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Rohtak News: जिस संस्था में पढ़ीं, अब उसी की निशुल्क बस चला रहीं मीना
Sun, 19 Oct 2025 01:58 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, रोहतक
संवाद न्यूज एजेंसी, रोहतक
Updated Sun, 19 Oct 2025 01:58 AM IST
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24...बच्चों को निशुल्क पढ़ाने वाली एमटीएफसी संस्था की बस चलाती मीना। संवाद
संवाद न्यूज एजेंसी
रोहतक। जोश और जज्बा हो तो हर मुश्किल आसान हो जाती है। इसकी एक बानगी है रोहतक की एकता काॅलोनी निवासी मीना हुड्डा। मीना ने जिस सामाजिक संस्था में निशुल्क पढ़ाई की, अब उसी की 52 सीटर बस चला रही हैं। इसके लिए वह किसी तरह को कोई शुल्क भी नहीं ले रही हैं। इसके लिए मीना ने वर्ष 2019 में मीना ने रोडवेज से बस चलाने का प्रशिक्षण लिया था।
मेक दा फ्यूचर ऑफ कंट्री यानी एमटीएफसी संस्था की पूर्व छात्रा एवं कोर टीम की सदस्य मीना अब दूसरी लड़कियों के लिए भी प्रेरणा स्रोत बनी हैं। 2011 में मीना ने एमटीएफसी संस्था में 12वीं कक्षा के लिए दाखिला लिया था। मीना बताती हैं कि यहां के सेवाकार्यों से प्रभावित होकर ही वह स्वयंसेविका बन गईं। उनकी मेहनत को देखते हुए उन्हें संस्था ने उनको टीम सदस्य बना लिया।
2018 में उन्होंने रोडवेज से 35 दिन तक बस चलाने का प्रशिक्षण लिया था। प्रशिक्षण का उद्देश्य जीविका चलाना नहीं था। मीना अब उन बच्चों को बस के माध्यम से लाती व वापस छोड़ती हैं जो अशिक्षा के दलदल में फंसे थे। मीना का यह कार्य अब उनकी दिनचर्या का मुख्य हिस्सा है। लोग बस चलाते हुए देखकर हैरानी जताते हैं।
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रोहतक। जोश और जज्बा हो तो हर मुश्किल आसान हो जाती है। इसकी एक बानगी है रोहतक की एकता काॅलोनी निवासी मीना हुड्डा। मीना ने जिस सामाजिक संस्था में निशुल्क पढ़ाई की, अब उसी की 52 सीटर बस चला रही हैं। इसके लिए वह किसी तरह को कोई शुल्क भी नहीं ले रही हैं। इसके लिए मीना ने वर्ष 2019 में मीना ने रोडवेज से बस चलाने का प्रशिक्षण लिया था।
मेक दा फ्यूचर ऑफ कंट्री यानी एमटीएफसी संस्था की पूर्व छात्रा एवं कोर टीम की सदस्य मीना अब दूसरी लड़कियों के लिए भी प्रेरणा स्रोत बनी हैं। 2011 में मीना ने एमटीएफसी संस्था में 12वीं कक्षा के लिए दाखिला लिया था। मीना बताती हैं कि यहां के सेवाकार्यों से प्रभावित होकर ही वह स्वयंसेविका बन गईं। उनकी मेहनत को देखते हुए उन्हें संस्था ने उनको टीम सदस्य बना लिया।
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2018 में उन्होंने रोडवेज से 35 दिन तक बस चलाने का प्रशिक्षण लिया था। प्रशिक्षण का उद्देश्य जीविका चलाना नहीं था। मीना अब उन बच्चों को बस के माध्यम से लाती व वापस छोड़ती हैं जो अशिक्षा के दलदल में फंसे थे। मीना का यह कार्य अब उनकी दिनचर्या का मुख्य हिस्सा है। लोग बस चलाते हुए देखकर हैरानी जताते हैं।
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