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पोस्ट कोविड मरीजों को सांस, जोड़ों में दर्द की ज्यादा परेशानी
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कोरोना से जंग जीत रहे 60 प्रतिशत मरीज पोस्ट कोविड सिंड्रोम का शिकार हो रहे हैं। इन मरीजों को सांस लेने में समस्या के साथ मल्टीपल ज्वाइंट पेन (जोड़ों का दर्द) झेलना पड़ रहा है। यह समस्या शारीरिक रूप से कमजोर हो चुके मरीजों को भले ही अधिक पीड़ा दे रही हो, लेकिन पॉजिटिव सोच, नियमित व्यायाम व हाई प्रोटीन डाइट इससे राहत दिला सकती है। फिजियोथेरैपिस्ट के प्रदेशाध्यक्ष डॉ. आरके मुदगिल का कहना है कि दैनिक कार्य प्रणाली में जरा सा बदलाव कर मरीज पोस्ट कोविड की समस्या से स्वयं को बचा सकता है।
फिजियोेथेरैपी से करें फेफड़ों को मजबूत
विश्व स्वास्थ्य संगठन का भी मानना है कि पोस्ट कोविड मरीजों के लिए फिजियोथेरैपी चिकित्सा पद्धति कारगर है। यदि मरीज समय पर और नियमित फिजियोथेरैपी के अनुसार व्यायाम करें तो वह अपने फेफड़ों को मजबूत बना सकता है। यह जानकारी हरियाणा चार्टर्ड एसोसिएशन ऑफ फिजियोथेरैपिस्ट के प्रदेशाध्यक्ष डॉ. आरके मुदगिल ने दी। उन्होंने बताया कि संक्रमण फेफड़ों को नुकसान पहुंचाता है, इससे ऑक्सीजन सोखने की क्षमता कम हो जाती है। ऐसे में सांस लेने में दिक्कत होने लगती है और शरीर में ऑक्सीजन का स्तर कम होने लगता है। इससे थकान और अन्य परेशानी होने लगती है। इस समस्या से बचने के लिए फिजियोथैरेपी चिकित्सा जरूरी है। इससे फेफड़ों को मजबूत रखा जा सकता है और बलगम और कफ को बाहर निकाला जा सकता है।
फेफडे़ को मजबूत करने की विधि
1. नियंत्रित सांस लेना : हमें अपने द्वारा ली जा रही सांस को महसूस करना है और पांच-छह सेकेंड इसे रोककर बाहर निकालना होता है। छाती और पेट पर हाथ रखकर हम इसे महसूस कर सकते हैं। इसमें हमें अपनी श्वास क्रिया पर ध्यान केंद्रित करना होता है।
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2. डायफ्राग्मेटिक ब्रीदिंग एक्सरसाइज : शरीर को ढीला रखते हुए सीधे बैठ जाएं या लेटकर अपना एक हाथ अपनी छाती पर और दूसरा अपने पेट पर रखें। धीरे-धीरे सांस को नाक से अंदर खींचें और पेट को हाथ से हल्का सा दबा कर रखें। इससे महसूस होता है कि छाती ऊपर उठ रही है, फिर सांस को मुंह से बाहर फूंक मारते हुए धीरे-धीरे छोड़ें। यह प्रक्रिया दिन में 5 से 10 बार दोहराएं।
3. पर्स लिप ब्रीदिंग एक्सरसाइज : इसमें सांस को नाक से गहरा खींचने के बाद मुंह से छोड़ते समय अपने दोनों होठों को इस तरह से रखें जैसे सीटी बजाते हैं। इसके बाद सांस को धीरे-धीरे बाहर छोड़ें।
