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Rohtak News: सिटी बस सेवा पर लग सकता है ब्रेक
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विजेंद्र कौशिक
रोहतक। नगर निगम और सिटी बस सेवा संचालक के बीच ठन गई है। इसके चलते नगर निगम की सिटी बस सेवा बंद होने की कगार पर पहुंच गई है।
दरअसल, निगम ने बस संचालक को नोटिस भेजकर जनवरी से मई तक का बकाया 3. 79 लाख रुपये किराया एक सप्ताह में जमा कराने का नोटिस भेजा है। राशि जमा न कराने पर बस सेवा बंद करने व सिक्याेरिटी राशि जब्त करने की चेतावनी दी है। दूसरी तरफ बस संचालक का कहना है कि निगम मनमानी कर रहा है। इसलिए वह हाईकोर्ट जाएगा।
शहर में 70 प्रतिशत से ज्यादा लोग ऑटो के माध्यम से शहर में सफर करते हैं। ऑटो में जहां एक तरफ 20 रुपये किराया है। साथ ही 10 हजार के करीब ऑटो होने से जाम की स्थिति रहती है। करीब डेढ़ साल पहले नगर निगम ने मेयर मनमोहन गोयल की पहल पर सिटी बस सेवा चालू की थी। पहले चरण में पांच रूट पर एक-एक बस चलाई थी। बलियाना से नया बस स्टैंड, हिसार रोड से नया बस स्टैंड, तीन बस अलग-अलग रूट से नया बस स्टैंड से एमडीयू व पीजीआई तय की गई थी। सवारियों को मात्र 10 रुपये में कहीं से कहीं तक सफर तय करना था। इसके बदले में बस संचालक को करीब एक लाख रुपये प्रति माह निगम में किराया जमा कराना था। तय हुआ था कि बस संचालक हर साल पांच बस और बढ़ाएगा, लेकिन दूसरे साल बस बढ़ाने की जगह पूरी सिटी बस सेवा ही बंद होने की कगार पर आ गई है।
बिना सूचना के टेंडर रद्द करने की चेतावनी
नगर निगम की तरफ से एक मई को बस संचालक भीष्म शर्मा को नोटिस जारी किया है। लिखा है कि तय शर्तों के तहत हर माह बसों का किराया जमा कराया जाना है, लेकिन जनवरी माह से अब तक 18 प्रतिशत जीएसटी सहित 3. 79 लाख रुपये किराया जमा नहीं कराया गया है। न ही बसों की संख्या बढ़ाई गई। एक सप्ताह में राशि जमा करवाएं, नहीं तो सिक्योरिटी राशि जब्त कर बिना सूचना के टेंडर रद्द कर दिया जाएगा।
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टेंडर की शर्तों में स्पष्टता का अभाव है विवाद की जड़
निगम की तरफ से जब टेंडर जारी किया गया, उस समय 16 हजार रुपये प्रति बस किराया तय किया गया था। जीएसटी से लेकर बस अड्डा फीस व आरटीए फीस का टेंडर के जिक्र नहीं है कि कौन जमा कराएगा। बस संचालक का कहना है कि ये राशि निगम जमा करवाए। दूसरी तरफ निगम अधिकारी कह रहे हैं कि निगम को 16 हजार रुपये प्रति किराया मिलना चाहिए। आरटीए व बस अड्डा फीस लेकर 18 प्रतिशत जीएसटी की जिम्मेदारी बस संचालक की है।
रोडवेज की तरफ से नए बस स्टैंड पर बस खड़ी करने पर प्रति बस फीस व आरटीए फीस मांगी जाती है। यह प्रति माह प्रति बस 36 हजार के करीब राशि पड़ती है। अब पांच बसों की राशि एक लाख से ज्यादा बनती है। यह राशि निगम को जमा करानी चाहिए। क्योंकि उसे केवल यह कहा गया था कि 16 हजार रुपये प्रति बस किराया देना है। डेढ़ माह पहले प्रति बस रोजाना 3500 रुपये आय थी। राेडवेज की ओर से पिंक बस सेवा शुरू होने के बाद यह आंकड़ा घटकर आधा हो गया। निगम की मनमानी के खिलाफ वह हाईकोर्ट जाएगा।
भीष्म शर्मा, संचालक, सिटी बस सेवा
नियमों के तहत समय पर बसों का किराया निगम में जमा होना चाहिए। एलओ संदीप बतरा को हिदायत दी है किवे बस संचालक को नोटिस भेजे। अगर जवाब नहीं आता तो सिक्योरिटी राशि जब्त कर टेंडर रद्द कर दिया जाए।
