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विदेशी कोच रहे तो ओलंपिक में नहीं मिलेंगे गोल्ड

Mon, 16 Nov 2015 01:56 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, रोहतक
ब्यूरो/अमर उजाला, रोहतक Updated Mon, 16 Nov 2015 01:56 AM IST
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no gold medel till foriegn coch will be in team
भारत में भले ही खिलाड़ियों को बेहतर बनाने के लिए विदेशी कोचों को बुलाया
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जा रहा हो, लेकिन महाबली सतपाल ने इसका विरोध शुरू कर दिया है। वे ओलंपिक में गोल्ड नहीं मिलने का कारण भी विदेशी कोच को मान रहे हैं। उनका कहना है कि ओलंपिक में विदेशी कोच के कारण ही पहलवान सुशील कुमार गोल्ड मेडल से चूक गए। क्योंकि देश के खिलाड़ियों का विदेशी कोचों से सामंजस्य नहीं बैठ रहा है।

 पहलवान सुशील कुमार व योगेश्वर दत्त के  कोच पद्म भूषण अवार्डी सतपाल सिंह ने एमडीयू में खास बातचीत में विदेशी कोचों को भारत में बुलाने पर विरोध जताया।

कोच ने सुशील कुमार को खिला दिया गलत खाना
रियो में 2016 में होने वाले ओलंपिक के लिए भारतीय खिलाड़ियों को तैयार किया जा रहा है। इसके लिए सरकार ने कई खेलों में विदेशी कोचों को बुलाया है और कई में बुलाने की तैयारी है। लेकिन महाबली सतपाल का कहना है कि विदेशी कोचों से खिलाड़ी तकनीक जरूर सीख सकते हैं, लेकिन केवल तकनीक के सहारे ओलंपिक में मेडल नहीं जीते जाते। खिलाड़ियों व कोच के बीच सामंजस्य बहुत जरूरी होता है।

वहीं विदेशों में खिलाड़ियों के खानपान का सबसे अधिक ध्यान रखना होता है, जिससे खिलाड़ियों के अंदर एनर्जी बनी रहे। वह इसका बड़ा उदाहरण देते हुए कहते है कि लंदन में 2012 में हुए ओलंपिक में सुशील कुमार गोल्ड मेडल जीतते, लेकिन वेट के बाद विदेशी कोच ने उनको ऐसा खाना खिला दिया, जिससे सुशील की तबीयत बिगड़ गई और उनकी एनर्जी वेस्ट होने के कारण जापान के टेटस्यूरो योनीयिस्यू से फाइनल में हार गए।

इस बार आएंगे 6 पदक
महाबली सतपाल का मानना है कि अगर सब कुछ ठीक रहा तो इस बार रियो ओलंपिक में 6 पदक आने की पूरी उम्मीद है और यह पदक सुशील कुमार, अमित दहिया, योगेश्वर दत्त, बजरंग पूनिया, बबीता फौगाट और बिनेश लेकर आ सकते हैं।

हरियाणा में दिल्ली की तरह बने अखाड़े
देश को सबसे अधिक पहलवान हरियाणा से मिले हैं और यह सिलसिला अभी जारी है। बावजूद इसके यहां के अखाड़ों में ऐसी सुविधाएं नहीं है जो दिल्ली के गुरु हनुमान अखाड़े में मौजूद हैं। पहलवान सुशील के ससुर सतपाल सिंह कहते हैं कि रोहतक, सोनीपत, झज्जर, भिवानी कई ऐसे जिले हैं, जहां से कई अच्छे पहलवान निकल सकते हैं। लेकिन प्रैक्टिस नहीं हो पाने के कारण नहीं निकल पाते हैं। इन सभी जगहों पर सरकार को दिल्ली की तर्ज पर अच्छे अखाड़े शुरू करने चाहिए। 
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