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वीसी आफिस में ही धरने पर बैठे डॉक्टर, गर्मागर्मी के बीच दफ्तर छोड़ गए वीसी
ब्यूरो/अमर उजाला, रोहतक
Updated Fri, 17 Mar 2017 01:21 AM IST
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हेल्थ विवि में हाईवोल्टेज ड्रामा : वेतन रिकवरी और जारी किए गए नोटिस के मामले में अधिकारी से मिलने पहुंचे थे डॉक्टर
- फोटो : amar ujala
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पीजीआई में वीरवार शाम को दो घंटे हाईवोल्टेज ड्रामा चला। वेतन रिकवरी और अभद्र व्यवहार के नोटिस मामले में वीसी से मिलने डॉक्टर पहुंच गए। वीसी ने उनकी बात सुनी लेकिन अभद्र व्यवहार करने के मामले में जारी नोटिस वापस लेने से साफ इनकार कर दिया। इस पर डॉक्टर वीसी के आफिस में ही धरने पर बैठ गए। वीसी ने भी डॉक्टरों पर मनमानी का आरोप लगाया और आफिस से उठकर चले गए। हालांकि वीसी के दफ्तर छोड़ने के बाद रजिस्ट्रार और डायरेक्टर ने मोर्चा संभाला और हंगामा कर रहे डॉक्टरों को आश्वासन देकर शांत करवाया। जब तक पीजीआई के डॉक्टर हंगामे में व्यस्त रहे, मरीज इलाज के लिए तरसते रहे। मेडिकल टीचर एसोसिएशन ने चेतावनी दी है कि डॉक्टर 27 मार्च तक काले बैच लगाकर काम करेंगे। इसके बाद भी मांगें नहीं मानी गई तो 28 मार्च से मास लीव पर चले जाएंगे।
दरअसल, वीरवार शाम करीब साढ़े तीन बजे लेक्चर थियेटर एक में पंडित भगवत दयाल शर्मा हेल्थ यूनिवर्सिटी के डॉक्टर जमा हुए। यहां पर चार बजे से हरियाणा स्टेट मेडिकल टीचर एसोसिएशन की नई कार्यकारिणी का चुनाव होना था। एक घंटे में प्रधान और कार्यकारिणी गठित कर दी गई। इसके बाद सभी डॉक्टर मांगों को लेकर कुलपति से मिलने उनके कार्यालय पहुंच गए। पहले तो वीसी से मिलने के लिए पर्ची भेजी गई, अंदर से जवाब आया कि दो मिनट इंतजार करें। यह बात डॉक्टरों को नागवार गुजरी और वे कार्यालय में दाखिल हो गए। यहां एसोसिएशन के नवनिर्वाचित प्रधान डॉ. आरबी जैन ने कुलपति डॉ. ओपी कालरा से बात की। डॉ. जैन ने कुलपति से मांग की कि उनके ऊपर अभद्र व्यवहार का आरोप लगाकर जो नोटिस जारी किया गया है, उसे वापस लिया जाए। इसके साथ ही, डॉक्टरों की वेतन विसंगतियों का समाधान किया जाए। वीसी ने नोटिस को वापस लेने से साफ इनकार कर दिया और कहा कि इस व्यवहार की शिकायत सरकार से की जाएगी। नोटिस वापस न लेने की बात कहते ही डॉक्टर भड़क गए और नारेबाजी करने लगे। नाराज कुलपति ने अपना सामान समेटा और कार्यालय छोड़कर चले गए। इसके बाद मौके पर डायरेक्टर डॉ. राकेश गुप्ता और रजिस्ट्रार डॉ. एचके अग्रवाल पहुंचे। उन्होंने एसोसिएशन के पदाधिकारियों से बात की और उनकी मांगों को लेकर आश्वासन दिया। वहीं, रजिस्ट्रार की ओर से अभद्र व्यवहार का आरोप लगा जो नोटिस दिया गया था, उसे भी मौखिक रूप से वापस ले लिया गया। वेतन विसंगतियों के संबंध में डायरेक्टर ने बताया कि ऊपर क्लेरीफिकेशन रिपोर्ट भेजी जाएगी और मामले को सुलझा लिया जाएगा।
