संबंधित अधिकारी मौजूद रहे। सीमांकन न होने के कारण हरियाणा-उत्तर प्रदेश के बीच कई बार सीमा विवाद हो चुका है। इसे रोकने के लिए सरकार ने यमुनानगर से पलवल तक पिलर लगवाने के निर्देश दिए थे।
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पांच दशक से सीमा विवाद में उलझे किसान
दोनों प्रदेश के किसान पांच दशक से सीमा विवाद में उलझे हुए हैं। करीब 47 गांव के किसानों के बीच यमुना खादर की करीब 4500 हेक्टेयर जमीन को लेकर विवाद रहा है। करीब दो दर्जन से अधिक बार खूनी संघर्ष में कई जान भी जा चुकी हैं। दिसंबर 2019 में सीमा विवाद निपटाने के लिए सीमांकन का निर्णय लिया गया था। इसके बाद यह सिलसिला जनवरी 2024 में शुरू किया गया था। उस दौरान एसडीएम अमित कुमार की अध्यक्षता में अधिकारियों की टीम ने यमुना क्षेत्र का दौरा कर पिलर लगवाने के लिए निरीक्षण किया था।
किन जगहों पर है सीमा विवाद
हरियाणा में सोनीपत के गांव बेगा, चंदौली, पबनेरा, ग्यासपुर, मीमारपुर, जैनपुर, टिकौला, नांदनौर, असदपुर, गढ़ मिर्कपुर, मनौली, दहीसरा, भैरा बांकीपुर, जाजल आदि के किसान सीमा विवाद का दंश झेल रहे हैं। वहीं उत्तर प्रदेश के जिला बागपत के बागपत, निवाड़ा, सिसाना, गौरीपुर जवाहर नगर, नैथला, निनाना, लुहारी, कौताना, खेड़ी प्रधान, खेड़ा इस्लामपुर, छपरौली, टांडा, काकौर, बदरखा, जागौस, काठा, पाली, नंगला बहलोलपुर, मवीकलां, सुभानपुर, सांकरौद आदि गांव में भी सीमा विवाद होते आए हैं।
फसल बुआई व कटाई के समय होता है संघर्ष
किसानों के बीच फसल बुआई व कटाई के समय ज्यादा संघर्ष होता है। वर्ष 1997 में सांकरौद के पास भैरा बांकीपुर के ओमपाल सिंह की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। बवाल हुआ था और अधिकारियों को बंधक भी बनाया गया था। वर्ष 1997 में दोनों तरफ के किसानों के बीच फायरिंग में बागपत के कुर्डी गांव के विशंभर की मौत हो गई थी। वर्ष 1997-98 में खुर्मपुर व नंगला बहलोपुर के किसानों में बवाल हुआ था। जाजल व निवाड़ा के किसानों के बीच बवाल हुआ तो खुर्मपुर व नंगला बहलोलपुर के किसानों में झगड़ा हुआ। अप्रैल 2021 में नगला बहलोलपुर के अनिल की हत्या हो गई थी।
वर्ष 1974 में कमेटी का किया था गठन
यमुना क्षेत्र का विवाद निपटाने के लिए केंद्र सरकार ने वर्ष 1974 में तत्कालीन कृषि मंत्री उमाशंकर दीक्षित की अध्यक्षता में कमेटी का गठन किया था। दीक्षित अवाॅर्ड के तहत प्रशासन को दोनों प्रदेश की जमीन पर किसानाें को कब्जा दिलवाने की कार्रवाई करनी थी, लेकिन ऐसा नहीं हो पाया। इसके बाद सीमा विवाद लगातार बढ़ता गया।
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उपायुक्त डॉ. मनोज कुमार ने बताया कि विभाग की ओर से कार्य शुरू कर दिया गया है। इसके लिए टेंडर प्रक्रिया पूरी की जा चुकी है। करीब 5.13 करोड़ रुपये की लागत से पिलर लगाने का कार्य 30 जून तक पूरा कर लिया जाएगा। इससे जमीन का विवाद व रेत खनन जैसे मामलों में कमी आ सकती है ।