4. छाती फुलाना : हमें गहरी सांस लेकर छाती के दोनों और अपने हाथों से दबाव बनाना होता है। इससे फेफड़ों की मांसपेशियां मजबूत बनती हैं। इसको करने के लिए हाथों को छाती के दोनों और रखकर या टेबल का सहारा लेकर भी कर सकते हैं। इसमें छाती के निचले, मध्य और ऊपरी हिस्से की मांसपेशियों को मजबूत बनाया जाता है, ताकि हमें सांस लेने में परेशानी न हो।
5. बलपूर्वक सांस छोड़ना : इसके लिए किसी बड़े गुब्बारे में हवा भरी जा सकती है और किसी मोमबत्ती को जोर से बुझाने की कोशिश की जा सकती है। यही नहीं किसी पतली स्ट्रॉ को लेकर पानी में फूंक मारकर बुलबुले पैदा किए जा सकते हैं।
6. इंटेंसिव स्पायरोमीटर : केमिस्ट शॉप से स्पायरोमीटर लेकर ब्रीदिंग एक्सरसाइज की जा सकती हे। यह एक यंत्र है, इसके तीन भाग होते हैं। इसके एक चेंबर में तीन प्लास्टिक की गेंद पड़ी होती हैं। इसमें एक ट्यूब होती है तथा एक माउथपीस होता है। इसके सहारे सांस को अंदर खींचते और बाहर छोड़ते हैं। इसमें सबसे पहले फेफड़े की सारी हवा को बाहर निकाल दिया जाता है और माउथपीस को होंठों से दबाते हुए धीरे-धीरे सांस को अंदर खींचते हैं। इससे चेंबर में गेंद ऊपर उठती है। कोशिश करें कि तीनों गेंद एक साथ उठे, पर ऐसा ना भी हो तो प्रयास करते रहें। इससे फेफड़ों के प्रत्येक भाग में ऑक्सीजन पहुंचती है।
7. सांस रोकना और जोर से खांसना : हमें सबसे पहले गहरी सांस लेकर उसे कुछ सेकेंड के लिए रोक कर फिर तेजी से खांसना होता है। इससे फेफड़ों में जमा बलगम या कफ निकलने में आसानी होती है। इसे अधिक प्रभावी बनाने के लिए छोटे बच्चों की तरह घुटनों के बल झुककर भी किया जा सकता है।
नोट : ये सभी एक्सरसाइज सामान्य व्यक्ति व पोस्ट कोविड व कोविड मरीज कर सकते हैं। यदि किसी को समस्या आए तो उसे फिजियोथेरैपी चिकित्सक से सलाह लेनी चाहिए।
इन बातों पर दें ध्यान
- बैठने और लेटने के तरीकों में बदलाव करके भी ऑक्सीजन के स्तर को बढ़ाया जा सकता है।
- सीधे लेटने के स्थान पर पेट के बल लेटने की कोशिश करें या फिर दाएं या बाएं करवट लेटें, इससे वेंटिलेशन में सुधार होता है। फेफड़ों की सबसे छोटी अल्वियोलर इकाई खुलती है और सांस लेना आसान हो जाता है।
नोट : गर्भवती स्त्रियां, हृदय रोगी, रीढ़ व हड्डी के फ्रेक्चर वाले मरीज ऐसा न करें।
- बैठते समय सिर को नीचे झुका लें, इससे फेफड़ों में ऑक्सीजन की मात्रा बढ़ती है।
हाई प्रोटीन हेल्दी डाइट बनाएगी शरीर को मजबूत : डॉ. हिमांशी
न्यूट्रिशियन एवं डायटिशियन डॉ. हिमांशी ने बताया कि कोरोना के दौरान मरीज का शरीर बहुत कमजोर हो जाता है। इसलिए जरूरी है कि कोरोना के बाद शरीर को पूरी डाइट दी जाए। इसमें जरूरी है कि हर घंटे के अंतराल पर हाई प्रोटीन फूड दिया जाए। हमें दाल, चावल, किनवा, भीगे हुए ड्राइ फ्रूट्स, दिन में एक बार हल्दी वाला दूध, आंवला, उबला चना, पोहा, अंकुरित मूंग, मोठ चाट, घर का बना साधारण खाना खाएं। इसके साथ रोजाना 150 ग्राम घर का बना कच्चा पनीर सलाद में लें। खास ध्यान देने योग्य है कि हमें वसायुक्त भोजन नहीं करना है। मांसपेशियों को मजबूत बनाने के लिए फाइबर वाले खाद्य पदार्थ खाने चाहिए, इससे नए रेशे बनेंगे और मांसपेशियां मजबूत होंगी।
