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नौनिहालों पर मानव तस्करों की नजर...
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सीडब्लूसी कार्यालय में कागजी कार्रवाई निपटाती समिति सदस्य। अमर उजाला
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मानव तस्करों की नजर कहीं आपके मासूमों पर तो नहीं है। बच्चों की खरीद-फरोख्त, अगवा करने, बालश्रम, यौन उत्पीड़न के मामले कुछ यही बयां कर रहे हैं। बच्चों के घर से भागने के मामले भी कम नहीं हैं। बाल कल्याण समिति ( सीडब्ल्यूसी )के आंकड़े बता रहे हैं कि जिले में हर माह औसतन इन मामलों से जुड़े करीब 40 मामले सामने आ रहे हैं। राहत भरी खबर यह है कि समिति तमाम बच्चों को न केवल बंदिशों से मुक्त करवा रही है, बल्कि इनके पुनर्वास पर ही ध्यान दे रही है। अमर उजाला ने बाल कल्याण समिति से बातचीत की तो यह सच सामने आया। कमेटी में चेयरपर्सन आशा आहुजा, सदस्य बीना कौशिक, रचना पालीवाल, अंजू बाला, कोमल खन्ना शामिल हैं।
केस 1:
एक साल झाड़ू पोंछा करा बहन को बेच गया भाई
शहर के हिसार बाईपास पुल के नीचे बैठी रोती 10 साल बच्ची को पुलिस ने 14 मार्च को सीडब्ल्यूसी के सुपुर्द किया था। काउंसिलिंग में बच्ची ने उत्पीड़न व बेचने के बारे में बताया। बच्ची ने बताया कि पिता गुजर चुके हैं। मां को बताए बगैर भाई उसे साथ ले आया। यहां एक घर में एक साल झाड़ू पोंछा कराया। इसके बाद एक घर में उसे बेच कर कहीं चला गया। यहां रहनेवाले पति -पत्नी उसे मारते-पीटते थे। इनसे आहत होकर बच्ची घर से भाग गई। गनीमत रही कि उसे रोते हुए पुलिस ने देखा। क्राइम ब्रांच ने जांच की तो पता लगा कि बच्ची झारखंड की है। उसके परिजनों का पता लगाकर समिति ने हाल ही में बच्ची उसकी मां को सौंप दिया।
केस 2:
14 साल की उम्र में हो गई 3 शादियां
सीडब्ल्यूसी ने बिहार के भागलपुर की 14 वर्षीय बच्ची को मानव तस्करों के चंगुल से मुक्त करवाकर 27 अगस्त को सुरक्षित हाथों में सुपुर्द किया है। काउंसिलिंग में बच्ची ने कहा है कि चाचा-चाची उसे अपने साथ दिल्ली लाए थे। यहां एक कंपनी के तहत घरेलू कामकाज कराया। यही नहीं, उसकी तीन शादियां करा दी। तीसरी शादी एक पंकज नाम के व्यक्ति से हुई थी। दूसरी शादी करीब दो महीने रही थी। पहली शादी कितने दिन रही पता नहीं। अगस्त में किसी ने उसे 40 रुपये देकर दिल्ली स्टेशन पर ट्रेन में बैठाया था। रोहतक रेलवे स्टेशन पर बच्ची को लावारिस हालत में देखा तो उसे सीडब्ल्यूसी के हवाले कर दिया। कक्षा चार तक पढ़ी इस बच्ची के पिता लोहा गलाने का काम करते हैं। बच्ची पिता के पास पहुंच गई है।
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केस 3:
बच्ची से दिन-रात करा रहे थे घर का काम
शहर के सेक्टर दो इलाके में एक बच्ची को बिहार से लाया गया था। इसे काम दिलाने के बहाने एक घर में छोड़ दिया गया। यहां बच्ची से दिन-रात घर का काम कराया जा रहा था। काम करते समय प्लेट, कप या ग्लास टूट जाने पर उसे पीटा जाता था। यही नहीं, दो समय ही खाना मिलता था। कपड़े पुराने और फटे हुए थे। बाहर के लोगों से उसका मिलना-जुलना पूरी तरह प्रतिबंधित था। पड़ोसी को भनक लगी तो मामला खुला और कमेटी ने बच्ची को मुक्त कराया।
कोरोना में बेसहारा हुए बच्चों को दिया आश्रय
बाल कल्याण समिति बेसहारा बच्चों का सहारा बनी हुई है। सड़कों पर भीख मांगने वाले बच्चे हों या होटल-ढाबों पर बर्तन साफ करने वाले, सभी को संरक्षण देने की जिम्मेदारी इन्हीं की है। कोरोना की दूसरी लहर में अभिभावकों को खोने वाले बेसहारा बच्चों को भी समिति ने ही आश्रय दिया है। ऐसे बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य व अन्य जरूरतों की पूर्ति व उनके निर्वहन की जिम्मेदारी समिति उठा रही है।
समिति शोषण का शिकार हुए बच्चों को मुक्त कराने के साथ उनकी काउंसिलिंग भी कर रही है। बच्चों का उत्पीड़न करने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा रही है। समिति के पास अप्रैल से जून महीने में ही 166 केस आए हैं। इनमें बच्चों की खरीद-फरोख्त, बालश्रम, यौन उत्पीड़न, भीख मांगने, घर से भागने, बाल विवाह, पॉक्सो व अन्य मामले शामिल हैं।
- बीना कौशिक, सदस्य, बाल कल्याण समिति
