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सरपंचों की बजाय पहले विधायकों और सांसदों पर लागू किया जाए राइट टू रिकॉल : हुड्डा

Mon, 31 Aug 2020 12:24 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Mon, 31 Aug 2020 12:24 AM IST
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right to recall decission first use on mp and mla
सर्किट हाउस में पत्रकारो से वार्ता करते पुर्व मुख्यमंत्री भुपेन्द्र सिंह हुड्डा । संवाद न्यूज ए - फोटो : RohtakCity
रोहतक। सरकार राइट टू रिकॉल सरपंचों की बजाय पहले विधायकों व सांसदों पर लागू करे। केवल सरपंचों पर बिल लागू करने से गांवों के भाईचारे पर बुरा असर पड़ेगा। इससे सरपंच के चुनाव में रंजिश बढ़ेगी। सरकार राइट टू रिकॉल की हिमायती है तो इसे पहले विधायकों पर लागू करे, भाजपा सरकार का एक साल पूरा होने वाला है। यदि सरकार इस बिल को पास करती है तो जनता इसे विधायकों के खिलाफ सबसे पहले इस्तेमाल करेगी। यह कहना है पूर्व मुख्यमंत्री एवं नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र सिंह हुड्डा का। वे रविवार को सर्किट हाउस में पत्रकारों से बातचीत कर रहे थे।
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मैं गृहमंत्री होता तो अब तक जांच हो चुकी होती पूरी
पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र हुड्डा ने हरियाणा सरकार के कार्यकाल में उजागर हुए धान, शराब, रजिस्ट्री घोटालों पर कटाक्ष करते हुए कहा कि इन सभी घोटालों में पूरी सरकार शामिल है। सरकार को जल्द से जल्द इसकी सीबीआई, हाईकोर्ट के सिटिंग जज या विधानसभा की कमेटी गठित कर जांच करानी चाहिए। डिप्टी सीएम व गृह मंत्री के बीच चल रहे ब्यानों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि हुड्डा ने कहा कि यदि मैं गृह मंत्री होता तो अब तक सब कुछ हो जाता, यानी जांच पूरी हो चुकी होती। अब गृह मंत्री अनिल विज से पूछा जाए कि उनके पास गृह मंत्रालय की शक्ति है या नहीं। भाजपा-जजपा की गठबंधन सरकार में आए दिन घोटाले हो रहे हैं। भाजपा सरकार ने अपने कार्यकाल में एक भी फैसला जनहित का नहीं लिया।
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उन्होंने प्रदेश की कानून व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठाते हुए कहा कि आज हरियाणा में इतने बुरे हालात हैं कि एक एसपी को मंत्री के खिलाफ एफआईआर दर्ज करानी पड़ रही है। प्रदेश सरकार निजीकरण और बेरोजगारी को बढ़ावा देने का काम कर रही है। कोरोना संक्रमणकाल में सरकार एक-एक करके महकमों को निजी हाथों में सौंप रही है। रोडवेज और बिजली महकमे के बाद अब पर्यटन विभाग का भी निजीकरण किया जा रहा है। नौकरी से निकाले गए 1983 पीटीआई के मसले पर भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने दोहराया कि कांग्रेस इनका रोजगार बचाने के लिए विधानसभा में प्राइवेट मेंबर बिल लेकर आएगी। इस बार के सत्र में सरकार ने पीटीआई मसले पर स्थगन प्रस्ताव को मंजूर नहीं किया, क्योंकि कोरोना की वजह से सत्र को महज औपचारिकता में बदल दिया गया था। लेकिन जैसे ही अगली बार सदन बैठेगी तो इस मसले को जोर शोर से उठाया जाएगा।
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किसान अपनी ही जमीन पर बन जाएगा नौकर
हुड्डा ने एक बार फिर तीन नए कृषि अध्यादेशों को किसान विरोधी करार दिया। उन्होंने कहा कि इनका मकसद मंडी व्यवस्था और एमएसपी को खत्म करना है। अगर ये अध्यादेश बिना एमएसपी (स्वामीनाथन रिपोर्ट सी टू फार्मूले के तरह) लागू होते हैं तो किसान अपनी ही जमीन पर एक नौकर बनकर रह जाएगा और बड़ी-बड़ी कंपनियां उसे अपना मोहताज बना लेंगी। भाजपा सरकार लगातार किसानों को फसलों का रेट देने से बच रही है। आज मंडियों में किसान को उसकी धान का रेट नहीं मिल रहा। 1850 रुपये एमएसपी की धान को सिर्फ 1100-1200 रुपये में ख़रीदा जा रहा है और दूसरे राज्यों से सस्ता चावल खरीद कर घोटाले को अंजाम दिया जा रहा है।
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