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Rohtak News: 75 हजार हेक्टेयर में धान की फसल लगाने का लक्ष्य
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01... सांपला ।
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सांपला। जिले में मानसून ने दस्तक दे दी है। मौसम बदलते ही किसानों ने धान रोपाई की तैयारी शुरू कर दी है। 20 जुलाई तक 80 प्रतिशत धान की रोपाई पूरी होने का अनुमान है।
खरीफ की फसलों में धान किसानों की नकदी फसल है। यह करीब 120 दिन में पककर तैयार हो जाती है। जिले के किसानों की इस फसल के प्रति काफी रुचि बढ़ी है। कृषि विभाग ने इस बार जिले में करीब 75 हजार हेक्टेयर में धान की फसल लगाने का लक्ष्य रखा है। कृषि विभाग की ओर से किसानों को सीधी बिजाई के लिए भी प्रेरित किया जा रहा है। कृषि विभाग का 15 हजार हेक्टेयर में सीधे बिजाई कराने का प्रयास है। उनका कहना कि सीधी बिजाई करने से किसानों का काफी खर्च बचेगा।
मौसम विभाग के मुताबिक अगले चार-पांच दिनों तक लगातार बारिश की संभावना जताई है। इससे किसान खुश हैं। कुछ किसानों ने तो धान की रोपाई का काम शुरू कर दिया है। जुलाई के पहले सप्ताह में धान रोपाई का काम तेजी से शुरू होगा। इलाके में ज्यादातर किसानों की ओर से वनस्पति धान की रोपाई की जाती है।
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धान की रोपाई का काम ज्यादातर प्रवासी मजदूरों द्वारा किया जाता है। जिले के जिन गांवों में धान की रोपाई की जानी है उनमें बिहार व दूसरे राज्यों से मजदूर आने शुरू हो गए हैं। अब तक करीब 2000 प्रवासी मजदूर पहुंच गए हैं। किसानों को प्रेरित किया जा रहा है कि वह सीधी बजाई करें। इससे उनका खर्च कम होगा। बिजाई से पहले भूमि की अच्छी तरह जुताई कर लें।
सुरेंद्र कुमार, कृषि उपनिदेशक।
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खरीफ की फसलों में धान किसानों की नकदी फसल है। यह करीब 120 दिन में पककर तैयार हो जाती है। जिले के किसानों की इस फसल के प्रति काफी रुचि बढ़ी है। कृषि विभाग ने इस बार जिले में करीब 75 हजार हेक्टेयर में धान की फसल लगाने का लक्ष्य रखा है। कृषि विभाग की ओर से किसानों को सीधी बिजाई के लिए भी प्रेरित किया जा रहा है। कृषि विभाग का 15 हजार हेक्टेयर में सीधे बिजाई कराने का प्रयास है। उनका कहना कि सीधी बिजाई करने से किसानों का काफी खर्च बचेगा।
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मौसम विभाग के मुताबिक अगले चार-पांच दिनों तक लगातार बारिश की संभावना जताई है। इससे किसान खुश हैं। कुछ किसानों ने तो धान की रोपाई का काम शुरू कर दिया है। जुलाई के पहले सप्ताह में धान रोपाई का काम तेजी से शुरू होगा। इलाके में ज्यादातर किसानों की ओर से वनस्पति धान की रोपाई की जाती है।
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धान की रोपाई का काम ज्यादातर प्रवासी मजदूरों द्वारा किया जाता है। जिले के जिन गांवों में धान की रोपाई की जानी है उनमें बिहार व दूसरे राज्यों से मजदूर आने शुरू हो गए हैं। अब तक करीब 2000 प्रवासी मजदूर पहुंच गए हैं। किसानों को प्रेरित किया जा रहा है कि वह सीधी बजाई करें। इससे उनका खर्च कम होगा। बिजाई से पहले भूमि की अच्छी तरह जुताई कर लें।
सुरेंद्र कुमार, कृषि उपनिदेशक।