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कारगिल के हीरो:: खड़ी चढ़ाई कर पिंपल टू पर किया था कब्जा, भाग खड़े हुए थे दुश्मन

Wed, 16 Jul 2025 08:22 PM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Wed, 16 Jul 2025 08:22 PM IST
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Pimple Two was captured after climbing steeply, the enemies ran away
पूर्व सूबेदार सूरत सिंह।
माई सिटी रिपोर्टर
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रोहतक। 17 जाट रेजिमेंट की अल्फा कंपनी में शामिल रहे मूलरूप से सोनीपत जिले के बिचपड़ी गांव व हाल सेक्टर-4 रोहतक निवासी पूर्व सूबेदार सूरत सिंह बताते हैं कि कारगिल युद्ध कठिनाइयों भरा था। एक ही बटालियन की अलग-अलग कंपनियों को कई-कई लक्ष्य दिए गए थे। उनकी कंपनी को पिंपल्स वन और पिंपल्स टू पर कब्जा करने का निर्देश मिला था।
मश्कोह वैली स्थित पिंपल टू पर पहले कब्जा करना था। इसके बाद पिंपल वन का लक्ष्य था। इसके लिए मश्कोह नाले (सफेद नाला) से होकर जाना था। चोटी पर बैठे दुश्मन को इसकी भनक लग गई थी। वह नाले पर भारी बमबारी कर रहा था। इस कारण कंपनी को 50 फीट चौड़े नाले को पार करने में ही 30 मिनट का समय लग गया।
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सूरत सिंह बताते हैं अंधाधुंध बमबारी के बीच उनकी कंपनी मुश्किल से निकली। यहां से आगे बढ़ने के लिए पहाड़ की खड़ी ढलान का रास्ता चुनना पड़ा। इसके बाद ही वे पिंपल टू तक पहुंच पाए। 4 जुलाई की रात करीब साढ़े तीन बजे अंधेरे में उन्होंने हमला किया। सुबह 5 बजे तक लड़ाई चली।
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सूरत बताते हैं कि सूरज की जब पहली किरण खिली तो हमले से डरकर दुश्मन भाग खड़ा हुआ। इनमें से कुछ तो मारे गए और कुछ पिंपल वन में छिप गए। दुश्मन ने वहां पक्के बंकर बना रखे थे। यहां बड़ी संख्या में हथियार भी मिले। सुबह 5 बजे जीत का परचम लहराने के बाद उनकी कंपनी ने फिर रात का इंतजार किया।
इस जीत से दुश्मन तक हथियार व रसद पहुंचना बंद हो गई। अंधेरा छाते ही कंपनी ने पिंपल वन की ओर कदम बढ़ा दिए। यहां भी जवानों ने अपनी लगन व जज्बे से जीत दर्ज की। इस कार्रवाई में लेफ्टिनेंट राजेश वेनुगोपाल व 37 अन्य जवान शामिल रहे। उन्होंने टीम की अगुवाई की और अंधेरे में दो गाइड के साथ कंपनी को आगे बढ़ने में मदद की।

दुश्मन ऊंचाई पर था, पहाड़ की खड़ी चढ़ाई रोक रही थी कदम
सूरत सिंह बताते हैं दुश्मन ऊंचाई पर था। वह दूर तक देख सकता था इसलिए सफेद नाला पार करने में मुश्किल आई। यहां वह लगातार बम बरसाता रहा। यही नहीं, पहाड़ की खड़ी चढ़ाई भी बड़ी मुश्किल से पूरी की थी। जवान दो कदम आगे बढ़ाते थे तो एक कदम फिसलकर वापस आ जाते थे। अंधेरे में इस परेशानी का सामना करते हुए पिंपल वन और टू पर तिरंगा फहराया था। यह यादगार क्षण था। अब भी बटालियन के जवान मिलते हैं तो सारा मंजर ताजा हो जाता है।

पूर्व सूबेदार सूरत सिंह।

पूर्व सूबेदार सूरत सिंह।

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