... और लड्डू खिलाकर विवाद खत्म
शाम चार से छह बजे तक चले इस हाईवोल्टेज ड्रामे का अंत लड्डू खिलाकर हुआ। जब डायरेक्टर और रजिस्ट्रार के आश्वासन पर डॉक्टर मान गए तो नए प्रधान बनने और कार्यकारिणी का गठन होने के उपलक्ष्य में डॉ. आरबी जैन ने रजिस्ट्रार और डायरेक्टर को लड्डू खिलाया।
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अब आगे क्या
डॉ. आरबी जैन ने बताया कि सभी फैकल्टी के डॉक्टर 27 मार्च तक काले बैच लगाकर काम करेंगे। अगर तब तक मांगों को लेकर लिखित में समाधान नहीं किया जाता है तो 28 मार्च स्रे प्रदर्शन किया जाएगा और सभी डॉक्टर मास लीव पर चले जाएंगे। इसके बाद भी मांगों को नहीं माना गया तो पहली अप्रैल से डॉक्टर विरोध स्वरूप हड़ताल करेंगे।
यह है पूरा मामला और डॉक्टरों की मांग
नवनिर्वाचित प्रधान डॉ. आरबी जैन ने बताया कि सरकार की ओर पत्र जारी किया गया कि छठे वेतन आयोग के तहत डॉक्टरों को जो वेतन मिल रहा है, वह वित्त विभाग से अप्रूव नहीं है। इसके बाद मेडिकल एजूकेशन के संयुक्त मुख्य सचिव (एसीएस) को विभाग को क्लेरीफिकेशन रिपोर्ट भेजनी थी, जो नहीं भेजी गई। 31 दिसंबर 2016 को छठे वेतन आयोग की समय सीमा समाप्त हो गई। उन्होंने बताया कि तीन महीने के बीतने के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं हुई तो विभाग की ओर से डॉक्टरों के वेतन से रिकवरी करने का लेटर जारी कर दिया गया। इसी को रोकने की मांग डॉक्टर कर रहे थे। इसके अतिरिक्त 14 मार्च को अकादमिक काउंसिल की बैठक हुई थी। इसके बाद डॉ. आरबी जैन को रजिस्ट्रार की ओर से पत्र जारी किया गया कि उन्होंने विश्वविद्यालय प्रशासन की गरिमा के खिलाफ प्रशासनिक अधिकारियों से व्यवहार किया है। यह व्यवहार गैर जिम्मेदाराना है और इस संबंध में डॉ. आरबी जैन तीन दिन में जवाब दें। सभी डॉक्टर इसी पत्र को वापस लेने की मांग कर रहे थे। वीसी ने इस पत्र को वापस लेने से मना कर दिया जबकि रजिस्ट्रार ने इसे मौखिक रूप से वापस ले लिया।
मरीजों को छोड़ डॉक्टरों ने किया हंगामा, आश्वासन के बाद ही माने
मरीजों को छोड़कर डॉक्टरों ने हंगामा शुरू किया। इसके बाद जब डायरेक्टर और रजिस्ट्रार की ओर से आश्वासन मिला तब जाकर डॉक्टर माने। बता दें कि अभी कुछ दिन पहले हुई अकादमिक काउंसिल की बैठक में भी रिकवरी और पे स्केल के मुद्दे को लेकर हंगामा हो चुका था।
सर्व सहमति से हुआ एसोसिएशन का चुनाव, ये बने नए प्रधान
हरियाणा स्टेट मेडिकल टीचर एसोसिएशन का चुनाव सभी डॉक्टरों की सहमति से हुआ। इसके बाद नई कार्यकारिणी का गठन किया गया। इसमें डॉ. आरबी जैन को प्रधान, डॉ. अशोक राठी को उप प्रधान चुना गया। डॉ. ईश्वर सिंह को सचिव तो डॉ. वरुण अरोड़ा को संयुक्त सचिव की जिम्मेदारी दी गई है। डॉ. सिम्मी खरब को कोषाध्यक्ष बनाया गया है। डॉ. श्वेता, डॉ. महेश गोयल, डॉ. राजेश गुप्ता, डॉ. अंशुल चुघ, डॉ. प्रदीप कंबोज, डॉ. जितेंद्र जाखड़, डॉ. सतपाल और डॉ. प्रशांत को एसोसिएशन की कार्यकारिणी का सदस्य बनाया गया।
