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Rohtak News: शराब ठेकेदार से मंथली की फाइल ठंडे बस्ते में, 90 दिन बाद भी चार्जशीट दाखिल नहीं
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माई सिटी रिपोर्टर
रोहतक। शराब ठेकेदार प्रवीण बंसल से मंथली मांगने के केस में पुलिस की जांच भी ठंडे बस्ते में चली गई है। केस में एसआईटी को 60 दिन में एडीजीपी वाई पूरण कुमार के गनमैन आरोपी सुशील कुमार के खिलाफ अदालत में चार्जशीट दाखिल करनी थी लेकिन बुधवार को 90 दिन हो गए। फिर भी चार्जशीट दाखिल नहीं की गई है। विभाग के आला अधिकारियों का कहना है कि कई अहम बिंदुओं की जांच अधूरी है, इसलिए समय लग रहा है।
रोहतक के शराब कारोबारी प्रवीण बंसल ने छह अक्तूबर 2025 को अर्बन एस्टेट थाने में गनमैन सुशील कुमार के खिलाफ बीएनएस की धारा 308(3) के तहत मंथली मांगने और न देने पर झूठे केस में फंसाने का मामला दर्ज कराया था।
आरोप था कि सुशील कुमार ने धौंस दिखाकर ढाई लाख रुपये प्रति माह मंथली देने की मांग की। इसके लिए शराब ठेकेदार ने पुलिस को एक वीडियो व ऑडियो भी पुलिस सौंपी। पुलिस ने जांच कर अगले ही दिन आरोपी गनमैन को गिरफ्तार कर लिया था।
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सात अक्तूबर को ही एडीजीपी पूरण कुमार ने चंडीगढ़ में कथित तौर पर आत्महत्या कर ली थी। विभाग ने मंथली प्रकरण की जांच डीएसपी गुलाब सिंह की अध्यक्षता में एसआईटी को सौंपी थी। एसआईटी ने जांच के दौरान सुशील कुमार के खिलाफ भ्रष्टाचार अधिनियम की धारा-7 भी जोड़ी थी।
नियमों के तहत दो माह के अंदर आरोपी के खिलाफ पुलिस को चार्जशीट दाखिल करनी थी लेकिन छह दिसंबर तक एसआईटी ऐसा नहीं कर सकी। ऐसे में सात दिसंबर को सुशील कुमार को जमानत मिल गई। उस समय एसआईटी ने अदालत में कहा था कि पुलिस की जांच अधूरी है, इसलिए चार्जशीट दाखिल करने में समय लग रहा है।
मंथली केस की जांच कर रही एसआईटी की अध्यक्षता डीएसपी गुलाब सिंह कर रहे हैं। अर्बन एस्टेट थाने के तत्कालीन प्रभारी इंस्पेक्टर नीरज कुमार का पुलिस लाइन में तबादला हो चुका है जबकि कागजों में अब तक जांच जारी है।
20 नवंबर को तैयार हो गई थी चार्जशीट, आपत्ति लगने के बाद रोकी गई
पुलिस सूत्रों का कहना है कि पूरे मामले की चार्जशीट 22 नवंबर को तैयार हो गई थी। उस पर डीएसपी व एसएचओ के हस्ताक्षर भी हो गए। कानूनी एक्सपर्ट से जांच भी कराई गई। शराब ठेकेदार के कार्यालय से जब्त सीसीटीवी कैमरे की डीवीआर की फॉरेंसिक जांच रिपोर्ट न आने पर चार्जशीट को दाखिल नहीं किया गया। हालांकि, एक्सपर्ट का कहना है कि रिपोर्ट पुलिस बाद में भी दाखिल कर सकती थी। जांच टीम की ऐसी क्या मजबूरी है, इस केस में ऐसा नहीं किया गया।
कुछ प्वाॅइंट पर जांच अधूरी है, इसलिए चार्जशीट दाखिल नहीं हो सकी है। जैसे ही जांच पूरी होगी, अदालत में चार्जशीट दाखिल कर दी जाएगी।
