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Rohtak News: सूरत सिंह को 1971 में जहाज से राशन-पानी पहुंचाने की मिली थी जिम्मेदारी
Sun, 11 May 2025 02:26 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, रोहतक
संवाद न्यूज एजेंसी, रोहतक
Updated Sun, 11 May 2025 02:26 AM IST
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10सीटीके03 सूरत सिंह आजाद। संवाद
रोहित राठौर
रोहतक। भारत की ओर दुश्मन देश पर पलटवार करने पर हर भारतीय में जोश है। पाकिस्तान के साथ पूर्व लड़ाइयों में पूर्व सैनिकों के जज्बे, जीत व शौर्य को याद किया जा रहा है। ऐसे ही पूर्व सैनिक सूरत सिंह, जिन्होंने 1971 की लड़ाई में जहाज से सैनिकों तक राशन-पानी पहुंचाने की जिम्मेदारी मिली थी। उस समय वे विशाखापट्टनम में तैनात थे।
वर्ष 2015 से रोहतक शहर में रह रहे गरनावठी के मूल निवासी सूरत सिंह आजाद को दसवीं तक सूरत सिंह के नाम से जाना जाता था, लेकिन भारत के प्रति सेवा और राष्ट्र के प्रति समर्पण होने से बोर्ड परीक्षाओं के आवेदन में नाम सूरत सिंह आजाद लिखवा दिया, जो नौसेना में 15 साल तक चर्चित रहा है। सूरत सिंह ने बताया कि ट्रेनिंग के बाद एक साल लकड़ी के जहाज पर तैनाती रही, जो दुश्मनी हमलों में समुद्र के अंदर माइन जांच के लिए आगे रखा जाता है। इसके बाद ही नाविक अधिकारी (इंजीनियरिंग रैंक) से बड़े जहाज पर तैनाती मिली।
बताया कि 1971 की लड़ाई से पहले रूस से नया जहाज लाने के लिए तैयारी थी। लड़ाई शुरू होने की सूचना मिलते ही वह रद्द कर दिया गया और सप्लाई शिप (आवश्यक सामग्री जहाज) में हम सैनिकों को भेज दिया। लड़ाई के दौरान शिप में पानी, डीजल व राशन सप्लाई के लिए तैनात कर दिया गया। उन्होंने कहा कि गर्व है कि पहली बार लड़ाई में नौसेना के साथ हमारी भागीदारी रही। भारतीय सेना ने 14 दिन के अंदर ही पाकिस्तान को दो टुकड़ों में बांट दिया था।
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सूरत सिंह के तीन बेटे व एक बेटी
सूरत सिंह आजाद ने बताया कि 1966 में परिवार ने कम उम्र में शादी कर दी थी। इसके बाद 18 वर्ष का हुआ तो सेना में शामिल हो गया। देश सेवा के लिए नौसेना में जाने के बाद पत्नी को साथ नहीं रख पाया। 1971 की लड़ाई के बाद ही पत्नी व परिवार को साथ रखा। गांव से वर्ष 1971 में वह दूसरा नौसेना जवान था। सूरत सिंह के तीन बेटे व एक बेटी हैं। ये अलग-अलग विभागों में नौकरी कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि वह अपने देश के लिए अब भी जंग में उतरने के लिए तैयार हैं। संवाद
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रोहतक। भारत की ओर दुश्मन देश पर पलटवार करने पर हर भारतीय में जोश है। पाकिस्तान के साथ पूर्व लड़ाइयों में पूर्व सैनिकों के जज्बे, जीत व शौर्य को याद किया जा रहा है। ऐसे ही पूर्व सैनिक सूरत सिंह, जिन्होंने 1971 की लड़ाई में जहाज से सैनिकों तक राशन-पानी पहुंचाने की जिम्मेदारी मिली थी। उस समय वे विशाखापट्टनम में तैनात थे।
वर्ष 2015 से रोहतक शहर में रह रहे गरनावठी के मूल निवासी सूरत सिंह आजाद को दसवीं तक सूरत सिंह के नाम से जाना जाता था, लेकिन भारत के प्रति सेवा और राष्ट्र के प्रति समर्पण होने से बोर्ड परीक्षाओं के आवेदन में नाम सूरत सिंह आजाद लिखवा दिया, जो नौसेना में 15 साल तक चर्चित रहा है। सूरत सिंह ने बताया कि ट्रेनिंग के बाद एक साल लकड़ी के जहाज पर तैनाती रही, जो दुश्मनी हमलों में समुद्र के अंदर माइन जांच के लिए आगे रखा जाता है। इसके बाद ही नाविक अधिकारी (इंजीनियरिंग रैंक) से बड़े जहाज पर तैनाती मिली।
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बताया कि 1971 की लड़ाई से पहले रूस से नया जहाज लाने के लिए तैयारी थी। लड़ाई शुरू होने की सूचना मिलते ही वह रद्द कर दिया गया और सप्लाई शिप (आवश्यक सामग्री जहाज) में हम सैनिकों को भेज दिया। लड़ाई के दौरान शिप में पानी, डीजल व राशन सप्लाई के लिए तैनात कर दिया गया। उन्होंने कहा कि गर्व है कि पहली बार लड़ाई में नौसेना के साथ हमारी भागीदारी रही। भारतीय सेना ने 14 दिन के अंदर ही पाकिस्तान को दो टुकड़ों में बांट दिया था।
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सूरत सिंह के तीन बेटे व एक बेटी
सूरत सिंह आजाद ने बताया कि 1966 में परिवार ने कम उम्र में शादी कर दी थी। इसके बाद 18 वर्ष का हुआ तो सेना में शामिल हो गया। देश सेवा के लिए नौसेना में जाने के बाद पत्नी को साथ नहीं रख पाया। 1971 की लड़ाई के बाद ही पत्नी व परिवार को साथ रखा। गांव से वर्ष 1971 में वह दूसरा नौसेना जवान था। सूरत सिंह के तीन बेटे व एक बेटी हैं। ये अलग-अलग विभागों में नौकरी कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि वह अपने देश के लिए अब भी जंग में उतरने के लिए तैयार हैं। संवाद