ऐसे दो फाड़ हुई पीजीआई
पीजीआई में अब दो ग्रुप बन गए हैं। विश्वस्त सूत्रों के अनुसार एक ग्रुप डायरेक्टर और अन्य डॉक्टरों का है और दूसरा ग्रुप वीसी का है। इसमें इंक्वायरी, विजिलेंस जांच, एक-दूसरे को फंसाने, संस्पेंड कराने समेत अन्य हथकंडे अपनाए जा रहे हैं। हालांकि सूत्रों ने बताया कि वेतन को लेकर जो विसंगतियों उत्पन्न हो रही हैं, वह सरकार की ओर से हैं और डॉक्टरों को इस संबंध में विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से कोई सहयोग नहीं किया जा रहा है और न ही उनकी समस्याओं का समाधान किया जा रहा है।
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दरअसल, वीरवार शाम करीब साढ़े तीन बजे लेक्चर थियेटर एक में पंडित भगवत दयाल शर्मा हेल्थ यूनिवर्सिटी के डॉक्टर जमा हुए। यहां पर चार बजे से हरियाणा स्टेट मेडिकल टीचर एसोसिएशन की नई कार्यकारिणी का चुनाव होना था। एक घंटे में प्रधान और कार्यकारिणी गठित कर दी गई। इसके बाद सभी डॉक्टर मांगों को लेकर कुलपति से मिलने उनके कार्यालय पहुंच गए। पहले तो वीसी से मिलने के लिए पर्ची भेजी गई, अंदर से जवाब आया कि दो मिनट इंतजार करें। यह बात डॉक्टरों को नागवार गुजरी और वे कार्यालय में दाखिल हो गए। यहां एसोसिएशन के नवनिर्वाचित प्रधान डॉ. आरबी जैन ने कुलपति डॉ. ओपी कालरा से बात की। डॉ. जैन ने कुलपति से मांग की कि उनके ऊपर अभद्र व्यवहार का आरोप लगाकर जो नोटिस जारी किया गया है, उसे वापस लिया जाए। इसके साथ ही, डॉक्टरों की वेतन विसंगतियों का समाधान किया जाए। वीसी ने नोटिस को वापस लेने से साफ इनकार कर दिया और कहा कि इस व्यवहार की शिकायत सरकार से की जाएगी। नोटिस वापस न लेने की बात कहते ही डॉक्टर भड़क गए और नारेबाजी करने लगे। नाराज कुलपति ने अपना सामान समेटा और कार्यालय छोड़कर चले गए। इसके बाद मौके पर डायरेक्टर डॉ. राकेश गुप्ता और रजिस्ट्रार डॉ. एचके अग्रवाल पहुंचे। उन्होंने एसोसिएशन के पदाधिकारियों से बात की और उनकी मांगों को लेकर आश्वासन दिया। वहीं, रजिस्ट्रार की ओर से अभद्र व्यवहार का आरोप लगा जो नोटिस दिया गया था, उसे भी मौखिक रूप से वापस ले लिया गया। वेतन विसंगतियों के संबंध में डायरेक्टर ने बताया कि ऊपर क्लेरीफिकेशन रिपोर्ट भेजी जाएगी और मामले को सुलझा लिया जाएगा।
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... और लड्डू खिलाकर विवाद खत्म
शाम चार से छह बजे तक चले इस हाईवोल्टेज ड्रामे का अंत लड्डू खिलाकर हुआ। जब डायरेक्टर और रजिस्ट्रार के आश्वासन पर डॉक्टर मान गए तो नए प्रधान बनने और कार्यकारिणी का गठन होने के उपलक्ष्य में डॉ. आरबी जैन ने रजिस्ट्रार और डायरेक्टर को लड्डू खिलाया।
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अब आगे क्या
डॉ. आरबी जैन ने बताया कि सभी फैकल्टी के डॉक्टर 27 मार्च तक काले बैच लगाकर काम करेंगे। अगर तब तक मांगों को लेकर लिखित में समाधान नहीं किया जाता है तो 28 मार्च स्रे प्रदर्शन किया जाएगा और सभी डॉक्टर मास लीव पर चले जाएंगे। इसके बाद भी मांगों को नहीं माना गया तो पहली अप्रैल से डॉक्टर विरोध स्वरूप हड़ताल करेंगे।
