{"_id":"6685803be9021cd3f1055c17","slug":"roots-of-addiction-spreading-deep-in-chhotu-ram-stadium-rohtak-news-c-17-roh1020-456233-2024-07-03","type":"story","status":"publish","title_hn":"Rohtak News: छोटूराम स्टेडियम में गहराई तक फैल रही नशे की जड़ें","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Rohtak News: छोटूराम स्टेडियम में गहराई तक फैल रही नशे की जड़ें
विज्ञापन
रोहतक। शहर के एक अखाड़े की अंतरराष्ट्रीय महिला पहलवान का डोप जांच में नाम आने के बाद खेल में नशे का जहर घुलने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता है। खेल परिसरों के हालात जानने के लिए बुधवार को अमर उजाला ने छोटूराम स्टेडियम का जायजा लिया तो यहां कदम-कदम पर नशे में प्रयोग हुई सामग्री के अवशेष बिखरे नजर आए। हालात ये थे कि शौचालय सीरिंज, इंजेक्शन, नशीली दवाइयाें के खाली पैकेट, शराब की बोतल व अन्य चीजों से अटा हुआ था। कमोबेश यही हाल मैदान का रहा। कहीं झाड़ियों में तो कहीं किसी कोने में नशे में प्रयोग किया गया सामान भारी मात्रा में मिला।
शहर के बीचों बीच स्थित छोटूराम स्टेडियम में रोजाना करीब पांच हजार खिलाड़ी प्रशिक्षण या अभ्यास के लिए आते हैं। सुबह व शाम के समय इन खिलाड़ियों के जोश और जुनून के चलते नजारा अलग ही हाेता है। इससे इतर एक भयावह तस्वीर और भी है। यह तस्वीर है युवाओं को निगलते नशे की। स्टेडियम में पहुंची टीम ने खेल अधिकारी कार्यालय के सामने बने शौचालय पर नजर डाली तो यह बंद मिला। यहां जाकर देखा तो तीव्र दुर्गंध के कारण नाक पर कपड़ा रखना पड़ा। शौचालय में इंजेक्शन, सीरिंज, सिगरेट, नशीली दवाओं के पैकेट, शराब की खाली बोतलों की भरमार नजर आई। यहां से आगे बढ़े तो मैदान में भी थोड़ी-थोड़ी दूर पर सीरिंज व इंजेक्शन नजर आए। ट्रैक के पास ही झाड़ियों में नशीली दवाइयों के पैकेट व सीरिंज बिखरी पड़ी मिली।
छोटू राम स्टेडियम के खिलाड़ियों ने अपने प्रदर्शन से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी व देश की अलग पहचान बनाई है। यहां से हर वर्ष अनेक खिलाड़ी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहुंच रहे हैं तो अनेक सरकारी नौकरियों में जगह पाने में सफल हो रहे हैं। यहां पर्याप्त खेल सुविधाओं के अभाव के बावजूद खिलाड़ी जी जान से खेल रहे हैं। ऐसे में यहां बिखरा नशा भावी खिलाड़ियों के कदम डगमगा सकता है।
विज्ञापन
यूं लगती है नशे की आदत
युवा पीढ़ी नशे के जाल में लगातार फंसती जा रही है। हुक्के व सिगरेट से नशे की शुरुआत होती है। इसके बाद ये आदत जल्दी ही तलब में बदल जाती है। नशे की ये तलब युवा पीढ़ी को नशे की ओर खींचती ले जाती है। खेल जगत में यह शुरुआत बेहतर प्रदर्शन के लिए ली जाने वाली स्टेरॉयड या नशीली दवा की डोज से होती है। बाद में शरीर इसका आदी बन जाता है। वह डोज बढ़ाता जाता है और नशे की गर्त में धंसता चला जाता है।
वर्जन :
स्टेडियम शहर के बीचों बीच है। इसके चलते यहां आसपास की निजी अकादमियों में तैयारी करने वाले खिलाड़ी अभ्यास करने आ जाते हैं। बाहर की अकादमियों व असामाजिक तत्व स्टेडियम में देर सवेर नशा करते हैं। ऐसे लोगों को कई बार पकड़ा भी गया है। इसके बावजूद ये बाज नहीं आ रहे हैं।
-मनोज कुमार, जिला खेल अधिकारी।
विज्ञापन
शहर के बीचों बीच स्थित छोटूराम स्टेडियम में रोजाना करीब पांच हजार खिलाड़ी प्रशिक्षण या अभ्यास के लिए आते हैं। सुबह व शाम के समय इन खिलाड़ियों के जोश और जुनून के चलते नजारा अलग ही हाेता है। इससे इतर एक भयावह तस्वीर और भी है। यह तस्वीर है युवाओं को निगलते नशे की। स्टेडियम में पहुंची टीम ने खेल अधिकारी कार्यालय के सामने बने शौचालय पर नजर डाली तो यह बंद मिला। यहां जाकर देखा तो तीव्र दुर्गंध के कारण नाक पर कपड़ा रखना पड़ा। शौचालय में इंजेक्शन, सीरिंज, सिगरेट, नशीली दवाओं के पैकेट, शराब की खाली बोतलों की भरमार नजर आई। यहां से आगे बढ़े तो मैदान में भी थोड़ी-थोड़ी दूर पर सीरिंज व इंजेक्शन नजर आए। ट्रैक के पास ही झाड़ियों में नशीली दवाइयों के पैकेट व सीरिंज बिखरी पड़ी मिली।
विज्ञापन
छोटू राम स्टेडियम के खिलाड़ियों ने अपने प्रदर्शन से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी व देश की अलग पहचान बनाई है। यहां से हर वर्ष अनेक खिलाड़ी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहुंच रहे हैं तो अनेक सरकारी नौकरियों में जगह पाने में सफल हो रहे हैं। यहां पर्याप्त खेल सुविधाओं के अभाव के बावजूद खिलाड़ी जी जान से खेल रहे हैं। ऐसे में यहां बिखरा नशा भावी खिलाड़ियों के कदम डगमगा सकता है।
विज्ञापन
यूं लगती है नशे की आदत
युवा पीढ़ी नशे के जाल में लगातार फंसती जा रही है। हुक्के व सिगरेट से नशे की शुरुआत होती है। इसके बाद ये आदत जल्दी ही तलब में बदल जाती है। नशे की ये तलब युवा पीढ़ी को नशे की ओर खींचती ले जाती है। खेल जगत में यह शुरुआत बेहतर प्रदर्शन के लिए ली जाने वाली स्टेरॉयड या नशीली दवा की डोज से होती है। बाद में शरीर इसका आदी बन जाता है। वह डोज बढ़ाता जाता है और नशे की गर्त में धंसता चला जाता है।
वर्जन :
स्टेडियम शहर के बीचों बीच है। इसके चलते यहां आसपास की निजी अकादमियों में तैयारी करने वाले खिलाड़ी अभ्यास करने आ जाते हैं। बाहर की अकादमियों व असामाजिक तत्व स्टेडियम में देर सवेर नशा करते हैं। ऐसे लोगों को कई बार पकड़ा भी गया है। इसके बावजूद ये बाज नहीं आ रहे हैं।
-मनोज कुमार, जिला खेल अधिकारी।