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काला पीलिया के मरीजों पर नहीं दिखा कोरोना संक्रमण का असर, दवा के परिणाम भी अच्छे नजर आए
Tue, 28 Jul 2020 03:40 PM IST
रोहतक ब्यूरो
संजय कुमार, रोहतक
संजय कुमार, रोहतक
Published by: रोहतक ब्यूरो
Updated Tue, 28 Jul 2020 03:40 PM IST
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सांकेतिक तस्वीर
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यूके, ईरान, ब्राजील, मिस्र, साउथ अफ्रीका में कोरोना संक्रमण पर काला पीलिया की दवाओं का असर देखने के लिए छोटे ट्रायलों में सफलता मिल चुकी है और इसके बड़े ट्रायल किए जाने हैं। इसी तरह प्रदेश के 1500 काला पीलिया के मरीजों में मार्च से अब तक की रिसर्च में सामने आया है कि इस दवा के परिणाम काफी अच्छे हैं।
दवा लेने वाला कोई भी मरीज अभी तक कोरोना संक्रमित नहीं मिला है। अध्ययन में सामने आया है कि संक्रमण काल में दवा लेने वाले मरीज बिल्कुल स्वस्थ हैं। यह दावा किया है पीजीआईएमएस रोहतक के गेस्ट्रोएंट्रोलॉजी विभाग के सीनियर प्रोफसर एवं काला पीलिया के मॉडल ट्रीटमेंट सेंटर व नेशनल स्टीयरिंग कमेटी के सदस्य डॉ. प्रवीण मल्होत्रा ने।
डॉ. मल्होत्रा ने बताया कि उन्होंने अपनी टीम को मार्च से ही यह जिम्मेदारी दे रखी है कि वह हर दवा लेने वाले मरीज के संपर्क में रहें और उनके स्वास्थ्य के बारे में जानकारी लेते रहें। क्योंकि इस दवा के कोर्स को बीच में नहीं छोड़ा जा सकता। अध्ययन में सामने आया कि काला पीलिया की दवा लेने वालों पर संक्रमण का कोई असर नहीं दिखाई दिया।
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कोरोना के मरीजों को बचाने के लिए यह दवा दी जा सकती है। काला पीलिया का उपचार 12 सप्ताह चलता है, लेकिन कोरोना के मरीज को दो सप्ताह यह दवा देकर हम उसे बचाने का प्रयास कर सकते हैं। यह दवा महंगी भी नहीं है, केंद्र सरकार ने इसे देशभर में निशुल्क उपलब्ध करवा रखा है। इसकी सप्लाई हर जगह उपलब्ध है।
उन्होंने बताया कि अहम बात यह है कि इस दवा के साइड इफेक्ट दस फीसदी से भी कम हैं। इसके साइड इफेक्ट में उल्टी, पेट दर्द, मांसपेशियों में जकड़न ही है। यह सामान्य साइड इफेक्ट हैं, जिन्हें कंट्रोल किया जा सकता है। यह दवा दिन में सिर्फ एक बार लेनी होती है। दिसंबर 2015 से यह दवा देश में उपलब्ध है।
गौरतलब है कि ईरान व यूके में इस दवा का ट्रायल भी पूरा हो चुका है। बाहर के देशों की रिसर्च में सामने आया है कि जिनको यह दवा दी गई उनका रिकवरी रेट अच्छा रहा और मृत्यु दर कम रही। इसके अलावा इस दवा को लेने वालों को अस्पताल में रुकने की कम जरूरत पड़ी।
यह है दवाएं
सोफोजब्यूविर 400 एमजी
सोफोजब्यूविर 400 एमजी प्लस वैलपातस्वीर 100 एमजी
डेक्ला सताविर 60 एमजी
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दवा लेने वाला कोई भी मरीज अभी तक कोरोना संक्रमित नहीं मिला है। अध्ययन में सामने आया है कि संक्रमण काल में दवा लेने वाले मरीज बिल्कुल स्वस्थ हैं। यह दावा किया है पीजीआईएमएस रोहतक के गेस्ट्रोएंट्रोलॉजी विभाग के सीनियर प्रोफसर एवं काला पीलिया के मॉडल ट्रीटमेंट सेंटर व नेशनल स्टीयरिंग कमेटी के सदस्य डॉ. प्रवीण मल्होत्रा ने।
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डॉ. मल्होत्रा ने बताया कि उन्होंने अपनी टीम को मार्च से ही यह जिम्मेदारी दे रखी है कि वह हर दवा लेने वाले मरीज के संपर्क में रहें और उनके स्वास्थ्य के बारे में जानकारी लेते रहें। क्योंकि इस दवा के कोर्स को बीच में नहीं छोड़ा जा सकता। अध्ययन में सामने आया कि काला पीलिया की दवा लेने वालों पर संक्रमण का कोई असर नहीं दिखाई दिया।
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कोरोना के मरीजों को बचाने के लिए यह दवा दी जा सकती है। काला पीलिया का उपचार 12 सप्ताह चलता है, लेकिन कोरोना के मरीज को दो सप्ताह यह दवा देकर हम उसे बचाने का प्रयास कर सकते हैं। यह दवा महंगी भी नहीं है, केंद्र सरकार ने इसे देशभर में निशुल्क उपलब्ध करवा रखा है। इसकी सप्लाई हर जगह उपलब्ध है।
उन्होंने बताया कि अहम बात यह है कि इस दवा के साइड इफेक्ट दस फीसदी से भी कम हैं। इसके साइड इफेक्ट में उल्टी, पेट दर्द, मांसपेशियों में जकड़न ही है। यह सामान्य साइड इफेक्ट हैं, जिन्हें कंट्रोल किया जा सकता है। यह दवा दिन में सिर्फ एक बार लेनी होती है। दिसंबर 2015 से यह दवा देश में उपलब्ध है।
गौरतलब है कि ईरान व यूके में इस दवा का ट्रायल भी पूरा हो चुका है। बाहर के देशों की रिसर्च में सामने आया है कि जिनको यह दवा दी गई उनका रिकवरी रेट अच्छा रहा और मृत्यु दर कम रही। इसके अलावा इस दवा को लेने वालों को अस्पताल में रुकने की कम जरूरत पड़ी।
यह है दवाएं
सोफोजब्यूविर 400 एमजी
सोफोजब्यूविर 400 एमजी प्लस वैलपातस्वीर 100 एमजी
डेक्ला सताविर 60 एमजी