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Rohtak News: चाचा का सम्मान देख अंतिम बनी पहलवान, आज विश्व में धाक
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29सीटीके61...खिलाड़ी अंतिम कुण्डू के साथ भारतीय कुश्ती टीम के कोच प्रदीप खारीया।
रोहतक। फूलों व नोटों के हार से ढके चाचा अजय के स्वागत में ढोल पर नाचते गाते लोग और उनका सम्म्मान, अंतिम कुंडू को कुछ यूं भाया कि खुद ने भी पहलवान बनने का फैसला कर लिया। दंगल में उतरी परिवार की पहली पहलवान बेटी अपने दादा राज सिंह पहलवान का नाम आगे बढ़ाने निकल पड़ी है। चाचा अजय पहलवान से कुश्ती के दावपेंच सीख कर राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी अलग पहचान बना चुकी अंतिम ने शनिवार को जॉर्डन में स्वर्ण पदक जीत कर पूरे परिवार व प्रदेश का नाम रोशन कर दिया। अमर उजाला ने अंतिम के चाचा अजय से बातचीत की तो उसकी उपलब्धियां सामने आई।
दरअसल, अंतिम के दादा राज सिंह पहलवान थे। उनकी इलाके में अपनी धाक थी। उनके बाद उनके बेटे अजय ने पहलवानी की परंपरा को आगे बढ़ाया, मगर किन्ही कारणों से आगे नहीं बढ़ पाए। जब अंतिम ने अपना पहलवान बनने का फैसला सुनाया तो चाचा ने उसे प्रोत्साहन के साथ कुश्ती के दावपेंच सिखाते हुए दंगल में उतारा। उसका सपना था कि चाचा की तरह उसका भी ढोल नगाड़ों से लोग स्वागत करें। पिछले चार साल से यह बेटी कुश्ती में भविष्य संवार रही है। पीयू चंडीगढ़ से बीए द्वितीय वर्ष की पढ़ाई कर रही यह बेटी अब तक राष्ट्रीय स्तर पर 11, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर 4 पदक जीत चुकी है। राष्ट्रीय स्तर पर पांच स्वर्ण, तीन रजत व तीन कांस्य पदक हैं। इस बेटी की खेल उपलब्धियां कम नहीं हैं। खेलो इंडिया यूनिवर्सिटी स्तर पर वर्ष 2023 व 24 में द्वितीय रही है। राजस्थान के कोटा में नवंबर 2023 में हुए दंगल में महिला हिंद केसरी का खिताब अपने नाम कर चुकी है। अब सीनियर वर्ग में खेल रही है। इस बेटी का अगला कदम ओलंपिक में पदक जीतना है। इसके लिए जी तोड़ मेहनत जारी है।
कौन है अंतिम कुंडू
टिटौली निवासी साढ़े 18 वर्षीय अंतिम कुंडू चार भाई-बहनों में दूसरे नंबर की बेटी है। भाई आर्यन सबसे छोटा है। दो बहनों की शादी हो चुकी है। पिता विजयपाल का तीन साल पूर्व देहांत हो चुका है। मां सीमा घर संभालती हैं। पिछले चार साल से कुश्ती खेल रही है। छोटा भाई भी बहन व चाचा की तरह अखाड़े में उतर चुका है। वह फिलहाल कुश्ती के शुरुआती दावपेंच सीख रहा है।
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जॉर्डन से सोना ला रही बेटी का होगा जोरदार स्वागत
जॉर्डन में आयोजित एशियन चैंपियनशिप में दमदार प्रदर्शन कर टिटोली की बेटी अंतिम कुंडू ने शनिवार को स्वर्ण पदक अपने नाम किया। पदक जीत कर दो दिन बाद घर लौटने वाली इस बेटी का जोरदार स्वागत किया जाएगा। टिटोली निवासी अजय आर्य ने बताया कि भतीजी अंतिम कुंडू ने उनसे सीखे कुश्ती के दावपेंच के दम तक यह पदक हासिल कर सबका मान बढ़ाया है। भारतीय कुश्ती टीम के कोच प्रदीप खारिया को श्रेय देते हुए कहा कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उनका अंतिम का मार्गदर्शन करना अहम रहा। हरियाणा कांग्रेस कमेटी के प्रदेश प्रवक्ता स्वामी आदित्यवेश ने भी इस बेटी की उपलब्धि पर प्रसन्नता जाहिर की है।
ये हैं अंतिम की अब तक की उपलब्धियां
29 मई 2022: रांची में स्वर्ण पदक।
28 जून 2022: पंचकुला में स्वर्ण पदक।
22 सितंबर 2022: जसोला में कांस्य पदक।
अक्टूबर 2022: दिल्ली में रजत पदक।
15 नवंबर 2022: हरिद्वार में कांस्य पदक।
26 अगस्त 2022: एमडीयूू में स्वर्ण पदक।
6 दिसंबर 2022: बहादुरगढ़ में स्वर्ण पदक।
29 दिसंबर 2022: बोहर में स्वर्ण पदक।
