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Rohtak News: एसआई का बेटा बना डॉक्टर, बेटे के गले में तीन पदक देख भावुक हुई मां
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12सीटीके43..पीजीआई दीक्षांत समारोह में मेडल मिलने के बाद दिखाता मोहित। संवाद
रोहतक। मंच पर राज्यपाल बंडारू दत्तात्रेय के हाथों तीन-तीन स्वर्ण पदक पाना कभी न भुलाए जाने वाला पल रहा। यही दिन हमेशा याद रहेगा। अब एमडी की पढ़ाई पूरी कर चिकित्सा क्षेत्र में ही बेहतर करने की दिशा में प्रयास करना है। गले में पदक देखकर मां अनिल देवी खुशी से फफक पड़ी। एसआई पिता कुलदीप सिंह ने कुछ कहने के बजाय गले से लगा लिया। यह सबसे शानदार पल रहा। यह कहना है डॉ. मोहित रांगी का।
यह हाल अकेले मोहित का नहीं था, बल्कि इस सरीखे और भी युवा थे। इनमें से किसी की मां ने दुलार किया तो किसी के पिता ने आशीर्वाद दिया। स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय के सुश्रुत ऑडिटोरियम में मंगलवार को यही नजारा रहा। राज्यपाल बंडारू दत्तात्रेय के हाथों अपने लाडले व लाडली को पदक पाते देख अभिभावकों की आंखें नम हो गई। अमर उजाला से हुई बातचीत में इन्होंने अपनी खुशी साझा की।
सोनीपत के हुल्लाहेड़ी निवासी डॉ. मोहित रांगी अपने परिवार में पहले चिकित्सक बने हैं। दो बहनों का यह छोटा भाई अभी एम्स जोधपुर से एमडी की पढ़ाई कर रहा है। इसे मंगलवार को राज्यपाल ने एक नहीं तीन स्वर्ण पदक पहनाकर सम्मानित किया। पहला पदक पीजीआईएमएस में सबसे बेहतर एमबीबीएस विद्यार्थी के लिए मिला। दूसरा डॉ. इंद्रजीत दीवान स्वर्ण पदक एनॉटमी व तीसरा डॉ. बसंत लाल स्वर्ण पदक फोरेंसिक साइंस में सबसे अधिक अंक हासिल करने के लिए मिला। स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय में बेहतर अंक प्राप्त करने के लिए मिले इस सम्मान से पूरे परिवार में खुशी की लहर दौड़ गई।
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डॉ. माहित रांगी ने बताया कि बचपन से ही मेडिकल साइंस में रूचि रही है। बायोलॉजी व फिजिक्स पढ़ना पसंद है। इसलिए नीट की परीक्षा में अच्छे अंक लेकर एमबीबीएस में प्रवेश लिया। एमबीबीएस की पढ़ाई मन से की। इसीलिए पीजीआईएमएस का ओवर ऑल स्वर्ण पदक मिला। इसके अलावा एनॉटमी व फोरेंसिक साइंस विषय में भी गोल्ड मेडल मिला है।
नर्स की बेटी बनीं डॉक्टर
राज्यपाल के हाथों मेडल मिला है। यह गर्व करने वाला पल रहा। नीट परीक्षा देकर एमबीबीएस में प्रवेश पाया। पांचवीं कक्षा से ही डॉक्टर बनने का सपना था। मां नर्स हैं। उनका पूरा सहयोग मिला। दिल्ली की रहने वाली हूं। नवंबर 2023 में स्नातक की पढ़ाई पूरी की। कॉलेज में दूसरा रैंक प्राप्त किया। क्लीनिकल में भविष्य बनाना है। पिता अशोक कुमार स्कूल प्रबंधक हैं। मां दिल्ली के सरकारी अस्पताल में नर्स हैं।
- डाॅ. चेतना यादव, सिल्वर मेडिलिस्ट।
बेटी को पदक पहने देख भावुक हुई मां
राज्यपाल के हाथों रजत पदक प्राप्त कर गौरवान्वित महसूस कर रही हूं। मां मीना गोयल ने मेडल प्राप्त करते देखा तो उनकी आंखाें से खुशी के मारे आंसू छलक पड़े। यह देखकर खुद भी भावुक हो गई। बड़ी मुश्किल से खुद को रोका।
-- डॉ. प्रिया गोयल, सिल्वर मेडिलिस्ट।
