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‘शहर की सरकार’ बनने के लिए अब हर कोई ठोक सकेगा ताल

Fri, 16 Dec 2016 02:56 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, रोहतक
ब्यूरो/अमर उजाला, रोहतक Updated Fri, 16 Dec 2016 02:56 AM IST
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रोहतक मेयर की सीट को अनुसूचित जाति महिला आरक्षित से हटाकर सामान्य श्रेणी में किया गया - फोटो : demo pic
इस बार नगर निगम चुनाव में शहर की सरकार यानी मेयर की कुर्सी की दौड़ के लिए महिला-पुरुष, सामान्य-अनुसूचित जाति हर कोई प्रत्याशी बन सकेगा। मेयर की सीट को अनुसूचित जाति महिला आरक्षित से हटाकर सामान्य श्रेणी में कर दिया गया है।
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रोहतक में साल 2013 से पहले तक नगर पालिका चलती थी। नगर निगम बनाने के बाद साल 2013 में पहला चुनाव कराया गया। उस समय मेयर की कुर्सी को अनुसूचित जाति महिला के लिए आरक्षित कर दिया गया था। उस चुनाव में कांग्रेस के पार्षद ज्यादा जीतने के बाद मेयर की कुर्सी को लेकर जद्दोजहद शुरू हो गई थी। इसमें पूर्व सीएम हुड्डा की मंजूरी मिलने से रेनू डाबला ने बाजी मारी और वह रोहतक नगर निगम की पहली मेयर बन गईं। क्योंकि अनुसूचित जाति की महिला मेयर बनने की दौड़ में रेनू डाबला को मात देने के लिए कोई नहीं था। इस तरह सीट के अनुसूचित जाति महिला के लिए आरक्षित होने से कई पार्षदों का मेयर बनने का सपना चकनाचूर हो गया था। उन पार्षदों को सपना इस बार पूरा होता दिख रहा है, क्योंकि इस बार मेयर की सीट को सामान्य श्रेणी में कर दिया गया है।
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इस बारे में अभी कोई जानकारी नहीं दी गई है। यह सरकार का फैसला होता है कि मेयर की सीट को किसके लिए आरक्षित किया जाए और किसके लिए नहीं। वहीं चुनाव जीतकर जिसको पार्षद मेयर बनाना चाहेंगे, वह मेयर बनेगा।
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 रेनू डाबला, मेयर नगर निगम

यह काफी अच्छा हुआ है, क्योंकि अब कोई भी मेयर की कुर्सी के लिए आगे का सकता है। ऐसा नहीं होगा कि कुछ चुनिंदा लोगों में मेयर चुना जाएगा। बल्कि कोई भी पार्षद चुनाव जीतकर मेयर बन सकता है और जिसको पार्षद बेहतर मानते होंगे, वह मेयर बन जाएगा। अशोक खुराना, पार्षद वार्ड 10

मेयर की कुर्सी अधिकतर उसको ही मिलती है, जिसकी सरकार होती है। लेकिन अब यह जरूर है कि कोई भी मेयर की कुर्सी के लिए दावा कर सकता है और चुनाव में उतर सकता है। यह पार्षदों पर तय करता है कि वह किसको मेयर बनाए। अब पार्षदों के सामने केवल चंद लोग ही मेयर बनने के लिए नहीं होंगे।

नीरा भटनागर, पार्षद वार्ड 14

सामान्य श्रेणी में सीट आने से यह फायदा जरूर होगा कि जिस किसी की मेयर का चुनाव लड़ने की इच्छा होगी, वह अपना दावा पेश कर सकेगा। लेकिन वही मेयर बन सकेगा जो जनता का काम करता होगा और पार्षदों के बीच में उसकी अच्छी छवि होगी।
बलराज बल्लू, पार्षद वार्ड 9
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