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Rohtak News: तीमारदार को भी मरीज बना रहे बंदर
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30सीटीके01...नागरिक अस्पताल में उत्पाद मचाते बंदर। संवाद
रोहतक। नागरिक अस्पताल परिसर में बंदरों के उत्पात से तीमारदार और मरीजों के साथ अस्पताल का स्टाफ भी परेशान हैं। मरीज घर से कुछ खाद्य सामग्री लेकर आते हैं तो बंदर झपटकर ले जाते हैं। इससे मरीज दहशत में हैं।
बंदर कार्ड के काउंटर और औषधालय केंद्र पर दिन भर डटे रहते हैं। कई बार यह अस्पताल के अंदर भी घुस जाते हैं। इनको भगाने में स्टाफ भी परेशान हो जाता है। बीते माह से अब तक तीन से चार तीमारदारों को बंदर काट भी चुके हैं। तीमारदार मरीज की जांच कराने आए थे लेकिन बंदर के काटने से स्वयं मरीज बन गए। जिन्हें एंटी रेबीज इंजेक्शन लगाया गया।
बीते दिनों अस्पताल प्रशासन ने नगर निगम को पत्र लिखकर इसकी सूचना भी दी है। बंदरों का उत्पात इस कदर है कि अस्पताल में चाय बिस्किट खाना या बैग आदि ले जाना मुश्किल हो गया है। बंदर हमेशा झपटने को तैयार रहते हैं। औषधालय से दवा ले जा रहे मरीजों को खाद्य पदार्थ समझकर भी कई बार बंदर झपट्टा भी मरीज मार जाते हैं। अस्पताल स्टाफ ने बताया कि यह अब हमेशा का हो गया है। निगम कर्मियों इन्हें पकड़ने के बाद कुछ दिन राहत रहती है। फिर दोबारा से यह आ धमकते हैं।
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दूर-दराज से आने वाले मरीजों को होती है ज्यादा परेशानी
दूर-दराज से आने वाले सामान्य मरीजों और गर्भवतियों को ज्यादा परेशानी होती है। बच्चों पर इनके झपटने का भी खतरा रहता है। दूर दराज से आने वाले मरीज सुबह-सुबह आ जाते हैं। वह साथ में खाने-पीने का सामान भी लेकर आते हैं। जो बच्चों को साथ आता है वह तो कुछ न कुछ बैग में खाने का सामान रखकर ही लाता है। बंदरों से अनभिज्ञ लोग कई बार अस्पताल परिसर में कुछ आहार लेने लगते हैं। इस मौके की तलाश कर रहे बंदर झपटमार जाते हैं। चीजें नहीं देने पर काट लेते हैं।
वर्जन
बंदरों के उत्पात से वाकिफ हैं। नगर निगम को पत्र भी लिखी गई है। वह आते भी हैं। इसके बाद बंदरों को पकड़कर चले भी जाते हैं, लेकिन बंदर न जाने कहां से फिर चले आते हैं। यह हो सकता है बंदरों को आसपास के ही जंगल में ही छोड़ दिया जाता हो। शायद इसलिए बंदर यहां दोबारा से चले आते हैं।
-डॉ. पुष्पेंद्र, चिकित्सा अधीक्षक, नागरिक अस्पताल
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बंदर कार्ड के काउंटर और औषधालय केंद्र पर दिन भर डटे रहते हैं। कई बार यह अस्पताल के अंदर भी घुस जाते हैं। इनको भगाने में स्टाफ भी परेशान हो जाता है। बीते माह से अब तक तीन से चार तीमारदारों को बंदर काट भी चुके हैं। तीमारदार मरीज की जांच कराने आए थे लेकिन बंदर के काटने से स्वयं मरीज बन गए। जिन्हें एंटी रेबीज इंजेक्शन लगाया गया।
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बीते दिनों अस्पताल प्रशासन ने नगर निगम को पत्र लिखकर इसकी सूचना भी दी है। बंदरों का उत्पात इस कदर है कि अस्पताल में चाय बिस्किट खाना या बैग आदि ले जाना मुश्किल हो गया है। बंदर हमेशा झपटने को तैयार रहते हैं। औषधालय से दवा ले जा रहे मरीजों को खाद्य पदार्थ समझकर भी कई बार बंदर झपट्टा भी मरीज मार जाते हैं। अस्पताल स्टाफ ने बताया कि यह अब हमेशा का हो गया है। निगम कर्मियों इन्हें पकड़ने के बाद कुछ दिन राहत रहती है। फिर दोबारा से यह आ धमकते हैं।
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दूर-दराज से आने वाले मरीजों को होती है ज्यादा परेशानी
दूर-दराज से आने वाले सामान्य मरीजों और गर्भवतियों को ज्यादा परेशानी होती है। बच्चों पर इनके झपटने का भी खतरा रहता है। दूर दराज से आने वाले मरीज सुबह-सुबह आ जाते हैं। वह साथ में खाने-पीने का सामान भी लेकर आते हैं। जो बच्चों को साथ आता है वह तो कुछ न कुछ बैग में खाने का सामान रखकर ही लाता है। बंदरों से अनभिज्ञ लोग कई बार अस्पताल परिसर में कुछ आहार लेने लगते हैं। इस मौके की तलाश कर रहे बंदर झपटमार जाते हैं। चीजें नहीं देने पर काट लेते हैं।
वर्जन
बंदरों के उत्पात से वाकिफ हैं। नगर निगम को पत्र भी लिखी गई है। वह आते भी हैं। इसके बाद बंदरों को पकड़कर चले भी जाते हैं, लेकिन बंदर न जाने कहां से फिर चले आते हैं। यह हो सकता है बंदरों को आसपास के ही जंगल में ही छोड़ दिया जाता हो। शायद इसलिए बंदर यहां दोबारा से चले आते हैं।
-डॉ. पुष्पेंद्र, चिकित्सा अधीक्षक, नागरिक अस्पताल

30सीटीके01...नागरिक अस्पताल में उत्पाद मचाते बंदर। संवाद