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उदयीमान सूर्य को अर्घ्य देकर आज व्रत खोलेंगी व्रती
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दिल्ली बाईपास नहर पर अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य देतीa व्रती। अमर उजाला
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रोहतक। छठ पर्व का आज अंतिम दिन है। व्रती आज उदयीमान सूर्य को अर्घ्य देने के साथ अपना 36 घंटे का निर्जला व्रत खोलेंगी। वहीं रविवार को भालौठ सब ब्रांच नहर, गोकर्ण धाम के पवित्र सरोवर, पोखर, तालाबों व घरों में पानी में खड़े होकर व्रतियों ने अस्ताचल गामी सूर्य देव को अर्घ्य दिया।
शहर में जगह-जगह पूर्वांचल के लोगों ने छठ पूजा धूमधाम से मनाई। पर्व पर मेयर मनमोहन गोयल, महामंडलेश्वर कपिलपुरी व महंत कालीदास भी मौके पर पहुंचे और श्रद्धालुओं को पर्व की बधाई देते हुए आशीर्वाद दिया। नहर व तालाब पर रविवार को दोपहर से ही छठ व्रतियों एवं दर्शनार्थियों के आने का सिलसिला शुरू हो गया था। नहाय खाय के साथ शुरू हुए छठ महापर्व के तीसरे दिन छठ व्रतियों ने सूर्यदेव को गेहूं के आटे, गुड़ व शक्कर से बने ठेकुये अर्पित किए। साथ ही चावल से बने भुसबा के साथ ही गन्ना, नारियल, केला, हल्दी, सेब, फल-फूल हाथों में लेकर शाम को विधि-विधान से छठमाता की आराधना की। शुद्धता और साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखा गया। इस दौरान आतिशबाजियां और गाजे-बाजे से माहौल रंगीन बना रहा।
घर जाने की बजाय अपने शहर में ही मनाया पर्व
पूर्वांचल एकता सेवा समिति के सदस्य अनुराग मिश्र व आशीष दुबे ने बताया कि छठ पर्व पूर्वांचल में हर्षोल्लास से मनाया जाता है। बिहार और उत्तरप्रदेश जाने के लिए ट्रेनों में जगह न मिलने व अन्य कारणों से इसे यही मनाया गया। श्रद्धालुओं को घाट व तालाब की सुविधा उपलब्ध करवाने के लिए वह प्रशासन व महामंडलेश्वर कपिलपुरी के आभारी हैं।
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शहर में जगह-जगह पूर्वांचल के लोगों ने छठ पूजा धूमधाम से मनाई। पर्व पर मेयर मनमोहन गोयल, महामंडलेश्वर कपिलपुरी व महंत कालीदास भी मौके पर पहुंचे और श्रद्धालुओं को पर्व की बधाई देते हुए आशीर्वाद दिया। नहर व तालाब पर रविवार को दोपहर से ही छठ व्रतियों एवं दर्शनार्थियों के आने का सिलसिला शुरू हो गया था। नहाय खाय के साथ शुरू हुए छठ महापर्व के तीसरे दिन छठ व्रतियों ने सूर्यदेव को गेहूं के आटे, गुड़ व शक्कर से बने ठेकुये अर्पित किए। साथ ही चावल से बने भुसबा के साथ ही गन्ना, नारियल, केला, हल्दी, सेब, फल-फूल हाथों में लेकर शाम को विधि-विधान से छठमाता की आराधना की। शुद्धता और साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखा गया। इस दौरान आतिशबाजियां और गाजे-बाजे से माहौल रंगीन बना रहा।
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घर जाने की बजाय अपने शहर में ही मनाया पर्व
पूर्वांचल एकता सेवा समिति के सदस्य अनुराग मिश्र व आशीष दुबे ने बताया कि छठ पर्व पूर्वांचल में हर्षोल्लास से मनाया जाता है। बिहार और उत्तरप्रदेश जाने के लिए ट्रेनों में जगह न मिलने व अन्य कारणों से इसे यही मनाया गया। श्रद्धालुओं को घाट व तालाब की सुविधा उपलब्ध करवाने के लिए वह प्रशासन व महामंडलेश्वर कपिलपुरी के आभारी हैं।
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