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Rohtak News: साक्षी की मां बोलीं- बेटी ने कुश्ती को जिया, सरकार ने वादा पूरा नहीं किया
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साक्षी मलिक की मां सुदेश मलिक। स्रोत :सोशल मीडिया
रोहतक। रियो ओलंपिक वर्ष 2016 में कांस्य पदक जीत कर देश का नाम रोशन करने वाली पहलवान साक्षी ने कुश्ती को सदा के लिए अलविदा कह दिया है। वीरवार को कुश्ती फेडरेशन के चुनाव परिणाम के बाद पहलवान बेटी ने मीडिया के समक्ष भावुक होते हुए यह घोषणा की। साक्षी की मां सुदेश मलिक ने बेटी के फैसले की वजह फेडरेशन की कमान अब भी पहले की तरह व्यक्ति विशेष के पास होना बताया है।
सेक्टर चार में रहने वाली सुदेश मलिक ने कहा कि बेटी साक्षी ने कुश्ती को जिया है। कुश्ती के लिए काफी मेहनत ही नहीं, त्याग भी किया है। देश को महिला कुश्ती में पहला पदक दिला कर इतिहास रचा है। कुश्ती से उसका गहरा रिश्ता रहा है। बचपन से उसने कुश्ती ही खेला है। इसके बावजूद उसे इस खेल से संन्यास लेना पड़ा, यह कहीं न कहीं सोचने को मजबूर करता है। कुश्ती फेडरेशन की कमान एक बार फिर उन्हीं लोगों में पास जो अब तक इस पर हावी रहे हैं। पहलवान बेटियों का उत्पीड़न करने वालों के खिलाफ कार्रवाई नहीं होना आहत करने वाला है। इस अन्याय के खिलाफ बेटी लड़ती रही है। इसीलिए चुनाव में महिला उम्मीदवार को विजयी बनाने के लिए पूरा संघर्ष किया। सरकार ने भी अपना किया वादा पूरा नहीं किया। ऐसे में उसने कुश्ती खेलने से संन्यास लिया है।
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सेक्टर चार में रहने वाली सुदेश मलिक ने कहा कि बेटी साक्षी ने कुश्ती को जिया है। कुश्ती के लिए काफी मेहनत ही नहीं, त्याग भी किया है। देश को महिला कुश्ती में पहला पदक दिला कर इतिहास रचा है। कुश्ती से उसका गहरा रिश्ता रहा है। बचपन से उसने कुश्ती ही खेला है। इसके बावजूद उसे इस खेल से संन्यास लेना पड़ा, यह कहीं न कहीं सोचने को मजबूर करता है। कुश्ती फेडरेशन की कमान एक बार फिर उन्हीं लोगों में पास जो अब तक इस पर हावी रहे हैं। पहलवान बेटियों का उत्पीड़न करने वालों के खिलाफ कार्रवाई नहीं होना आहत करने वाला है। इस अन्याय के खिलाफ बेटी लड़ती रही है। इसीलिए चुनाव में महिला उम्मीदवार को विजयी बनाने के लिए पूरा संघर्ष किया। सरकार ने भी अपना किया वादा पूरा नहीं किया। ऐसे में उसने कुश्ती खेलने से संन्यास लिया है।
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