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बैठक में विभाग के एक्सईएन पंकज गौड़, सिंचाई विभाग के एसडीओ विक्रम सिंह सहित संबंधित अधिकारी मौजूद रहे। सीमांकन न होने के कारण हरियाणा-उत्तर प्रदेश के बीच कई बार सीमा विवाद हो चुका है। इसे रोकने के लिए सरकार ने यमुनानगर से पलवल तक पिलर लगवाने के निर्देश दिए थे।
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पांच दशक से सीमा विवाद में उलझे किसान
दोनों प्रदेश के किसान पांच दशक से सीमा विवाद में उलझे हुए हैं। करीब 47 गांव के किसानों के बीच यमुना खादर की करीब 4500 हेक्टेयर जमीन को लेकर विवाद रहा है। करीब दो दर्जन से अधिक बार खूनी संघर्ष में कई जान भी जा चुकी हैं। दिसंबर 2019 में सीमा विवाद निपटाने के लिए सीमांकन का निर्णय लिया गया था। इसके बाद यह सिलसिला जनवरी 2024 में शुरू किया गया था। उस दौरान एसडीएम अमित कुमार की अध्यक्षता में अधिकारियों की टीम ने यमुना क्षेत्र का दौरा कर पिलर लगवाने के लिए निरीक्षण किया था।
किन जगहों पर है सीमा विवाद
हरियाणा में सोनीपत के गांव बेगा, चंदौली, पबनेरा, ग्यासपुर, मीमारपुर, जैनपुर, टिकौला, नांदनौर, असदपुर, गढ़ मिर्कपुर, मनौली, दहीसरा, भैरा बांकीपुर, जाजल आदि के किसान सीमा विवाद का दंश झेल रहे हैं। वहीं उत्तर प्रदेश के जिला बागपत के बागपत, निवाड़ा, सिसाना, गौरीपुर जवाहर नगर, नैथला, निनाना, लुहारी, कौताना, खेड़ी प्रधान, खेड़ा इस्लामपुर, छपरौली, टांडा, काकौर, बदरखा, जागौस, काठा, पाली, नंगला बहलोलपुर, मवीकलां, सुभानपुर, सांकरौद आदि गांव में भी सीमा विवाद होते आए हैं।
फसल बुआई व कटाई के समय होता है संघर्ष
किसानों के बीच फसल बुआई व कटाई के समय ज्यादा संघर्ष होता है। वर्ष 1997 में सांकरौद के पास भैरा बांकीपुर के ओमपाल सिंह की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। बवाल हुआ था और अधिकारियों को बंधक भी बनाया गया था। वर्ष 1997 में दोनों तरफ के किसानों के बीच फायरिंग में बागपत के कुर्डी गांव के विशंभर की मौत हो गई थी। वर्ष 1997-98 में खुर्मपुर व नंगला बहलोपुर के किसानों में बवाल हुआ था। जाजल व निवाड़ा के किसानों के बीच बवाल हुआ तो खुर्मपुर व नंगला बहलोलपुर के किसानों में झगड़ा हुआ। अप्रैल 2021 में नगला बहलोलपुर के अनिल की हत्या हो गई थी।
वर्ष 1974 में कमेटी का किया था गठन
यमुना क्षेत्र का विवाद निपटाने के लिए केंद्र सरकार ने वर्ष 1974 में तत्कालीन कृषि मंत्री उमाशंकर दीक्षित की अध्यक्षता में कमेटी का गठन किया था। दीक्षित अवाॅर्ड के तहत प्रशासन को दोनों प्रदेश की जमीन पर किसानाें को कब्जा दिलवाने की कार्रवाई करनी थी, लेकिन ऐसा नहीं हो पाया। इसके बाद सीमा विवाद लगातार बढ़ता गया।