- सुरेंद्र सिंह भौरिया, एसपी रोहतक
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रोहतक। शराब ठेकेदार प्रवीण बंसल से मंथली मांगने के केस में पुलिस की जांच भी ठंडे बस्ते में चली गई है। केस में एसआईटी को 60 दिन में एडीजीपी वाई पूरण कुमार के गनमैन आरोपी सुशील कुमार के खिलाफ अदालत में चार्जशीट दाखिल करनी थी लेकिन बुधवार को 90 दिन हो गए। फिर भी चार्जशीट दाखिल नहीं की गई है। विभाग के आला अधिकारियों का कहना है कि कई अहम बिंदुओं की जांच अधूरी है, इसलिए समय लग रहा है।
रोहतक के शराब कारोबारी प्रवीण बंसल ने छह अक्तूबर 2025 को अर्बन एस्टेट थाने में गनमैन सुशील कुमार के खिलाफ बीएनएस की धारा 308(3) के तहत मंथली मांगने और न देने पर झूठे केस में फंसाने का मामला दर्ज कराया था।
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आरोप था कि सुशील कुमार ने धौंस दिखाकर ढाई लाख रुपये प्रति माह मंथली देने की मांग की। इसके लिए शराब ठेकेदार ने पुलिस को एक वीडियो व ऑडियो भी पुलिस सौंपी। पुलिस ने जांच कर अगले ही दिन आरोपी गनमैन को गिरफ्तार कर लिया था।
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सात अक्तूबर को ही एडीजीपी पूरण कुमार ने चंडीगढ़ में कथित तौर पर आत्महत्या कर ली थी। विभाग ने मंथली प्रकरण की जांच डीएसपी गुलाब सिंह की अध्यक्षता में एसआईटी को सौंपी थी। एसआईटी ने जांच के दौरान सुशील कुमार के खिलाफ भ्रष्टाचार अधिनियम की धारा-7 भी जोड़ी थी।
नियमों के तहत दो माह के अंदर आरोपी के खिलाफ पुलिस को चार्जशीट दाखिल करनी थी लेकिन छह दिसंबर तक एसआईटी ऐसा नहीं कर सकी। ऐसे में सात दिसंबर को सुशील कुमार को जमानत मिल गई। उस समय एसआईटी ने अदालत में कहा था कि पुलिस की जांच अधूरी है, इसलिए चार्जशीट दाखिल करने में समय लग रहा है।
मंथली केस की जांच कर रही एसआईटी की अध्यक्षता डीएसपी गुलाब सिंह कर रहे हैं। अर्बन एस्टेट थाने के तत्कालीन प्रभारी इंस्पेक्टर नीरज कुमार का पुलिस लाइन में तबादला हो चुका है जबकि कागजों में अब तक जांच जारी है।
20 नवंबर को तैयार हो गई थी चार्जशीट, आपत्ति लगने के बाद रोकी गई
पुलिस सूत्रों का कहना है कि पूरे मामले की चार्जशीट 22 नवंबर को तैयार हो गई थी। उस पर डीएसपी व एसएचओ के हस्ताक्षर भी हो गए। कानूनी एक्सपर्ट से जांच भी कराई गई। शराब ठेकेदार के कार्यालय से जब्त सीसीटीवी कैमरे की डीवीआर की फॉरेंसिक जांच रिपोर्ट न आने पर चार्जशीट को दाखिल नहीं किया गया। हालांकि, एक्सपर्ट का कहना है कि रिपोर्ट पुलिस बाद में भी दाखिल कर सकती थी। जांच टीम की ऐसी क्या मजबूरी है, इस केस में ऐसा नहीं किया गया।
कुछ प्वाॅइंट पर जांच अधूरी है, इसलिए चार्जशीट दाखिल नहीं हो सकी है। जैसे ही जांच पूरी होगी, अदालत में चार्जशीट दाखिल कर दी जाएगी।
- सुरेंद्र सिंह भौरिया, एसपी रोहतक