धीरेंद्र खड़गटा, आयुक्त, नगर निगम
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रोहतक। नगर निगम और सिटी बस सेवा संचालक के बीच ठन गई है। इसके चलते नगर निगम की सिटी बस सेवा बंद होने की कगार पर पहुंच गई है।
दरअसल, निगम ने बस संचालक को नोटिस भेजकर जनवरी से मई तक का बकाया 3. 79 लाख रुपये किराया एक सप्ताह में जमा कराने का नोटिस भेजा है। राशि जमा न कराने पर बस सेवा बंद करने व सिक्याेरिटी राशि जब्त करने की चेतावनी दी है। दूसरी तरफ बस संचालक का कहना है कि निगम मनमानी कर रहा है। इसलिए वह हाईकोर्ट जाएगा।
शहर में 70 प्रतिशत से ज्यादा लोग ऑटो के माध्यम से शहर में सफर करते हैं। ऑटो में जहां एक तरफ 20 रुपये किराया है। साथ ही 10 हजार के करीब ऑटो होने से जाम की स्थिति रहती है। करीब डेढ़ साल पहले नगर निगम ने मेयर मनमोहन गोयल की पहल पर सिटी बस सेवा चालू की थी। पहले चरण में पांच रूट पर एक-एक बस चलाई थी। बलियाना से नया बस स्टैंड, हिसार रोड से नया बस स्टैंड, तीन बस अलग-अलग रूट से नया बस स्टैंड से एमडीयू व पीजीआई तय की गई थी। सवारियों को मात्र 10 रुपये में कहीं से कहीं तक सफर तय करना था। इसके बदले में बस संचालक को करीब एक लाख रुपये प्रति माह निगम में किराया जमा कराना था। तय हुआ था कि बस संचालक हर साल पांच बस और बढ़ाएगा, लेकिन दूसरे साल बस बढ़ाने की जगह पूरी सिटी बस सेवा ही बंद होने की कगार पर आ गई है।
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बिना सूचना के टेंडर रद्द करने की चेतावनी
नगर निगम की तरफ से एक मई को बस संचालक भीष्म शर्मा को नोटिस जारी किया है। लिखा है कि तय शर्तों के तहत हर माह बसों का किराया जमा कराया जाना है, लेकिन जनवरी माह से अब तक 18 प्रतिशत जीएसटी सहित 3. 79 लाख रुपये किराया जमा नहीं कराया गया है। न ही बसों की संख्या बढ़ाई गई। एक सप्ताह में राशि जमा करवाएं, नहीं तो सिक्योरिटी राशि जब्त कर बिना सूचना के टेंडर रद्द कर दिया जाएगा।
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टेंडर की शर्तों में स्पष्टता का अभाव है विवाद की जड़
निगम की तरफ से जब टेंडर जारी किया गया, उस समय 16 हजार रुपये प्रति बस किराया तय किया गया था। जीएसटी से लेकर बस अड्डा फीस व आरटीए फीस का टेंडर के जिक्र नहीं है कि कौन जमा कराएगा। बस संचालक का कहना है कि ये राशि निगम जमा करवाए। दूसरी तरफ निगम अधिकारी कह रहे हैं कि निगम को 16 हजार रुपये प्रति किराया मिलना चाहिए। आरटीए व बस अड्डा फीस लेकर 18 प्रतिशत जीएसटी की जिम्मेदारी बस संचालक की है।
रोडवेज की तरफ से नए बस स्टैंड पर बस खड़ी करने पर प्रति बस फीस व आरटीए फीस मांगी जाती है। यह प्रति माह प्रति बस 36 हजार के करीब राशि पड़ती है। अब पांच बसों की राशि एक लाख से ज्यादा बनती है। यह राशि निगम को जमा करानी चाहिए। क्योंकि उसे केवल यह कहा गया था कि 16 हजार रुपये प्रति बस किराया देना है। डेढ़ माह पहले प्रति बस रोजाना 3500 रुपये आय थी। राेडवेज की ओर से पिंक बस सेवा शुरू होने के बाद यह आंकड़ा घटकर आधा हो गया। निगम की मनमानी के खिलाफ वह हाईकोर्ट जाएगा।
भीष्म शर्मा, संचालक, सिटी बस सेवा
नियमों के तहत समय पर बसों का किराया निगम में जमा होना चाहिए। एलओ संदीप बतरा को हिदायत दी है किवे बस संचालक को नोटिस भेजे। अगर जवाब नहीं आता तो सिक्योरिटी राशि जब्त कर टेंडर रद्द कर दिया जाए।
धीरेंद्र खड़गटा, आयुक्त, नगर निगम