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फिजियोेथेरैपी से करें फेफड़ों को मजबूत
विश्व स्वास्थ्य संगठन का भी मानना है कि पोस्ट कोविड मरीजों के लिए फिजियोथेरैपी चिकित्सा पद्धति कारगर है। यदि मरीज समय पर और नियमित फिजियोथेरैपी के अनुसार व्यायाम करें तो वह अपने फेफड़ों को मजबूत बना सकता है। यह जानकारी हरियाणा चार्टर्ड एसोसिएशन ऑफ फिजियोथेरैपिस्ट के प्रदेशाध्यक्ष डॉ. आरके मुदगिल ने दी। उन्होंने बताया कि संक्रमण फेफड़ों को नुकसान पहुंचाता है, इससे ऑक्सीजन सोखने की क्षमता कम हो जाती है। ऐसे में सांस लेने में दिक्कत होने लगती है और शरीर में ऑक्सीजन का स्तर कम होने लगता है। इससे थकान और अन्य परेशानी होने लगती है। इस समस्या से बचने के लिए फिजियोथैरेपी चिकित्सा जरूरी है। इससे फेफड़ों को मजबूत रखा जा सकता है और बलगम और कफ को बाहर निकाला जा सकता है।
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फेफडे़ को मजबूत करने की विधि
1. नियंत्रित सांस लेना : हमें अपने द्वारा ली जा रही सांस को महसूस करना है और पांच-छह सेकेंड इसे रोककर बाहर निकालना होता है। छाती और पेट पर हाथ रखकर हम इसे महसूस कर सकते हैं। इसमें हमें अपनी श्वास क्रिया पर ध्यान केंद्रित करना होता है।
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2. डायफ्राग्मेटिक ब्रीदिंग एक्सरसाइज : शरीर को ढीला रखते हुए सीधे बैठ जाएं या लेटकर अपना एक हाथ अपनी छाती पर और दूसरा अपने पेट पर रखें। धीरे-धीरे सांस को नाक से अंदर खींचें और पेट को हाथ से हल्का सा दबा कर रखें। इससे महसूस होता है कि छाती ऊपर उठ रही है, फिर सांस को मुंह से बाहर फूंक मारते हुए धीरे-धीरे छोड़ें। यह प्रक्रिया दिन में 5 से 10 बार दोहराएं।
3. पर्स लिप ब्रीदिंग एक्सरसाइज : इसमें सांस को नाक से गहरा खींचने के बाद मुंह से छोड़ते समय अपने दोनों होठों को इस तरह से रखें जैसे सीटी बजाते हैं। इसके बाद सांस को धीरे-धीरे बाहर छोड़ें।
4. छाती फुलाना : हमें गहरी सांस लेकर छाती के दोनों और अपने हाथों से दबाव बनाना होता है। इससे फेफड़ों की मांसपेशियां मजबूत बनती हैं। इसको करने के लिए हाथों को छाती के दोनों और रखकर या टेबल का सहारा लेकर भी कर सकते हैं। इसमें छाती के निचले, मध्य और ऊपरी हिस्से की मांसपेशियों को मजबूत बनाया जाता है, ताकि हमें सांस लेने में परेशानी न हो।
