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Rohtak News: तीन महीने पहले माइनर पर बनी पुलिया क्षतिग्रस्त
Wed, 17 Apr 2024 11:43 PM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, रोहतक
संवाद न्यूज एजेंसी, रोहतक
Updated Wed, 17 Apr 2024 11:43 PM IST
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17jjrp10 साल्हावास। झोलरी माइनर पर बने पुलिया की हुई खस्ता हालत।संवाद
साल्हावास। गांव खानपुर स्थित झोलरी माइनर पर तीन महीने पहले ही माइनर पर सीसी की पुलिया बनाने निर्माण कार्य पूरा किया गया है, लेकिन अभी से पुलों से कंक्रीट बिखरने लगी है। इससे आवागमन बाधित हो रहा हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि पुलियों का ढलान सही ढंग से नहीं किया गया। उन्होंने घटिया सामग्री लगाने का आरोप भी लगाया है।
ग्रामीणों ने बताया कि इस संबंध में जेई व एसडीओ को कई बार अवगत कराया जा चुका है, लेकिन बार-बार शिकायत करने के बाद भी समाधान नहीं हो रहा है। गौरतलब है कि झोलरी माइनर पर खानपुर कलां में दो पुलों को निर्माण किया गया, जिनमें से खानपुर कलां से खोरड़ा मार्ग पर बना पुल व खानपुर कलां से गोठडा मार्ग पर बना पुल खस्ता ही रहे हैं। दोनों ही पुलों से कंक्रीट निकल रहे हैं। नहरी पुल की मियाद कम से कम 25 से 30 वर्ष होती है जबकि ये दोनों ही पुल मात्र दो महीने में ही टूटने शुरू हो गए हैं। ग्रामीणों की मांग है कि झोलरी माइनर पर बने इन दोनों पुलों को ठीक किया जाए।
माइनर का नाम झामरी माइनर करवाने की मांग
ग्रामीण रमेश शर्मा, अत्तर सिंह, पूनम शर्मा आदि ने बताया कि वास्तव में यह माइनर झामरी माइनर है, लेकिन लंबे समय से इसका नाम सिंचाई विभाग के रिकॉर्ड में झोलरी माइनर लिखा हुआ है, जो गलत है। खानपुर कलां से आगे यह माइनर झामरी सीमा तक जाती है इसलिए इसका नाम झामरी माइनर ही होना चाहिए। झोलरी रेवाड़ी जिले का गांव है, जो इस माइनर के आसपास भी नहीं है, लेकिन फिर भी पत्ता नहीं क्यों इसका नाम झोलरी माइनर रखा गया है।
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वर्जन
पुलिया से कंक्रीट निकलने व ढलान के संबंध में ग्रामीणों ने अवगत कराया है। जेई को भेजकर मौका मुआयना करवाया जाएगा। पुलियों को दुरूस्त करवाया जाएगा।
सुंदर सिंह, एसडीओ, सिंचाई विभाग चरखी दादरी
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ग्रामीणों ने बताया कि इस संबंध में जेई व एसडीओ को कई बार अवगत कराया जा चुका है, लेकिन बार-बार शिकायत करने के बाद भी समाधान नहीं हो रहा है। गौरतलब है कि झोलरी माइनर पर खानपुर कलां में दो पुलों को निर्माण किया गया, जिनमें से खानपुर कलां से खोरड़ा मार्ग पर बना पुल व खानपुर कलां से गोठडा मार्ग पर बना पुल खस्ता ही रहे हैं। दोनों ही पुलों से कंक्रीट निकल रहे हैं। नहरी पुल की मियाद कम से कम 25 से 30 वर्ष होती है जबकि ये दोनों ही पुल मात्र दो महीने में ही टूटने शुरू हो गए हैं। ग्रामीणों की मांग है कि झोलरी माइनर पर बने इन दोनों पुलों को ठीक किया जाए।
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माइनर का नाम झामरी माइनर करवाने की मांग
ग्रामीण रमेश शर्मा, अत्तर सिंह, पूनम शर्मा आदि ने बताया कि वास्तव में यह माइनर झामरी माइनर है, लेकिन लंबे समय से इसका नाम सिंचाई विभाग के रिकॉर्ड में झोलरी माइनर लिखा हुआ है, जो गलत है। खानपुर कलां से आगे यह माइनर झामरी सीमा तक जाती है इसलिए इसका नाम झामरी माइनर ही होना चाहिए। झोलरी रेवाड़ी जिले का गांव है, जो इस माइनर के आसपास भी नहीं है, लेकिन फिर भी पत्ता नहीं क्यों इसका नाम झोलरी माइनर रखा गया है।
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वर्जन
पुलिया से कंक्रीट निकलने व ढलान के संबंध में ग्रामीणों ने अवगत कराया है। जेई को भेजकर मौका मुआयना करवाया जाएगा। पुलियों को दुरूस्त करवाया जाएगा।
सुंदर सिंह, एसडीओ, सिंचाई विभाग चरखी दादरी