दीक्षांत समारोह में माता-पिता दोनों पहुंचे। राज्यपाल के हाथों मुझे पदक प्राप्त हुआ। यह कभी न भूलने वाला पल रहा। मेरी सफलता पर अभिभावक खुशी से सराबोर हैं। उनके मांर्गदर्शन व आशीर्वाद से ही यह सफलता हासिल कर पाई हूं।
- डॉ. पारस सचदेवा, गोल्ड मेडिलिस्ट।
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यह हाल अकेले मोहित का नहीं था, बल्कि इस सरीखे और भी युवा थे। इनमें से किसी की मां ने दुलार किया तो किसी के पिता ने आशीर्वाद दिया। स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय के सुश्रुत ऑडिटोरियम में मंगलवार को यही नजारा रहा। राज्यपाल बंडारू दत्तात्रेय के हाथों अपने लाडले व लाडली को पदक पाते देख अभिभावकों की आंखें नम हो गई। अमर उजाला से हुई बातचीत में इन्होंने अपनी खुशी साझा की।
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सोनीपत के हुल्लाहेड़ी निवासी डॉ. मोहित रांगी अपने परिवार में पहले चिकित्सक बने हैं। दो बहनों का यह छोटा भाई अभी एम्स जोधपुर से एमडी की पढ़ाई कर रहा है। इसे मंगलवार को राज्यपाल ने एक नहीं तीन स्वर्ण पदक पहनाकर सम्मानित किया। पहला पदक पीजीआईएमएस में सबसे बेहतर एमबीबीएस विद्यार्थी के लिए मिला। दूसरा डॉ. इंद्रजीत दीवान स्वर्ण पदक एनॉटमी व तीसरा डॉ. बसंत लाल स्वर्ण पदक फोरेंसिक साइंस में सबसे अधिक अंक हासिल करने के लिए मिला। स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय में बेहतर अंक प्राप्त करने के लिए मिले इस सम्मान से पूरे परिवार में खुशी की लहर दौड़ गई।
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डॉ. माहित रांगी ने बताया कि बचपन से ही मेडिकल साइंस में रूचि रही है। बायोलॉजी व फिजिक्स पढ़ना पसंद है। इसलिए नीट की परीक्षा में अच्छे अंक लेकर एमबीबीएस में प्रवेश लिया। एमबीबीएस की पढ़ाई मन से की। इसीलिए पीजीआईएमएस का ओवर ऑल स्वर्ण पदक मिला। इसके अलावा एनॉटमी व फोरेंसिक साइंस विषय में भी गोल्ड मेडल मिला है।
नर्स की बेटी बनीं डॉक्टर
राज्यपाल के हाथों मेडल मिला है। यह गर्व करने वाला पल रहा। नीट परीक्षा देकर एमबीबीएस में प्रवेश पाया। पांचवीं कक्षा से ही डॉक्टर बनने का सपना था। मां नर्स हैं। उनका पूरा सहयोग मिला। दिल्ली की रहने वाली हूं। नवंबर 2023 में स्नातक की पढ़ाई पूरी की। कॉलेज में दूसरा रैंक प्राप्त किया। क्लीनिकल में भविष्य बनाना है। पिता अशोक कुमार स्कूल प्रबंधक हैं। मां दिल्ली के सरकारी अस्पताल में नर्स हैं।
- डाॅ. चेतना यादव, सिल्वर मेडिलिस्ट।
बेटी को पदक पहने देख भावुक हुई मां
राज्यपाल के हाथों रजत पदक प्राप्त कर गौरवान्वित महसूस कर रही हूं। मां मीना गोयल ने मेडल प्राप्त करते देखा तो उनकी आंखाें से खुशी के मारे आंसू छलक पड़े। यह देखकर खुद भी भावुक हो गई। बड़ी मुश्किल से खुद को रोका।
दीक्षांत समारोह में माता-पिता दोनों पहुंचे। राज्यपाल के हाथों मुझे पदक प्राप्त हुआ। यह कभी न भूलने वाला पल रहा। मेरी सफलता पर अभिभावक खुशी से सराबोर हैं। उनके मांर्गदर्शन व आशीर्वाद से ही यह सफलता हासिल कर पाई हूं।
- डॉ. पारस सचदेवा, गोल्ड मेडिलिस्ट।

12सीटीके43..पीजीआई दीक्षांत समारोह में मेडल मिलने के बाद दिखाता मोहित। संवाद

12सीटीके43..पीजीआई दीक्षांत समारोह में मेडल मिलने के बाद दिखाता मोहित। संवाद