यह है पूरा मामला और डॉक्टरों की मांग
नवनिर्वाचित प्रधान डॉ. आरबी जैन ने बताया कि सरकार की ओर पत्र जारी किया गया कि छठे वेतन आयोग के तहत डॉक्टरों को जो वेतन मिल रहा है, वह वित्त विभाग से अप्रूव नहीं है। इसके बाद मेडिकल एजूकेशन के संयुक्त मुख्य सचिव (एसीएस) को विभाग को क्लेरीफिकेशन रिपोर्ट भेजनी थी, जो नहीं भेजी गई। 31 दिसंबर 2016 को छठे वेतन आयोग की समय सीमा समाप्त हो गई। उन्होंने बताया कि तीन महीने के बीतने के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं हुई तो विभाग की ओर से डॉक्टरों के वेतन से रिकवरी करने का लेटर जारी कर दिया गया। इसी को रोकने की मांग डॉक्टर कर रहे थे। इसके अतिरिक्त 14 मार्च को अकादमिक काउंसिल की बैठक हुई थी। इसके बाद डॉ. आरबी जैन को रजिस्ट्रार की ओर से पत्र जारी किया गया कि उन्होंने विश्वविद्यालय प्रशासन की गरिमा के खिलाफ प्रशासनिक अधिकारियों से व्यवहार किया है। यह व्यवहार गैर जिम्मेदाराना है और इस संबंध में डॉ. आरबी जैन तीन दिन में जवाब दें। सभी डॉक्टर इसी पत्र को वापस लेने की मांग कर रहे थे। वीसी ने इस पत्र को वापस लेने से मना कर दिया जबकि रजिस्ट्रार ने इसे मौखिक रूप से वापस ले लिया।
मरीजों को छोड़ डॉक्टरों ने किया हंगामा, आश्वासन के बाद ही माने
मरीजों को छोड़कर डॉक्टरों ने हंगामा शुरू किया। इसके बाद जब डायरेक्टर और रजिस्ट्रार की ओर से आश्वासन मिला तब जाकर डॉक्टर माने। बता दें कि अभी कुछ दिन पहले हुई अकादमिक काउंसिल की बैठक में भी रिकवरी और पे स्केल के मुद्दे को लेकर हंगामा हो चुका था।
सर्व सहमति से हुआ एसोसिएशन का चुनाव, ये बने नए प्रधान
हरियाणा स्टेट मेडिकल टीचर एसोसिएशन का चुनाव सभी डॉक्टरों की सहमति से हुआ। इसके बाद नई कार्यकारिणी का गठन किया गया। इसमें डॉ. आरबी जैन को प्रधान, डॉ. अशोक राठी को उप प्रधान चुना गया। डॉ. ईश्वर सिंह को सचिव तो डॉ. वरुण अरोड़ा को संयुक्त सचिव की जिम्मेदारी दी गई है। डॉ. सिम्मी खरब को कोषाध्यक्ष बनाया गया है। डॉ. श्वेता, डॉ. महेश गोयल, डॉ. राजेश गुप्ता, डॉ. अंशुल चुघ, डॉ. प्रदीप कंबोज, डॉ. जितेंद्र जाखड़, डॉ. सतपाल और डॉ. प्रशांत को एसोसिएशन की कार्यकारिणी का सदस्य बनाया गया।
ऐसे दो फाड़ हुई पीजीआई
पीजीआई में अब दो ग्रुप बन गए हैं। विश्वस्त सूत्रों के अनुसार एक ग्रुप डायरेक्टर और अन्य डॉक्टरों का है और दूसरा ग्रुप वीसी का है। इसमें इंक्वायरी, विजिलेंस जांच, एक-दूसरे को फंसाने, संस्पेंड कराने समेत अन्य हथकंडे अपनाए जा रहे हैं। हालांकि सूत्रों ने बताया कि वेतन को लेकर जो विसंगतियों उत्पन्न हो रही हैं, वह सरकार की ओर से हैं और डॉक्टरों को इस संबंध में विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से कोई सहयोग नहीं किया जा रहा है और न ही उनकी समस्याओं का समाधान किया जा रहा है।