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रजिस्ट्री का फांस : अवैध एरिया बताकर निगम नहीं दे रहा एनओसी, ग्रामीण परेशान

Thu, 24 Sep 2020 02:33 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Thu, 24 Sep 2020 02:33 AM IST
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nigam did not given noc, villagers
रोहतक। नगर निगम में शामिल 9 गांवों के ग्रामीण आजकल बेहद परेशान हैं, क्योंकि रजिस्ट्री के लिए लागू किया गया नया सॉफ्टवेयर लालडोरे के बाहर की प्रॉपर्टी को अवैध बता रहा है, जबकि लालडोरे पांच दशक पहले तय हुआ था। तब से अब तक गांवों का फैलाव दोगुना हो चुका है। नगर निगम व नगर योजनाकार विभाग के अधिकारी संतोषजनक जवाब नहीं दे रहे। कह रहे हैं कि यह तो प्रदेश स्तर का मामला है। जबकि तहसील के अधिकारी बिना एनओसी रजिस्ट्री नहीं कर सकते।
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हुड्डा सरकार के कार्यकाल में 2010 में नगर परिषद को भंग करके नगर निगम का दर्जा दिया गया था। साथ ही आसपास के 9 गांवों बोहर, अस्थल बोहर, बलियाना, खेड़ी साध, पहरावर, कन्हेली, सुनारिया कलां, सुनारिया खुर्द व कुताना बस्ती को निगम में शामिल कर दिया गया था। नियमों के तहत एक्सपर्ट का कहना है कि जब गांव निगम का हिस्सा बन गए तो लालडोरा खत्म माना जाए और निगम पूरे गांव को वैैध मानकर एनओसी दे, लेकिन हकीकत में सॉफ्टवेयर के अंदर गांवों का जो प्रॉपर्टी का रिकॉार्ड भरा गया है, उसमें लालडोरे का अलग एरिया लिया गया है। जबकि उससे बाहर का अगल एरिया दिखाया गया है। हालांकि सरकार ने 2010 में गांवों के बाहर आउटर एरिया में काटी गई कॉलोनियों को वैध कर दिया था। जहां का विकास शुल्क 140 रुपये प्रति वर्ग गज तय किया गया था। बाद में 2013 में और कॉलोनी वैध की गई, इनका विकास शुल्क 440 रुपये प्रति वर्ग तय हुआ था। अब खास बात यह है कि लालडोरे व उक्त कॉलोनियों के बीच जो ग्रामीण एरिया बच गया, उसे नए सॉफ्टवेयर में अवैध दर्शाया जा रहा है।
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गांवों में लालडोरा पांच दशक पहले तय हुआ था। उसके बाद तो गांव का फैलाव दोगुना से भी ज्यादा हो चुका है। एक साल पहले सरकार ने लालडोरे के अंदर की रजिस्ट्री बंद कर दी थी। अब लालडोरे के बाहर का हिस्सा अवैध बताया जा रहा है। सरकार को चाहिए कि लालडोरे की सीमा आउटर में 5 से 6 एकड़ तक बढ़ा दी जाए, ताकि ग्रामीणों को परेशानी का सामना न करना पड़े।
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-प्रवीण कौशिक, पूर्व सरपंच पहरावर।
काफी समय पहले लालडोरा तय हुआ था। उनके गांव का काफी फैलाव हो चुका है। 30 प्रतिशत एरिया ही पुराने लालडोरे में है। बाकी का एरिया अवैध कैसे हो सकता है। जो कॉालोनी वैध की गई हैं, उनके व लालडोरे के बीच की दूरी काफी है। मेरा सवाल है कि जब गांव निगम में शामिल कर लिया गया है तो लालडोरा ही नहीं, पूर्व गांव वैध माना जाए। बेवजह ग्रामीणों को परेशान न किया जाए।
-सुरेश नांदल, पूर्व पार्षद प्रतिनिधि एवं निवासी बोहर।
गांव जिस यूनिट की प्रॉपर्टी आईडी बनी हुई है, उसे निगम प्रॉपर्टी टैक्स व विकास शुल्क जमा कराने पर एनओसी देगा। बिल्डिंग ब्रांच ही बताएगी गांव में कितना एरिया वैध है और कितना अवैध है। हालांकि निगम के सामने गांव के आउटर एरिया की जमीन अवैध बताने के मामले सामने आए हैं। इस संबंध में मुख्यालय स्तर पर ही कोई समाधान निकल सकता है।
-जगदीश चंद्र, जोनल टैक्स ऑफिसर नगर निगम।
रजिस्ट्री के लिए नगर निगम से प्रॉपर्टी टैक्स व विकास शुल्क के लिए व कंट्रोल एरिया व 7ए के तहत आने वाले एरिया में जिला नगर योजनाकार विभाग से एनओसी लेनी होती है। इसके बाद ही तहसील में रजिस्ट्री हो सकेगी।

-राजेश कुमार, तहसीलदार, रोहतक।
हर शहर का नियम 7ए के तहत सिटी प्लान तैयार किया जाता है, जिसके अंदर प्रॉपर्टी की रजिस्ट्री जिला नगर योजनाकार विभाग से लेनी होती है। नए सॉफ्टवेयर में काफी गड़बड़ी है, जल्दबाजी में शहर से 18 किलोमीटर दूर गांव रिटौली व कबूलपुर की जमीन को भी 7ए में दिखाया जा रहा है। इसके अलावा शहर के अंदर आउटर में ऐसे बहुत से हिस्से हैं, जहां कालोनी बसी हैं। उनको अवैध दिखाया जा रहा है। सरकार को रिकार्ड में सुधार करना चाहिए।
-सज्जन सिंह मलिक, प्रॉपर्टी डीलर।
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