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Rohtak News: तोलोलिंग टाॅप पर दुश्मन से लड़ते बलिदान हुए थे जसवीर राठी
Sun, 20 Jul 2025 09:01 PM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, रोहतक
संवाद न्यूज एजेंसी, रोहतक
Updated Sun, 20 Jul 2025 09:01 PM IST
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शहीद जसबीर सिंह
महम। राजपूताना राइफल्स की दूसरी बटालियन सेकंड राज राइफल में लांस नायक रहे सीसर खास के वीर सपूत जसवीर सिंह राठी कारगिल द्रास सेक्टर में तोलोलिंग टॉप पर दुश्मन से मुकाबला करते बलिदान हुए थे। तब उनकी पत्नी सुनीता डेढ़ माह की गर्भवती थीं। आज उनका बेटा अजय 26 साल का है और जसवीर राठी को बलिदान हुए भी इतना ही समय हो गया है।
बलिदानी जसवीर राठी की पत्नी सुनीता आज भी शहादत का वह पल याद कर भावुक हो जाती हैं। सुनीता बताती हैं 13 जून 1999 को उनके पति कारगिल में युद्ध लड़ते बलिदान हुए थे। 15 जून को एक सैनिक ने ताऊ धूप सिंह के घर आकर बलिदान की सूचना दी थी। इसके तीन दिन बाद 18 जून को पति का पार्थिव शरीर घर लाया गया था।
सुनीता बताती हैं पति जसवीर राठी 26 अप्रैल 1990 को सेकंड राज राइफल में बतौर सिपाही भर्ती हुए थे। उनकी शादी को अभी चार साल ही हुए थे। पति की शहादत के समय वह डेढ़ माह की गर्भवती थीं। बेटे अजय का जन्म हुआ तो नए सिरे से जीवन की शुरुआत की। तय किया कि वह कहीं और शादी न करके अपने बेटे व सास ससुर की सेवा करेंगी। सुनीता ने बेटे अजय के पालन पोषण की जिम्मेदारी खुद संभाली। उसे पढ़ा लिखाकर काबिल बनाया। आज बेटा हरियाणा सिंचाई विभाग में लिपिक है।
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महज 25 साल की उम्र में बलिदान हुए थे जसवीर
सीसर खास निवासी सूरजमल व रामप्यारी के घर 10 फरवरी 1972 को जसवीर राठी का जन्म हुआ था। बलिदान के समय जसवीर की उम्र महज 25 साल थी। जसवीर की बहन राकेश, भाई वीरेंद्र, मां रामप्यारी व पत्नी सुनीता को बलिदान की सूचना का वह क्षण अब भी याद है। खबर मिलते ही हर तरफ सन्नाटा पसर गया था। गांव में जसवीर का स्मारक स्थल बनाया गया है। यहां शहीद की प्रतिमा स्थापित है। शहीदी दिवस पर हर वर्ष परिवार व ग्रामीण उन्हें श्रद्धांजलि देते हैं।
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बलिदानी जसवीर राठी की पत्नी सुनीता आज भी शहादत का वह पल याद कर भावुक हो जाती हैं। सुनीता बताती हैं 13 जून 1999 को उनके पति कारगिल में युद्ध लड़ते बलिदान हुए थे। 15 जून को एक सैनिक ने ताऊ धूप सिंह के घर आकर बलिदान की सूचना दी थी। इसके तीन दिन बाद 18 जून को पति का पार्थिव शरीर घर लाया गया था।
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सुनीता बताती हैं पति जसवीर राठी 26 अप्रैल 1990 को सेकंड राज राइफल में बतौर सिपाही भर्ती हुए थे। उनकी शादी को अभी चार साल ही हुए थे। पति की शहादत के समय वह डेढ़ माह की गर्भवती थीं। बेटे अजय का जन्म हुआ तो नए सिरे से जीवन की शुरुआत की। तय किया कि वह कहीं और शादी न करके अपने बेटे व सास ससुर की सेवा करेंगी। सुनीता ने बेटे अजय के पालन पोषण की जिम्मेदारी खुद संभाली। उसे पढ़ा लिखाकर काबिल बनाया। आज बेटा हरियाणा सिंचाई विभाग में लिपिक है।
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महज 25 साल की उम्र में बलिदान हुए थे जसवीर
सीसर खास निवासी सूरजमल व रामप्यारी के घर 10 फरवरी 1972 को जसवीर राठी का जन्म हुआ था। बलिदान के समय जसवीर की उम्र महज 25 साल थी। जसवीर की बहन राकेश, भाई वीरेंद्र, मां रामप्यारी व पत्नी सुनीता को बलिदान की सूचना का वह क्षण अब भी याद है। खबर मिलते ही हर तरफ सन्नाटा पसर गया था। गांव में जसवीर का स्मारक स्थल बनाया गया है। यहां शहीद की प्रतिमा स्थापित है। शहीदी दिवस पर हर वर्ष परिवार व ग्रामीण उन्हें श्रद्धांजलि देते हैं।

शहीद जसबीर सिंह

शहीद जसबीर सिंह

शहीद जसबीर सिंह