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रेल रोको आंदोलनः चार घंटे तीन स्थानों पर रहा किसानों का ट्रैक पर कब्जा

Fri, 19 Feb 2021 01:29 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Fri, 19 Feb 2021 01:29 AM IST
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Rail stop movement: Farmers occupied the track for four hours three places
इस्माइला में रेलवे लाइन पर बैठी महिलाएं। अमर उजाला - फोटो : RohtakCity
कृषि कानूनों के विरोध में वीरवार को जिले के विभन्न रेल मार्गों पर जाम लगाकर किसानों ने रोष प्रदर्शन किया। संयुक्त किसान मोर्चा के आह्वान पर किसानों ने चार घंटे ट्रेनों के पहिए थामे रखे। किसान नेताओं ने लोगों को कृषि कानूनों के छिपे हुए नुकसान समझाए। महिलाओं ने अपने गीतों के जरिए आंदोलन की अलख जगाने का प्रयास किया। किसानों ने दिल्ली रेल मार्ग पर इस्माईला व रोहद में जाम लगाया। जबकि श्रीगंगानगर से दिल्ली जाने वाली ट्रेन सांपला में करीब साढ़े तीन से चार घंटे फंसी रही। यहां लोगों को राहत के तौर पर बेसन लड्डू, बूंदी लड्डू, ब्रेड पकौडे़ खाने को दिए गए। लाखनमाजरा, लाहली व मकड़ौली में भी रेेलवे ट्रैक जाम किया गया।
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वीरवार को रोहद में रेल रोको अभियान के तहत रेलवे ट्रैक पर दिए धरने पर किसान सभा के राज्य उपप्रधान प्रीत सिंह ने कहा कि कृषि कानून देश की कृषि व्यवस्था व उस पर निर्भर आबादी, किसान, मजदूर व देश की खाद्य सुरक्षा पर बड़ा हमला है। कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग के कानून छोटे किसानों को बेरोजगार कर देंगे। मंडियां खत्म होंगी व किसानों को अपनी फसलें बेचने के लिए निजी मंडियों पर निर्भर रहना पड़ेगा। यहां फसलों की सरकारी खरीद की गारंटी भी नहीं होगी। उन्होंने कहा कि सरकार की किसानों को उजड़ने व अपने चहेते अंबानी-अडानी के मुनाफे बढ़ाने की साजिश को किसान समझ चुका है। कृषि कानून रद्द न होने, लागत का डेढ़ गुना भाव पर सभी फसलों की सरकारी खरीद की गारंटी का कानून बनाने व आंदोलन के दौरान किसानों पर बनाए गए फर्जी मुकदमे वापस लेने तक आंदोलन जारी रहेगा। सरकार किसान आंदोलन की मांगों को अनसुना कर रही है। इस कारण किसानों में आक्रोश बढ़ रह है।
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किसान सभा राज्य उपप्रधान इंद्रजीत सिंह ने कहा कि सरकार किसानों की मांगों के अनसुना कर जायज आंदोलन को कुचलना चाहती है। इसमें वे कभी कामयाब नहीं होंगे। यह ऐतिहासिक आंदोलन अपनी फसलों व आने वाली पीढ़ी को बचाने के लिए है। आंदोलन में अब तक 250 से ज्यादा किसान अपने प्राण न्यौछावर कर चुके हैं। हजारों किसान अभी दिल्ली के चारों तरह व अलग अलग जिलों में आंदोलनरत हैं। इसके बावजूद किसानों की मांगों को न मानना सरकार की हिटलरशाही को दिखाता है। किसान भी फैसला कर चुके हैं कि मांगों के पूरा हुए बगैर वे भी पीछे नहीं हटेंगे। इस मौके पर महिला समिति नेत्री जगमति सांगवान, कैप्टन शमशेर मलिक, टोल हटाओ संघर्ष समिति से वीरेंद्र हुड्डा, मनोज सहरावत समेत दर्जनों गांवों के किसान मौजूद रहे।
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इधर, लाखनमाजरा में भी संयुक्त किसान मोर्चा के आह्वान पर रेल मार्ग रोका गया। यहां लाखनमाजरा, चिड़ी, खरेंटी, चांदी, खरक, अजायब, मदीना, निंदाना, नांदल व अन्य गांवों के किसानों धरना दिया। किसान सभा के जिला सचिव सुमित दलाल ने कहा कि देशव्यापी रेल रोको अभियान के तहत लाखनमाजरा रेलवे स्टेशन पर जाम लगाया। यह अभियान सफल रहा।
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कमेटी के निर्देशों का इंतजार
रेल रोको अभियान के बाद अब किसानों को संयुक्त किसान मोर्चा के अगले फैसले का इंतजार है। मोर्चा के 40 सदस्यों के फैसले के मुताबिक, संघर्ष का अगला कदम उठाया जाएगा। फिलहाल दिल्ली सीमा पर किसान डटे हुए हैं। जिले में भी मकड़ौली टोल पर धरना दिया जा रहा है। यहां किसान लगातार अपना सहयोग दे रहे हैं। खरावड़ में भी किसानों का शिविर जारी है। यहां मेहमान किसानों को लंगर सेवा मुहैया कराई जा रही है।
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टोल की तरह रेल पहिए भी करेंगे जाम
भारतीय किसान यूनियन अंबावत के प्रदेश अध्यक्ष अनिल नांदल उर्फ बल्लू प्रधान ने इस्माईला रेलवे ट्रैक पर जाम के दौरान कहा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन व रेल रोको अभियान को किसानों ने सफल बनाया। अब भी सरकार नहीं मानी तो टोल प्लाजा की तरह रेल के भी पहिए परमानेंट थामने का काम किया जाएगा। सरकार को मात्र एक छोटा सा ट्रेलर दिखाया गया है। संगठन किसानों के हितों के लिए लड़ रहा है। कृषि कानूनों की वापसी तक घर नहीं लौटेंगे। उन्होंने कहा कि मौजूदा सरकार आम लोगों की नहीं, बल्कि कॉरपोरेट्स की सरकार है। इस मौके पर यूनियन की महिला विंग की प्रदेश अध्यक्ष प्रेमलता, साहब कौर, दर्शना, सीमा, रेखा, देवेंद्र, कृष्ण, संदीप व जसवीर समेत अनेक किसान मौजूद रही।

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कृषि कानून वापस होने तक जारी रहेगा आंदोलन
संयुक्त किसान मोर्चा के आह्वान पर इस्माइला स्टेशन पर रेल रोको कार्यक्रम को सफल बनाया गया। यहां किसान चार घंटे रेल की पटरियों पर बैठे रहे। आल इंडिया किसान खेत मजदूर संगठन से जुड़े किसान भी इस्माइला स्टेशन पर पहुंचे। संगठन के प्रदेश सचिव जयकरण मांडौठी ने कहा कि कार्यक्रम पूरी तरह से सफल रहा। सरकार के तीनों कृषि कानून व बिजली बिल 2020 रद्द नहीं होने तक आंदोलन जारी रहेगा।

इस्माइला रेलवे स्टेशन पर ट्रैक पर बैठकर नारेबाजी करते किसान। अमर उजाला

इस्माइला रेलवे स्टेशन पर ट्रैक पर बैठकर नारेबाजी करते किसान। अमर उजाला- फोटो : RohtakCity

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