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Rohtak News: 500 रुपये ऑनलाइन ट्रांसफर ने खोला मां-बेटा हत्याकांड
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सफीदों (जींद)। मां-बेटे को रास्ते से हटाने के लिए अजय ने बहुत ही शातिर प्लान बनाया था। किराये का मकान लिया था, उसमें गलत नाम और पता भी बताया था। लेकिन, 500 रुपये ऑनलाइन ट्रांसफर कराने की एक चूक से हत्याकांड से पर्दा उठ गया, और सभी हत्यारे सलाखों के पीछे पहुंच गए।
वार्ड नंबर दो सरला कॉलेज स्थित दीपक का मकान किराये पर लेते वक्त मकान मालिक के चचेरे भाई सुनील उर्फ मोनू को अजय ने अपना नाम मनदीप बताया था। कहा था वह रोहतक का रहने वाला है, और टाइल पत्थर लगाने का काम करता है। उस पर भरोसा करके मोनू ने मकान रहने को दे दिया था। तब आरोपी अजय ने कहा था कि वह दो दिन बाद रोहतक जाकर अपनी आईडी लाकर उन्हें दे देगा। अजय ने घर जाने के लिए मोनू से 500 रुपये उधार मांगे थे। मोनू ने अपने भाई के मोबाइल फोन से अजय के बताए नंबर पर ऑनलाइन पैसे ट्रांसफर किए थे।
इधर, 33 दिन बाद मकान में मां-बेटे के कंकाल मिलने पर पुलिस ने मामले की बारीकी से छानबीन की। इस दौरान मोनू ने 500 रुपये ऑनलाइन ट्रांसफर कराने की जानकारी दी। पुलिस ने पड़ताल की तो यह नंबर गांव भागलपुर, बेरी झज्जर निवासी कोमल के पति मनीष का निकला। पुलिस ने मनीष से पूछताछ की तो उसने पत्नी के गुमशुदा होने और रोहतक निवासी अजय से संबंध होने की बात कही। इसके बाद पुलिस ने अजय और उसकी पत्नी पिंकी को हिरासत में लेकर पूछताछ की तो हत्याकांड का खुलासा हो गया।
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अजय ने गला दबाया, पिंकी ने पैरों को पकड़ा
पुलिस के मुताबिक, आरोपी अजय ने कोमल की गला दबाकर हत्या की, जबकि उसकी पत्नी पिंकी ने उसके पैर पकड़े थे। हत्या के वक्त बुआ का बेटा विनोद कोमल के दोनों बेटे और अजय की बेटी गौरी को कमरे से बाहर ले गया था।
अरनव ने बताया गला दबाकर की मम्मी व भाई की हत्या
अरनव उर्फ कबीरा के दादा रमेश ने बताया कि बहू और बेटे लापता हुए तो उनकी रिश्तेदारियों में तलाश की गई, लेकिन कोई सुराग नहीं लगा तो गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज करवाई। छोटे बेटे के घायल अवस्था में मोहाली में मिलने की सूचना मिली तो वे वहां पहुंचे। जब कबीरा से पूछा और कोमल व आरव का फोटो दिखाया तो बताया कि मम्मी व भाई को गला दबा दिया था।
.............
फोटो-15 से 18
मां-बेटे का एक ही चिता में हुआ अंतिम संस्कार
संवाद न्यूज एजेंसी
बेरी (झज्जर)। सफीदों में बंद मकान के बाथरूम में मिले मां व बेटे के कंकाल का परिजनों ने बुधवार शाम एक ही चिता में अंतिम संस्कार किया। हत्यारोपियों ने छोटे बेटे कबीरा को मरा समझकर मोहाली के जंगलों में फेंक दिया था। 11 सितंबर को जंगलों में किसी चरवाहे को बच्चे के कराहने की आवाज सुनाई दी, तो उसने लोगों की मदद से उसे अस्पताल में भर्ती करवाया। वहां से उसे पीजीआई में भर्ती कराया गया।
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वार्ड नंबर दो सरला कॉलेज स्थित दीपक का मकान किराये पर लेते वक्त मकान मालिक के चचेरे भाई सुनील उर्फ मोनू को अजय ने अपना नाम मनदीप बताया था। कहा था वह रोहतक का रहने वाला है, और टाइल पत्थर लगाने का काम करता है। उस पर भरोसा करके मोनू ने मकान रहने को दे दिया था। तब आरोपी अजय ने कहा था कि वह दो दिन बाद रोहतक जाकर अपनी आईडी लाकर उन्हें दे देगा। अजय ने घर जाने के लिए मोनू से 500 रुपये उधार मांगे थे। मोनू ने अपने भाई के मोबाइल फोन से अजय के बताए नंबर पर ऑनलाइन पैसे ट्रांसफर किए थे।
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इधर, 33 दिन बाद मकान में मां-बेटे के कंकाल मिलने पर पुलिस ने मामले की बारीकी से छानबीन की। इस दौरान मोनू ने 500 रुपये ऑनलाइन ट्रांसफर कराने की जानकारी दी। पुलिस ने पड़ताल की तो यह नंबर गांव भागलपुर, बेरी झज्जर निवासी कोमल के पति मनीष का निकला। पुलिस ने मनीष से पूछताछ की तो उसने पत्नी के गुमशुदा होने और रोहतक निवासी अजय से संबंध होने की बात कही। इसके बाद पुलिस ने अजय और उसकी पत्नी पिंकी को हिरासत में लेकर पूछताछ की तो हत्याकांड का खुलासा हो गया।
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अजय ने गला दबाया, पिंकी ने पैरों को पकड़ा
पुलिस के मुताबिक, आरोपी अजय ने कोमल की गला दबाकर हत्या की, जबकि उसकी पत्नी पिंकी ने उसके पैर पकड़े थे। हत्या के वक्त बुआ का बेटा विनोद कोमल के दोनों बेटे और अजय की बेटी गौरी को कमरे से बाहर ले गया था।
अरनव ने बताया गला दबाकर की मम्मी व भाई की हत्या
अरनव उर्फ कबीरा के दादा रमेश ने बताया कि बहू और बेटे लापता हुए तो उनकी रिश्तेदारियों में तलाश की गई, लेकिन कोई सुराग नहीं लगा तो गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज करवाई। छोटे बेटे के घायल अवस्था में मोहाली में मिलने की सूचना मिली तो वे वहां पहुंचे। जब कबीरा से पूछा और कोमल व आरव का फोटो दिखाया तो बताया कि मम्मी व भाई को गला दबा दिया था।
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फोटो-15 से 18
मां-बेटे का एक ही चिता में हुआ अंतिम संस्कार
संवाद न्यूज एजेंसी
बेरी (झज्जर)। सफीदों में बंद मकान के बाथरूम में मिले मां व बेटे के कंकाल का परिजनों ने बुधवार शाम एक ही चिता में अंतिम संस्कार किया। हत्यारोपियों ने छोटे बेटे कबीरा को मरा समझकर मोहाली के जंगलों में फेंक दिया था। 11 सितंबर को जंगलों में किसी चरवाहे को बच्चे के कराहने की आवाज सुनाई दी, तो उसने लोगों की मदद से उसे अस्पताल में भर्ती करवाया। वहां से उसे पीजीआई में भर्ती कराया गया।