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Rohtak News: जय माता के जयकारों से गूंजे मंदिर
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04सीटीके01...माता दरवाजा स्थित संकट मोचन हनुमान मंदिर में पूजा करते श्रद्धालु। संवाद
- फोटो : mathura
रोहतक। जिले में शुक्रवार को मां कालरात्रि की पूजा की गई। मंदिरों में मां कालरात्रि की पूजा-आर्चना के लिए सुबह से शाम तक श्रद्धालुओं की भीड़ लगी रही। भक्तों ने मंदिर में आकर मां कालरात्रि से मन्नत मांगी। वहीं, जय माता के जयकारों से जिले के मंदिर गूंज उठे।
शहर के गुफा वाला मंदिर, माता शीतला मंदिर, दुर्गा भवन मंदिर, गोकर्ण डेरे सहित मंदिरों में कालरात्रि की पूजा करने के लिए सुबह से शाम तक भक्तों की भीड़ उमड़ी रही। शाम को मंदिरों में आरती की गई। आरती के समय आसपास से सैकड़ों की संख्या में भक्त शामिल हुए।
माता दरवाजा स्थित संकट मोचन हनुमान मंदिर में चैत्र नवरात्र के सातवें दिन दुर्गा स्तुति पाठ का आयोजन किया गया। सुबह से मां जगदंबे के सातवें स्वरूप मां कालरात्रि की पूजा-अर्चना के लिए भक्तों की भीड़ लगी रही। भक्तों ने मां के जयकारों के साथ अखंड ज्योत के दर्शन किए और सुख समृद्धि, कामना की। गद्दीनशीन साध्वी मानेश्वरी ने प्रवचन देते हुए कहा कि मां दुर्गा के कालरात्रि का स्वरूप अत्यंत भयानक है, मगर वह सदैव अपने भक्तों को शुभ फल प्रदान करती हैं। इनका स्मरण करने से दानव, भूत-प्रेत, राक्षस, दैत्य डरकर भाग जाते हैं। कालरात्रि रूप का अवतार असुरों के राजा रक्तबीज का वध करने के लिए हुआ था। इनकी पूजा करने से घर में सुख-समृद्धि बनी रहती है।
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शहर के गुफा वाला मंदिर, माता शीतला मंदिर, दुर्गा भवन मंदिर, गोकर्ण डेरे सहित मंदिरों में कालरात्रि की पूजा करने के लिए सुबह से शाम तक भक्तों की भीड़ उमड़ी रही। शाम को मंदिरों में आरती की गई। आरती के समय आसपास से सैकड़ों की संख्या में भक्त शामिल हुए।
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माता दरवाजा स्थित संकट मोचन हनुमान मंदिर में चैत्र नवरात्र के सातवें दिन दुर्गा स्तुति पाठ का आयोजन किया गया। सुबह से मां जगदंबे के सातवें स्वरूप मां कालरात्रि की पूजा-अर्चना के लिए भक्तों की भीड़ लगी रही। भक्तों ने मां के जयकारों के साथ अखंड ज्योत के दर्शन किए और सुख समृद्धि, कामना की। गद्दीनशीन साध्वी मानेश्वरी ने प्रवचन देते हुए कहा कि मां दुर्गा के कालरात्रि का स्वरूप अत्यंत भयानक है, मगर वह सदैव अपने भक्तों को शुभ फल प्रदान करती हैं। इनका स्मरण करने से दानव, भूत-प्रेत, राक्षस, दैत्य डरकर भाग जाते हैं। कालरात्रि रूप का अवतार असुरों के राजा रक्तबीज का वध करने के लिए हुआ था। इनकी पूजा करने से घर में सुख-समृद्धि बनी रहती है।
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