23 जनवरी 2023: गोंडा में स्वर्ण पदक।
2023: खेलो इंडिया भोपाल में रजत पदक।
12 से 20 जुलाई 2023: एशियन कुश्ती चैंपियनशिप जॉर्डन में रजत पदक।
14 से 20 अगस्त 2023 : विश्व कुश्ती चैंपियनशिप जॉर्डन में रजत पदक।
नवंबर 2023: राजस्थान के कोटा में महिला हिंद केसरी का खिताब जीता।
13 अप्रैल 2024: किर्गिस्तान में सीनियर एशिया में कांस्य पदक जीता।
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दरअसल, अंतिम के दादा राज सिंह पहलवान थे। उनकी इलाके में अपनी धाक थी। उनके बाद उनके बेटे अजय ने पहलवानी की परंपरा को आगे बढ़ाया, मगर किन्ही कारणों से आगे नहीं बढ़ पाए। जब अंतिम ने अपना पहलवान बनने का फैसला सुनाया तो चाचा ने उसे प्रोत्साहन के साथ कुश्ती के दावपेंच सिखाते हुए दंगल में उतारा। उसका सपना था कि चाचा की तरह उसका भी ढोल नगाड़ों से लोग स्वागत करें। पिछले चार साल से यह बेटी कुश्ती में भविष्य संवार रही है। पीयू चंडीगढ़ से बीए द्वितीय वर्ष की पढ़ाई कर रही यह बेटी अब तक राष्ट्रीय स्तर पर 11, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर 4 पदक जीत चुकी है। राष्ट्रीय स्तर पर पांच स्वर्ण, तीन रजत व तीन कांस्य पदक हैं। इस बेटी की खेल उपलब्धियां कम नहीं हैं। खेलो इंडिया यूनिवर्सिटी स्तर पर वर्ष 2023 व 24 में द्वितीय रही है। राजस्थान के कोटा में नवंबर 2023 में हुए दंगल में महिला हिंद केसरी का खिताब अपने नाम कर चुकी है। अब सीनियर वर्ग में खेल रही है। इस बेटी का अगला कदम ओलंपिक में पदक जीतना है। इसके लिए जी तोड़ मेहनत जारी है।
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कौन है अंतिम कुंडू
टिटौली निवासी साढ़े 18 वर्षीय अंतिम कुंडू चार भाई-बहनों में दूसरे नंबर की बेटी है। भाई आर्यन सबसे छोटा है। दो बहनों की शादी हो चुकी है। पिता विजयपाल का तीन साल पूर्व देहांत हो चुका है। मां सीमा घर संभालती हैं। पिछले चार साल से कुश्ती खेल रही है। छोटा भाई भी बहन व चाचा की तरह अखाड़े में उतर चुका है। वह फिलहाल कुश्ती के शुरुआती दावपेंच सीख रहा है।
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जॉर्डन से सोना ला रही बेटी का होगा जोरदार स्वागत
जॉर्डन में आयोजित एशियन चैंपियनशिप में दमदार प्रदर्शन कर टिटोली की बेटी अंतिम कुंडू ने शनिवार को स्वर्ण पदक अपने नाम किया। पदक जीत कर दो दिन बाद घर लौटने वाली इस बेटी का जोरदार स्वागत किया जाएगा। टिटोली निवासी अजय आर्य ने बताया कि भतीजी अंतिम कुंडू ने उनसे सीखे कुश्ती के दावपेंच के दम तक यह पदक हासिल कर सबका मान बढ़ाया है। भारतीय कुश्ती टीम के कोच प्रदीप खारिया को श्रेय देते हुए कहा कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उनका अंतिम का मार्गदर्शन करना अहम रहा। हरियाणा कांग्रेस कमेटी के प्रदेश प्रवक्ता स्वामी आदित्यवेश ने भी इस बेटी की उपलब्धि पर प्रसन्नता जाहिर की है।
ये हैं अंतिम की अब तक की उपलब्धियां
29 मई 2022: रांची में स्वर्ण पदक।
28 जून 2022: पंचकुला में स्वर्ण पदक।
22 सितंबर 2022: जसोला में कांस्य पदक।
अक्टूबर 2022: दिल्ली में रजत पदक।
15 नवंबर 2022: हरिद्वार में कांस्य पदक।
26 अगस्त 2022: एमडीयूू में स्वर्ण पदक।
6 दिसंबर 2022: बहादुरगढ़ में स्वर्ण पदक।
29 दिसंबर 2022: बोहर में स्वर्ण पदक।
23 जनवरी 2023: गोंडा में स्वर्ण पदक।
2023: खेलो इंडिया भोपाल में रजत पदक।
12 से 20 जुलाई 2023: एशियन कुश्ती चैंपियनशिप जॉर्डन में रजत पदक।
14 से 20 अगस्त 2023 : विश्व कुश्ती चैंपियनशिप जॉर्डन में रजत पदक।
नवंबर 2023: राजस्थान के कोटा में महिला हिंद केसरी का खिताब जीता।
13 अप्रैल 2024: किर्गिस्तान में सीनियर एशिया में कांस्य पदक जीता।