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नगर निगम का फरमान ः पार्षदों के कहने से नहीं, आमजन के हस्ताक्षर से होंगे काम
ब्यूरो/अमर उजाला, रोहतक
Updated Sat, 16 Apr 2016 02:18 AM IST
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नगर निगम के नए फरमान से मचा घमासान
- फोटो : अमर उजाला
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नगर निगम अधिकारी अपनी परेशानी कम करने के लिए आए दिन नए नियम बनाते हैं और उस पर घमासान शुरू हो जाता है। अब वार्डों में विकास कार्य कराने के लिए पार्षदों को पूरी तरह से किनारे कर दिया गया है।
नए नियम के तहत अब आमजन के हस्ताक्षर से काम होंगे। इसके लिए पार्षदों के पास फार्म भेज दिए गए हैं कि वे विकास कार्य कराने से पहले वहां के लोगों से उन फार्म को भरवाकर दें। उसके बाद ही विकास कार्य होगा। निगम के इस फरमान पर सियासी घमासान शुरू हो गया है जिसपर घमासान शुरू हो गया है और पार्षदों ने इसका पुरजोर विरोध शुरू कर दिया है। क्योंकि इस तरह से शायद ही कोई विकास कार्य हो सकेगा, क्योंकि एक न एक आदमी ऐसा जरूर रहता है जो वहां होने वाले काम का विरोध करता है। मेयर खुद भी इस नियम के विरोध में खड़ी हो गई हैं और इसे बदलवाने की बात कह रही हैं।
नगर निगम पार्षद को अपने वार्ड में कोई विकास कार्य कराना होता है तो उनकी ओर से निगम को प्रस्ताव भेजा जाता है। जिसे हाउस मीटिंग में पास कराने के बाद बजट मिलते ही काम शुरू करा दिया जाता है। छोटे काम को तो निगम अधिकारी खुद भी आदेश करके करा देते हैं। लेकिन अब एक फरमान जारी किया गया है। स्ट्रीट लाइट लगवाने के लिए नगर निगम अधिकारियों की ओर से पार्षदों को एक शपथ पत्र दिया गया है।
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शपथ पत्र पर पार्षदों को उस मोहल्ले के लोगों से हस्ताक्षर कराकर देने होंगे कि वहां स्ट्रीट लाइट लगवाने से उनको कोई परेशानी नहीं है। उसके बाद ही लाइट लगवाई जाएगी। गली में नाली या गली पक्की करानी होगी तो उसके लिए भी एक फार्म भरवाना होगा। जितनी बड़ी गली बननी है, उस बीच में जितने भी मकान पड़ते है उन सभी मकान मालिकों के उस फार्म पर हस्ताक्षर होने जरूरी हैं। वे सभी लिखकर देंगे कि उनको गली में काम होने से कोई परेशानी नहीं है और वे उसमें पूरा सहयोग करेंगे।
यह सब कुछ होने के बाद पार्षद उस फार्म को नगर निगम अधिकारियों को देंगे और उसके बाद विकास कार्य कराए जाएंगे। इस तरह का नियम आने से पार्षदों के लिए परेशानी खड़ी हो गई है।
किसी भी जिले में नहीं नियम
फरमान सुनते ही पार्षदों ने दूसरे जिलों में फोन घूमाना शुरू कर दिया है। पूछ रहे हैं कि क्या दूसरे जिलों में भी इस तरह का कोई नियम है। पता चला कि आसपास के किसी भी जिले की नगर निगम में ऐसा नियम नहीं है। इससे विरोध और तेज हो गया है।
पानी व सीवर लाइन टूटने का खर्च भी खुद उठाने को कहा
फार्म में सबसे बड़ी बात यह भी लिखी गई है कि जिस जगह विकास कार्य होंगे, वहां के लोगों को यह भी लिखकर देना होगा कि वहां पानी और सीवर लाइन टूटती है तो उसका खर्च भी वे खुद ही उठाएंगे। इस हालात में शायद ही कोई व्यक्ति विकास कार्य कराने के लिए तैयार होगा, क्योंकि गली में काम होने पर पानी व सीवर लाइन टूटना आम बात है।
इस तरह का नियम किसी भी जिले में नहीं चल रहा है तो हमारे यहां कैसे इसे लागू किया जा सकता है? इसके लिए पार्षदों के साथ मीटिंग की जाएगी और उनकी राय जानी जाएगी। वह इसका विरोध करते है तो इसे लागू नहीं होने दिया जाएगा और वह लागू करने के लिए कहते है तो यह उनका फैसला होगा। रेनू डाबला, मेयर नगर निगम
