{"_id":"574df9834f1c1b26091094ad","slug":"rohtak-khaap-notice-jaat-reservation-protest-district-administration-haryana","type":"story","status":"publish","title_hn":"खापों के मुखिया, संघर्ष समितियों के पदाधिकारियों समेत 55 को नोटिस","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
खापों के मुखिया, संघर्ष समितियों के पदाधिकारियों समेत 55 को नोटिस
ब्यूरो/अमर उजाला, रोहतक
Updated Wed, 01 Jun 2016 02:22 AM IST
विज्ञापन
खापों के मुखिया, संघर्ष समितियों के पदाधिकारियों समेत 55 को नोटिस
- फोटो : Demo pic
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
पांच जून से जाटों के आंदोलन के एलान के बाद प्रशासन ने आंदोलन की अगुवाई करने वालों पर शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। खापों के मुखिया, संघर्ष समितियों के पदाधिकारियों समेत 55 लोगों को नोटिस भेजा गया है। नोटिस में साफ कहा गया है कि आंदोलन के दौरान किसी तरह का नुकसान होता है तो इनकी संपत्ति को जब्त करके नुकसान की पूरी वसूली की जाएगी। नोटिस के माध्यम से इन लोगों को अपनी व्यक्तिगत चल और अचल संपत्ति का ब्योरा देने के भी निर्देश दिए गए हैं।
जिला प्रशासन की ओर से मंगलवार को कई खाप के मुखिया, जाट आरक्षण संघर्ष समिति के पदाधिकारी और युवा संघर्ष समिति के पदाधिकारियों सहित 55 लोगों को नोटिस जारी करके कहा गया है कि सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के अनुसार जन आंदोलनों के दौरान हुई हिंसा के कारण जान-माल व संपत्ति के नुकसान की भरपाई अपराध करने वालों के साथ-साथ आंदोलनों को आयोजित करने वाले लोगों की संपत्ति से भी होती है। नोटिस में स्पष्ट किया गया है कि फरवरी माह में आरक्षण आंदोलन के दौरान इन लोगों ने आयोजक, उत्प्रेरक या प्रणेता की भूमिका निभाई है जो सरकारी रिपोर्टों व सार्वजनिक मंचों से दिए गए भाषणों से साबित होती है। नोटिस में कहा गया है कि फरवरी माह में हुए उपद्रव के दौरान हजारों करोड़ रुपये की निजी व सरकारी संपत्ति को नुकसान हुआ है। कई लोग मारे गए। सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के अनुसार हुए नुकसान की भरपाई इन लोगों की व्यक्तिगत जिम्मेदारी बनती है।
विज्ञापन
जिला प्रशासन की ओर से मंगलवार को कई खाप के मुखिया, जाट आरक्षण संघर्ष समिति के पदाधिकारी और युवा संघर्ष समिति के पदाधिकारियों सहित 55 लोगों को नोटिस जारी करके कहा गया है कि सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के अनुसार जन आंदोलनों के दौरान हुई हिंसा के कारण जान-माल व संपत्ति के नुकसान की भरपाई अपराध करने वालों के साथ-साथ आंदोलनों को आयोजित करने वाले लोगों की संपत्ति से भी होती है। नोटिस में स्पष्ट किया गया है कि फरवरी माह में आरक्षण आंदोलन के दौरान इन लोगों ने आयोजक, उत्प्रेरक या प्रणेता की भूमिका निभाई है जो सरकारी रिपोर्टों व सार्वजनिक मंचों से दिए गए भाषणों से साबित होती है। नोटिस में कहा गया है कि फरवरी माह में हुए उपद्रव के दौरान हजारों करोड़ रुपये की निजी व सरकारी संपत्ति को नुकसान हुआ है। कई लोग मारे गए। सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के अनुसार हुए नुकसान की भरपाई इन लोगों की व्यक्तिगत जिम्मेदारी बनती है।
विज्ञापन