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एक बस का टूटा एक्सेल, दूसरी का डीजल टैंक टूटकर सड़क से टकराया
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गांव किनाना और चांदी गांव के पास बस की टूटी डीजल टंकी । संवाद
जिले के रोडवेज डिपो के अधिकारियों और कर्मचारियों की लापरवाही के चलते रविवार को दो बसों की 100 से ज्यादा यात्रियों की जान खतरे में पड़ गई। जींद से सवारियों से भरी बस रफ्तार में दौड़ती रोहतक आ रही थी कि गांव किनाना में एक्सेल (सापड) टूट गया। इसके टूटते ही बस असंतुलित हो गई। इस पर सवारियां चीखने लगीं। उधर, चांदी गांव के पास सवारियों से भरी बस की डीजल टंकी एक और से टूटकर सड़क से टकरा गई। घिसटती हुई कुछ दूर तक चलती रही। इस दौरान चालक ने इमरजेंसी ब्रेक लगाकर बस रोक दी। टंकी फटने से गंभीर हादसा हो सकता था। चालकों की सूझबूझ से गंभीर हादसा होने से बच गया।
रोडवेज के चालक डी-315 रूपेंद्र और परिचालक सी-403 अजित रविवार की दोपहर में जींद से रोहतक डिपो की बस संख्या एचआर46डी-1188 लेकर रोहतक के लिए चले थे। इस दौरान बस में करीब 52 सवारियां बैठी थीं। रास्ते में गांव किनाना में बस से काफी खटखटाने की आवाज होने लगी। इस दौरान एक्सेल (सापड) टूटकर सड़क से टकरा गया। इससे बस बेकाबू हो गई और सवारियां की चीखने लगीं। इस पर चालक ने सूझबूझ का परिचय देते हुए बस को रोक दिया। बाद में सवारियों को दूसरी बस से गंतव्य तक भेजा गया। चालक ने बताया कि सापड़ टूटने के बाद बस असंतुलित हो गई। पीछे से टूटी सापड के दोबारा ऊपर उठने से गंभीर हादसा हो सकता था।
उधर, 52 सवारियों से भरी बस लाखनमाजरा-रोहतक रोड पर तेज रफ्तार से गंतव्य की ओर जा रही थी। जब वह चांदी गांव के पास पहुंची तभी सड़क पर बने गड्ढों की वजह से बस की डीजल से भरी टंकी एक तरफ से टूटकर गिर गई और कुछ दूरी तक घिटसती रही। जानकारी मिलते ही चालक ने इमरजेंसी ब्रेक लगाकर बस रोक दी। कंडक्टर ने बताया कि बस में 52 सवारियां मौजूद रहीं। टंकी में करीब ढाई सौ लीटर डीजल भरा था। अगर टंकी फटती तो आग लगने से गंभीर हादसा हो सकता था। रोहतक डिपो के डीआई (ड्यूटी इंस्पेक्टर) सुरेश ने बताया कि उन्हें ऐसी कोई घटना की जानकारी नहीं है।
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बस की एक्सेल (सापड) टूटा नहीं बल्कि उसका नट ढीला हुआ था। ऐसा तो अक्सर हो जाता है, जो बाद में सही हो जाता है। इसमें वर्कशॉप की लापरवाही नहीं है। बस को क्रेन से जींद वर्कशॉप भेजा है। गांव चांदी के पास बस की डीजल टंकी टूटकर गिरने की भी कोई जानकारी नहीं है।
-सुरेंद्र कुमार, फोरमैन रोहतक डिपो
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रोडवेज के चालक डी-315 रूपेंद्र और परिचालक सी-403 अजित रविवार की दोपहर में जींद से रोहतक डिपो की बस संख्या एचआर46डी-1188 लेकर रोहतक के लिए चले थे। इस दौरान बस में करीब 52 सवारियां बैठी थीं। रास्ते में गांव किनाना में बस से काफी खटखटाने की आवाज होने लगी। इस दौरान एक्सेल (सापड) टूटकर सड़क से टकरा गया। इससे बस बेकाबू हो गई और सवारियां की चीखने लगीं। इस पर चालक ने सूझबूझ का परिचय देते हुए बस को रोक दिया। बाद में सवारियों को दूसरी बस से गंतव्य तक भेजा गया। चालक ने बताया कि सापड़ टूटने के बाद बस असंतुलित हो गई। पीछे से टूटी सापड के दोबारा ऊपर उठने से गंभीर हादसा हो सकता था।
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उधर, 52 सवारियों से भरी बस लाखनमाजरा-रोहतक रोड पर तेज रफ्तार से गंतव्य की ओर जा रही थी। जब वह चांदी गांव के पास पहुंची तभी सड़क पर बने गड्ढों की वजह से बस की डीजल से भरी टंकी एक तरफ से टूटकर गिर गई और कुछ दूरी तक घिटसती रही। जानकारी मिलते ही चालक ने इमरजेंसी ब्रेक लगाकर बस रोक दी। कंडक्टर ने बताया कि बस में 52 सवारियां मौजूद रहीं। टंकी में करीब ढाई सौ लीटर डीजल भरा था। अगर टंकी फटती तो आग लगने से गंभीर हादसा हो सकता था। रोहतक डिपो के डीआई (ड्यूटी इंस्पेक्टर) सुरेश ने बताया कि उन्हें ऐसी कोई घटना की जानकारी नहीं है।
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बस की एक्सेल (सापड) टूटा नहीं बल्कि उसका नट ढीला हुआ था। ऐसा तो अक्सर हो जाता है, जो बाद में सही हो जाता है। इसमें वर्कशॉप की लापरवाही नहीं है। बस को क्रेन से जींद वर्कशॉप भेजा है। गांव चांदी के पास बस की डीजल टंकी टूटकर गिरने की भी कोई जानकारी नहीं है।
-सुरेंद्र कुमार, फोरमैन रोहतक डिपो