नगर निगम के अधिकारी जिस तरह से नये-नये नियम बनाकर पार्षदों पर थोंप रहे है, उससे शहर में विकास होगा ही नहीं। क्योंकि हर जगह कोई न कोई ऐसा व्यक्ति मिल जाता है जो इसका विरोध करता है। इसलिए यह नियम पूरी तरह से गलत है और पार्षदों को नीचा दिखाने के लिए ऐसा किया गया है। नीरा भटनागर, पार्षद
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नए नियम के तहत अब आमजन के हस्ताक्षर से काम होंगे। इसके लिए पार्षदों के पास फार्म भेज दिए गए हैं कि वे विकास कार्य कराने से पहले वहां के लोगों से उन फार्म को भरवाकर दें। उसके बाद ही विकास कार्य होगा। निगम के इस फरमान पर सियासी घमासान शुरू हो गया है जिसपर घमासान शुरू हो गया है और पार्षदों ने इसका पुरजोर विरोध शुरू कर दिया है। क्योंकि इस तरह से शायद ही कोई विकास कार्य हो सकेगा, क्योंकि एक न एक आदमी ऐसा जरूर रहता है जो वहां होने वाले काम का विरोध करता है। मेयर खुद भी इस नियम के विरोध में खड़ी हो गई हैं और इसे बदलवाने की बात कह रही हैं।
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नगर निगम पार्षद को अपने वार्ड में कोई विकास कार्य कराना होता है तो उनकी ओर से निगम को प्रस्ताव भेजा जाता है। जिसे हाउस मीटिंग में पास कराने के बाद बजट मिलते ही काम शुरू करा दिया जाता है। छोटे काम को तो निगम अधिकारी खुद भी आदेश करके करा देते हैं। लेकिन अब एक फरमान जारी किया गया है। स्ट्रीट लाइट लगवाने के लिए नगर निगम अधिकारियों की ओर से पार्षदों को एक शपथ पत्र दिया गया है।
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शपथ पत्र पर पार्षदों को उस मोहल्ले के लोगों से हस्ताक्षर कराकर देने होंगे कि वहां स्ट्रीट लाइट लगवाने से उनको कोई परेशानी नहीं है। उसके बाद ही लाइट लगवाई जाएगी। गली में नाली या गली पक्की करानी होगी तो उसके लिए भी एक फार्म भरवाना होगा। जितनी बड़ी गली बननी है, उस बीच में जितने भी मकान पड़ते है उन सभी मकान मालिकों के उस फार्म पर हस्ताक्षर होने जरूरी हैं। वे सभी लिखकर देंगे कि उनको गली में काम होने से कोई परेशानी नहीं है और वे उसमें पूरा सहयोग करेंगे।
यह सब कुछ होने के बाद पार्षद उस फार्म को नगर निगम अधिकारियों को देंगे और उसके बाद विकास कार्य कराए जाएंगे। इस तरह का नियम आने से पार्षदों के लिए परेशानी खड़ी हो गई है।
किसी भी जिले में नहीं नियम
फरमान सुनते ही पार्षदों ने दूसरे जिलों में फोन घूमाना शुरू कर दिया है। पूछ रहे हैं कि क्या दूसरे जिलों में भी इस तरह का कोई नियम है। पता चला कि आसपास के किसी भी जिले की नगर निगम में ऐसा नियम नहीं है। इससे विरोध और तेज हो गया है।
पानी व सीवर लाइन टूटने का खर्च भी खुद उठाने को कहा
फार्म में सबसे बड़ी बात यह भी लिखी गई है कि जिस जगह विकास कार्य होंगे, वहां के लोगों को यह भी लिखकर देना होगा कि वहां पानी और सीवर लाइन टूटती है तो उसका खर्च भी वे खुद ही उठाएंगे। इस हालात में शायद ही कोई व्यक्ति विकास कार्य कराने के लिए तैयार होगा, क्योंकि गली में काम होने पर पानी व सीवर लाइन टूटना आम बात है।
इस तरह का नियम किसी भी जिले में नहीं चल रहा है तो हमारे यहां कैसे इसे लागू किया जा सकता है? इसके लिए पार्षदों के साथ मीटिंग की जाएगी और उनकी राय जानी जाएगी। वह इसका विरोध करते है तो इसे लागू नहीं होने दिया जाएगा और वह लागू करने के लिए कहते है तो यह उनका फैसला होगा। रेनू डाबला, मेयर नगर निगम
नगर निगम के अधिकारी जिस तरह से नये-नये नियम बनाकर पार्षदों पर थोंप रहे है, उससे शहर में विकास होगा ही नहीं। क्योंकि हर जगह कोई न कोई ऐसा व्यक्ति मिल जाता है जो इसका विरोध करता है। इसलिए यह नियम पूरी तरह से गलत है और पार्षदों को नीचा दिखाने के लिए ऐसा किया गया है। नीरा भटनागर, पार्षद