5. बलपूर्वक सांस छोड़ना : इसके लिए किसी बड़े गुब्बारे में हवा भरी जा सकती है और किसी मोमबत्ती को जोर से बुझाने की कोशिश की जा सकती है। यही नहीं किसी पतली स्ट्रॉ को लेकर पानी में फूंक मारकर बुलबुले पैदा किए जा सकते हैं।
6. इंटेंसिव स्पायरोमीटर : केमिस्ट शॉप से स्पायरोमीटर लेकर ब्रीदिंग एक्सरसाइज की जा सकती हे। यह एक यंत्र है, इसके तीन भाग होते हैं। इसके एक चेंबर में तीन प्लास्टिक की गेंद पड़ी होती हैं। इसमें एक ट्यूब होती है तथा एक माउथपीस होता है। इसके सहारे सांस को अंदर खींचते और बाहर छोड़ते हैं। इसमें सबसे पहले फेफड़े की सारी हवा को बाहर निकाल दिया जाता है और माउथपीस को होंठों से दबाते हुए धीरे-धीरे सांस को अंदर खींचते हैं। इससे चेंबर में गेंद ऊपर उठती है। कोशिश करें कि तीनों गेंद एक साथ उठे, पर ऐसा ना भी हो तो प्रयास करते रहें। इससे फेफड़ों के प्रत्येक भाग में ऑक्सीजन पहुंचती है।
7. सांस रोकना और जोर से खांसना : हमें सबसे पहले गहरी सांस लेकर उसे कुछ सेकेंड के लिए रोक कर फिर तेजी से खांसना होता है। इससे फेफड़ों में जमा बलगम या कफ निकलने में आसानी होती है। इसे अधिक प्रभावी बनाने के लिए छोटे बच्चों की तरह घुटनों के बल झुककर भी किया जा सकता है।
नोट : ये सभी एक्सरसाइज सामान्य व्यक्ति व पोस्ट कोविड व कोविड मरीज कर सकते हैं। यदि किसी को समस्या आए तो उसे फिजियोथेरैपी चिकित्सक से सलाह लेनी चाहिए।
इन बातों पर दें ध्यान
- बैठने और लेटने के तरीकों में बदलाव करके भी ऑक्सीजन के स्तर को बढ़ाया जा सकता है।
- सीधे लेटने के स्थान पर पेट के बल लेटने की कोशिश करें या फिर दाएं या बाएं करवट लेटें, इससे वेंटिलेशन में सुधार होता है। फेफड़ों की सबसे छोटी अल्वियोलर इकाई खुलती है और सांस लेना आसान हो जाता है।
नोट : गर्भवती स्त्रियां, हृदय रोगी, रीढ़ व हड्डी के फ्रेक्चर वाले मरीज ऐसा न करें।
- बैठते समय सिर को नीचे झुका लें, इससे फेफड़ों में ऑक्सीजन की मात्रा बढ़ती है।
हाई प्रोटीन हेल्दी डाइट बनाएगी शरीर को मजबूत : डॉ. हिमांशी
न्यूट्रिशियन एवं डायटिशियन डॉ. हिमांशी ने बताया कि कोरोना के दौरान मरीज का शरीर बहुत कमजोर हो जाता है। इसलिए जरूरी है कि कोरोना के बाद शरीर को पूरी डाइट दी जाए। इसमें जरूरी है कि हर घंटे के अंतराल पर हाई प्रोटीन फूड दिया जाए। हमें दाल, चावल, किनवा, भीगे हुए ड्राइ फ्रूट्स, दिन में एक बार हल्दी वाला दूध, आंवला, उबला चना, पोहा, अंकुरित मूंग, मोठ चाट, घर का बना साधारण खाना खाएं। इसके साथ रोजाना 150 ग्राम घर का बना कच्चा पनीर सलाद में लें। खास ध्यान देने योग्य है कि हमें वसायुक्त भोजन नहीं करना है। मांसपेशियों को मजबूत बनाने के लिए फाइबर वाले खाद्य पदार्थ खाने चाहिए, इससे नए रेशे बनेंगे और मांसपेशियां मजबूत होंगी।