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Rohtak News: रोहतक के पर्यटन केंद्र पर बंदरों का उत्पात
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20सीटीके05...तिलियार लेक पर उत्पात मचाते बंदर। संवाद
रोहतक। शहर का तिलियार पर्यटन केंद्र एक ऐसा पर्यटन केंद्र है, जहां पर हरियाणा ही नहीं अन्य प्रदेशों के पर्यटक भी यहां घूमने के लिए आते हैं। शनिवार और रविवार को यहां पर्यटकों का इतना जमघट हो जाता है कि अन्य पर्यटकों को एक से दो घंटे तक बोटिंग की लाइन में खड़ा होना पड़ता है। पर्यटकों के इस तरह के आनंद में बंदर जब खलल डालते हैं तो वह तिलियार पर्यटन केंद्र को छोड़कर जाना ही पसंद करते हैं।
साढ़े पांच लाख की आबादी वाले रोहतक शहर में बाहर से आने वाले लोग पर्यटन केंद्र पर घूमने जरूर जाते हैं, लेकिन यहां पर 250 से ज्यादा बंदर खुले में घूमते रहते हैं। पर्यटकों को परेशान करते हैं। उनके सामान को भी नहीं छोड़ते हैं। इस कारण पर्यटन केंद्र पर पर्यटकों का आना भी कम हुआ है। यहीं नहीं बंदर पार्किंग में खड़े हुए वाहनों की सीट तक फाड़ देते है। जिसके चलते पर्यटक यहां आना दोबारा से पसंद तक नहीं करता है। पर्यटक इसकी शिकायत तक कर चुके लेकिन तीन साल बाद भी इसका कोई समाधान नहीं हो पाया है।
लोगों से बातचीत
लोग बोले-बंदरों के झुंड के आगे पर्यटक रहते हैं विवश
झील पर पर्यटक एक जगह पर बैठ जाएं तो उसी समय वहां बंदरों का झुंड आ जाता है और उनसे सामान छीनने लगता है। झुंड के आगे लोग विवश दिखाई देते हैं। इसके चलते सैर के लिए आए लोगों को वहां से मायूस होकर लौटना पड़ता है।
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-अनिल मलिक, पर्यटक
दिन में 10 घंटे दुकान खोली जाती है। इनमें से ढाई घंटे तो बंदरों को भगाने में ही लग जाते है। बंदर दुकान से बर्गर, गोलगप्पे व अन्य सामान को उठाकर भाग जाते है। इसके कारण छोटे बच्चे खेलने से भी डरते है। अगर कोई पर्यटक बंदरों को भगाता भी है तो बंदर उन्हें काटने के लिए दौड़ पड़ता है।
-शिव यादव, दुकानदार
परिवार के साथ घूमने के लिए आया हुआ था, लेकिन बंदरों के डर से घूमने का मन नहीं कर रहा है। दुकान से लेकर चिप्स लेकर खा रहा था। इसी बीच पीछे से बंदर ने झप्ट्टा मारकर छीन लिया। बंदरों के डर के कारण दोबारा तिलियार पर नहीं आऊंगा।
-विशु, पर्यटक
वर्जन
बंदरों को भगाने के लिए निगम के अफसरों से शिकायत की गई थी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हो सकी। बंदरों को भगाने के लिए लंगूर भी रखा गया था, लेकिन मिनी जू वालों ने उसे नहीं रखने दिया। बंदरों को पकड़वाने के लिए पूरे प्रयास किए जाएंगे। पर्यटकों को परेशान नहीं होने दिया जाएगा।
-संदीप मैनेजर, तिलियार पर्यटन केंद्र
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साढ़े पांच लाख की आबादी वाले रोहतक शहर में बाहर से आने वाले लोग पर्यटन केंद्र पर घूमने जरूर जाते हैं, लेकिन यहां पर 250 से ज्यादा बंदर खुले में घूमते रहते हैं। पर्यटकों को परेशान करते हैं। उनके सामान को भी नहीं छोड़ते हैं। इस कारण पर्यटन केंद्र पर पर्यटकों का आना भी कम हुआ है। यहीं नहीं बंदर पार्किंग में खड़े हुए वाहनों की सीट तक फाड़ देते है। जिसके चलते पर्यटक यहां आना दोबारा से पसंद तक नहीं करता है। पर्यटक इसकी शिकायत तक कर चुके लेकिन तीन साल बाद भी इसका कोई समाधान नहीं हो पाया है।
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लोगों से बातचीत
लोग बोले-बंदरों के झुंड के आगे पर्यटक रहते हैं विवश
झील पर पर्यटक एक जगह पर बैठ जाएं तो उसी समय वहां बंदरों का झुंड आ जाता है और उनसे सामान छीनने लगता है। झुंड के आगे लोग विवश दिखाई देते हैं। इसके चलते सैर के लिए आए लोगों को वहां से मायूस होकर लौटना पड़ता है।
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-अनिल मलिक, पर्यटक
दिन में 10 घंटे दुकान खोली जाती है। इनमें से ढाई घंटे तो बंदरों को भगाने में ही लग जाते है। बंदर दुकान से बर्गर, गोलगप्पे व अन्य सामान को उठाकर भाग जाते है। इसके कारण छोटे बच्चे खेलने से भी डरते है। अगर कोई पर्यटक बंदरों को भगाता भी है तो बंदर उन्हें काटने के लिए दौड़ पड़ता है।
-शिव यादव, दुकानदार
परिवार के साथ घूमने के लिए आया हुआ था, लेकिन बंदरों के डर से घूमने का मन नहीं कर रहा है। दुकान से लेकर चिप्स लेकर खा रहा था। इसी बीच पीछे से बंदर ने झप्ट्टा मारकर छीन लिया। बंदरों के डर के कारण दोबारा तिलियार पर नहीं आऊंगा।
-विशु, पर्यटक
वर्जन
बंदरों को भगाने के लिए निगम के अफसरों से शिकायत की गई थी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हो सकी। बंदरों को भगाने के लिए लंगूर भी रखा गया था, लेकिन मिनी जू वालों ने उसे नहीं रखने दिया। बंदरों को पकड़वाने के लिए पूरे प्रयास किए जाएंगे। पर्यटकों को परेशान नहीं होने दिया जाएगा।
-संदीप मैनेजर, तिलियार पर्यटन केंद्र