सरकार ने बेसहारा व विशेष आवश्यकता वाले बच्चों के लिए समिति गठित की है। यह समिति इन बच्चों की देखभाल का निर्वहन कर रही है। जिले में बच्चों से जुड़े करीब 40 मामले हर महीने सामने आ रहे हैं। इनमें बच्चों को बेचने, उनसे बाल मजदूरी कराने व उत्पीड़न के मामले ज्यादा हैं। ऐसे मामलों में सख्ती बरतते हुए दोषियों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई भी की जा रही है। समिति ने काफी बच्चों को शोषण से मुक्त कराकर अपने आश्रय में लिया है।
- आशा आहुजा, चेयरपर्सन, बाल कल्याण समिति
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केस 1:
एक साल झाड़ू पोंछा करा बहन को बेच गया भाई
शहर के हिसार बाईपास पुल के नीचे बैठी रोती 10 साल बच्ची को पुलिस ने 14 मार्च को सीडब्ल्यूसी के सुपुर्द किया था। काउंसिलिंग में बच्ची ने उत्पीड़न व बेचने के बारे में बताया। बच्ची ने बताया कि पिता गुजर चुके हैं। मां को बताए बगैर भाई उसे साथ ले आया। यहां एक घर में एक साल झाड़ू पोंछा कराया। इसके बाद एक घर में उसे बेच कर कहीं चला गया। यहां रहनेवाले पति -पत्नी उसे मारते-पीटते थे। इनसे आहत होकर बच्ची घर से भाग गई। गनीमत रही कि उसे रोते हुए पुलिस ने देखा। क्राइम ब्रांच ने जांच की तो पता लगा कि बच्ची झारखंड की है। उसके परिजनों का पता लगाकर समिति ने हाल ही में बच्ची उसकी मां को सौंप दिया।
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केस 2:
14 साल की उम्र में हो गई 3 शादियां
सीडब्ल्यूसी ने बिहार के भागलपुर की 14 वर्षीय बच्ची को मानव तस्करों के चंगुल से मुक्त करवाकर 27 अगस्त को सुरक्षित हाथों में सुपुर्द किया है। काउंसिलिंग में बच्ची ने कहा है कि चाचा-चाची उसे अपने साथ दिल्ली लाए थे। यहां एक कंपनी के तहत घरेलू कामकाज कराया। यही नहीं, उसकी तीन शादियां करा दी। तीसरी शादी एक पंकज नाम के व्यक्ति से हुई थी। दूसरी शादी करीब दो महीने रही थी। पहली शादी कितने दिन रही पता नहीं। अगस्त में किसी ने उसे 40 रुपये देकर दिल्ली स्टेशन पर ट्रेन में बैठाया था। रोहतक रेलवे स्टेशन पर बच्ची को लावारिस हालत में देखा तो उसे सीडब्ल्यूसी के हवाले कर दिया। कक्षा चार तक पढ़ी इस बच्ची के पिता लोहा गलाने का काम करते हैं। बच्ची पिता के पास पहुंच गई है।
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केस 3:
बच्ची से दिन-रात करा रहे थे घर का काम
शहर के सेक्टर दो इलाके में एक बच्ची को बिहार से लाया गया था। इसे काम दिलाने के बहाने एक घर में छोड़ दिया गया। यहां बच्ची से दिन-रात घर का काम कराया जा रहा था। काम करते समय प्लेट, कप या ग्लास टूट जाने पर उसे पीटा जाता था। यही नहीं, दो समय ही खाना मिलता था। कपड़े पुराने और फटे हुए थे। बाहर के लोगों से उसका मिलना-जुलना पूरी तरह प्रतिबंधित था। पड़ोसी को भनक लगी तो मामला खुला और कमेटी ने बच्ची को मुक्त कराया।
कोरोना में बेसहारा हुए बच्चों को दिया आश्रय
बाल कल्याण समिति बेसहारा बच्चों का सहारा बनी हुई है। सड़कों पर भीख मांगने वाले बच्चे हों या होटल-ढाबों पर बर्तन साफ करने वाले, सभी को संरक्षण देने की जिम्मेदारी इन्हीं की है। कोरोना की दूसरी लहर में अभिभावकों को खोने वाले बेसहारा बच्चों को भी समिति ने ही आश्रय दिया है। ऐसे बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य व अन्य जरूरतों की पूर्ति व उनके निर्वहन की जिम्मेदारी समिति उठा रही है।
समिति शोषण का शिकार हुए बच्चों को मुक्त कराने के साथ उनकी काउंसिलिंग भी कर रही है। बच्चों का उत्पीड़न करने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा रही है। समिति के पास अप्रैल से जून महीने में ही 166 केस आए हैं। इनमें बच्चों की खरीद-फरोख्त, बालश्रम, यौन उत्पीड़न, भीख मांगने, घर से भागने, बाल विवाह, पॉक्सो व अन्य मामले शामिल हैं।
- बीना कौशिक, सदस्य, बाल कल्याण समिति
सरकार ने बेसहारा व विशेष आवश्यकता वाले बच्चों के लिए समिति गठित की है। यह समिति इन बच्चों की देखभाल का निर्वहन कर रही है। जिले में बच्चों से जुड़े करीब 40 मामले हर महीने सामने आ रहे हैं। इनमें बच्चों को बेचने, उनसे बाल मजदूरी कराने व उत्पीड़न के मामले ज्यादा हैं। ऐसे मामलों में सख्ती बरतते हुए दोषियों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई भी की जा रही है। समिति ने काफी बच्चों को शोषण से मुक्त कराकर अपने आश्रय में लिया है।
- आशा आहुजा, चेयरपर्सन, बाल कल्याण समिति