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Rohtak News: रोहतक के हितेश लीजेंड्स लीग में करेंगे अंपायरिंग
Thu, 10 Apr 2025 01:06 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, रोहतक
संवाद न्यूज एजेंसी, रोहतक
Updated Thu, 10 Apr 2025 01:06 AM IST
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09सीटीके38-राजकीय महिला महाविद्यालय बहादुरगढ़ में एमडीयू कुलपति प्रो. राजबीर सिंह को सम्मानित क
- फोटो : reasi news
रोहतक। क्रिकेट जगत को कई नामी सितारे देने वाले रोहतक के नाम एक और उपलब्धि दर्ज होने जा रही है। यह उपलब्धि है आर्य नगर निवासी हितेश वधवा के अंपायर बनने की। वह मई व जून में महाराष्ट्र-गुजरात में होने वाली लीजेंड्स लीग में पहली बार अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अंपायर बनकर फैसला देंगे। संवाद न्यूज एजेंसी से हुई विशेष बातचीत में उन्होंने अपनी सफलता की खुशी साझा की।
ऑटो मोबाइल के काम से जुड़े हितेश ने बताया कि वर्ष 2022 में इंटरनेशनल बिजनेस में एमबीए पास की है। क्रिकेट का शौकीन होने के बावजूद संसाधनों के अभाव में खिलाड़ी नहीं बन पाया। साधारण परिवार से होने के चलते घर परिवार की जिम्मेदारी पर ध्यान रहा। इस कारण क्रिकेट पर ज्यादा ध्यान नहीं दे पाया। अपना शौक पूरा करना ही जीवन का उद्देश्य था। क्रिकेट से जुड़ा रहना चाहता था, इसलिए अंपायरिंग का कोर्स किया। क्रिकेट में, एक अंपायर को हर गेंद पर निर्णय लेना होता है। यह बड़ी जिम्मेदारी का काम है।
जुनून और दृढ़ता सफलता की कुंजी
हितेश ने कहा कि जब आप अपने जुनून को पहचानते हैं और उसे जीने के लिए दृढ़ता से काम करते हैं, तो अपने लक्ष्यों को प्राप्त कर सकते हैं। क्रिकेट के 42 कानून हैं। इसके आधार पर अंपायरिंग का पेपर दिया जाता है। अंपायर बनने के लिए आईसीसी का पेपर दिया।
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इसमें 92 प्रतिशत अंक प्राप्त किए। इसके बाद क्रिकेट साउथ अफ्रीका से ऑनलाइन कोर्स किया। इसमें 20 पेपर पास किए व फाइनल परिणाम में 82 प्रतिशत अंक प्राप्त किए। पिछले साल 2024 में साउथ अफ्रीका में अंपायरिंग के लिए भी चयन हुआ था, लेकिन भाई का देहांत होने के कारण जा नहीं पाया था। उन्होंने कहा कि युवाओं को संदेश देना चाहता हूं कि अपने पैशन हो फॉलो करें। जुनून और दृढ़ता सफलता की कुंजी है।
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ऑटो मोबाइल के काम से जुड़े हितेश ने बताया कि वर्ष 2022 में इंटरनेशनल बिजनेस में एमबीए पास की है। क्रिकेट का शौकीन होने के बावजूद संसाधनों के अभाव में खिलाड़ी नहीं बन पाया। साधारण परिवार से होने के चलते घर परिवार की जिम्मेदारी पर ध्यान रहा। इस कारण क्रिकेट पर ज्यादा ध्यान नहीं दे पाया। अपना शौक पूरा करना ही जीवन का उद्देश्य था। क्रिकेट से जुड़ा रहना चाहता था, इसलिए अंपायरिंग का कोर्स किया। क्रिकेट में, एक अंपायर को हर गेंद पर निर्णय लेना होता है। यह बड़ी जिम्मेदारी का काम है।
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जुनून और दृढ़ता सफलता की कुंजी
हितेश ने कहा कि जब आप अपने जुनून को पहचानते हैं और उसे जीने के लिए दृढ़ता से काम करते हैं, तो अपने लक्ष्यों को प्राप्त कर सकते हैं। क्रिकेट के 42 कानून हैं। इसके आधार पर अंपायरिंग का पेपर दिया जाता है। अंपायर बनने के लिए आईसीसी का पेपर दिया।
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इसमें 92 प्रतिशत अंक प्राप्त किए। इसके बाद क्रिकेट साउथ अफ्रीका से ऑनलाइन कोर्स किया। इसमें 20 पेपर पास किए व फाइनल परिणाम में 82 प्रतिशत अंक प्राप्त किए। पिछले साल 2024 में साउथ अफ्रीका में अंपायरिंग के लिए भी चयन हुआ था, लेकिन भाई का देहांत होने के कारण जा नहीं पाया था। उन्होंने कहा कि युवाओं को संदेश देना चाहता हूं कि अपने पैशन हो फॉलो करें। जुनून और दृढ़ता सफलता की कुंजी है।