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Rohtak News: प्रदेश के दो पूर्व मुख्यमंत्रियों के गांवों में लोग आरटीआई से अनजान
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रोहतक। सूचना का अधिकार कानून (आरटीआई) को लागू हुए भले 19 साल हो गए हैं। इसके बावजूद अब तक बहुसंख्यक आबादी इस कानून की जानकारी से अनभिज्ञ है। प्रदेश के दो पूर्व मुख्यमंत्री के गांवों तक में लाग इस कानून से अनजान हैं। सांघी में ऐसे 70 प्रतिशत व बनियानी में 85 प्रतिशत आबादी है। यह बात आरटीआई के तहत मांगी गई सूचना व हरियाणा सूचना अधिकार मंच की ओर से सांघी व बनियानी में किए गए सर्वे में निकलकर सामने आई है।
मंच संयोजक एवं आरटीआई कार्यकर्ता सुभाष ने ग्रामीण इलाकों में आरटीआई कानून के प्रति कितने प्रतिशत लोग जागरूक हैं, यह जांचने के लिए दो पूर्व मुख्यमंत्रियों के गांवों का चयन किया गया। सांघी व बनियानी दोनों गांव रोहतक जिले में हैं। ये जिला मुख्यालय से लगभग 15 किलोमीटर की एक समान दूरी पर स्थित हैं। एक गांव गोहाना रोड पर जसिया गांव से लगभग तीन किलोमीटर व दूसरा भिवानी रोड पर भाली गांव से करीब तीन किलोमीटर दूर है।
बनियानी गांव से मनोहर लाल नौ वर्ष तक प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे। सांघी से भूपेंद्र सिंह हुड्डा भी मुख्यमंत्री रहे। सांघी व बनियानी में हरियाणा सूचना अधिकार मंच ने आरटीआई कानून के बारे में 10 सवाल पूछे गए। मंच संयोजक ने बताया कि सर्वे के लिए सांघी गांव में 300 लोगों का चयन किया। सर्वे में शामिल 30 प्रतिशत लोगों को सूचना अधिकार कानून के बारे में पता था, जबकि पांच प्रतिशत लोगों ने विभिन्न विभागों में जानकारी लेने के लिए इस कानून का इस्तेमाल भी किया। इसके बारे में जानने वाली महिलाओं की संख्या महज एक प्रतिशत है। आरटीआई के बारे में जानने वालों की संख्या 15 प्रतिशत रही। उन्हें इतना ही पता था कि यह कानून सरपंच से जानकारी मांगने का कानून है। इसके तहत किसी भी विभाग से जानकारी मांगने के प्रावधान से वे अनजान हैं। सर्वे के चिह्नित किए गए 70 प्रतिशत लोगों ने तो सूचना अधिकार कानून के बारे में सुना भी नहीं है।
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में सर्वे के लिए 200 व्यक्तियों से बातचीत की गई
मंच के राज्य संयोजक सुभाष ने बताया कि बनियानी में सर्वे के लिए 200 व्यक्तियों से बातचीत की गई। यहां लोगों को यही नहीं पता कि आरटीआई के बारे में जानकारी कहां से ली जाए। यहां की 99 प्रतिशत महिलाओं ने तो सूचना अधिकार कानून के बारे में सुना तक नहीं है। पुरुषों में 15 प्रतिशत इस कानून के बारे में सुना है, दो प्रतिशत ने इसका इस्तेमाल भी किया है। सर्वे से एक बात साफ हुई कि सांघी के लोग इस कानून को लेकर बनियानी से थोड़े ज्यादा जागरूक हैं। दोनों गांवों में बहुसंख्यक आबादी को इस कानून की जानकारी नहीं है। अभी इसके व्यापक प्रचार की जरूरत है। महिलाएं तो इस कानून से बहुत दूर हैं।
मंच संयोजक एवं आरटीआई कार्यकर्ता सुभाष ने ग्रामीण इलाकों में आरटीआई कानून के प्रति कितने प्रतिशत लोग जागरूक हैं, यह जांचने के लिए दो पूर्व मुख्यमंत्रियों के गांवों का चयन किया गया। सांघी व बनियानी दोनों गांव रोहतक जिले में हैं। ये जिला मुख्यालय से लगभग 15 किलोमीटर की एक समान दूरी पर स्थित हैं। एक गांव गोहाना रोड पर जसिया गांव से लगभग तीन किलोमीटर व दूसरा भिवानी रोड पर भाली गांव से करीब तीन किलोमीटर दूर है।
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बनियानी गांव से मनोहर लाल नौ वर्ष तक प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे। सांघी से भूपेंद्र सिंह हुड्डा भी मुख्यमंत्री रहे। सांघी व बनियानी में हरियाणा सूचना अधिकार मंच ने आरटीआई कानून के बारे में 10 सवाल पूछे गए। मंच संयोजक ने बताया कि सर्वे के लिए सांघी गांव में 300 लोगों का चयन किया। सर्वे में शामिल 30 प्रतिशत लोगों को सूचना अधिकार कानून के बारे में पता था, जबकि पांच प्रतिशत लोगों ने विभिन्न विभागों में जानकारी लेने के लिए इस कानून का इस्तेमाल भी किया। इसके बारे में जानने वाली महिलाओं की संख्या महज एक प्रतिशत है। आरटीआई के बारे में जानने वालों की संख्या 15 प्रतिशत रही। उन्हें इतना ही पता था कि यह कानून सरपंच से जानकारी मांगने का कानून है। इसके तहत किसी भी विभाग से जानकारी मांगने के प्रावधान से वे अनजान हैं। सर्वे के चिह्नित किए गए 70 प्रतिशत लोगों ने तो सूचना अधिकार कानून के बारे में सुना भी नहीं है।
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में सर्वे के लिए 200 व्यक्तियों से बातचीत की गई
मंच के राज्य संयोजक सुभाष ने बताया कि बनियानी में सर्वे के लिए 200 व्यक्तियों से बातचीत की गई। यहां लोगों को यही नहीं पता कि आरटीआई के बारे में जानकारी कहां से ली जाए। यहां की 99 प्रतिशत महिलाओं ने तो सूचना अधिकार कानून के बारे में सुना तक नहीं है। पुरुषों में 15 प्रतिशत इस कानून के बारे में सुना है, दो प्रतिशत ने इसका इस्तेमाल भी किया है। सर्वे से एक बात साफ हुई कि सांघी के लोग इस कानून को लेकर बनियानी से थोड़े ज्यादा जागरूक हैं। दोनों गांवों में बहुसंख्यक आबादी को इस कानून की जानकारी नहीं है। अभी इसके व्यापक प्रचार की जरूरत है। महिलाएं तो इस कानून से बहुत दूर हैं।