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जेल भरें या लगाएं जाम, जाट आज लेंगे फैसला
ब्यूरो/अमर उजाला,रोहतक
Updated Thu, 17 Mar 2016 02:42 AM IST
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हिसार रोड़ स्थित अठगामा भवन में जाटों की बैठक
- फोटो : file photo
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आरक्षण जल्द लागू करने और पिछले आंदोलन में दर्ज केस वापस लेने की मांग पर जाटों का अल्टीमेटम बृहस्पतिवार आधी रात को खत्म हो जाएगा। जाटों ने दोबारा से आंदोलन शुरू करने की चेतावनी दी है। लेकिन इस बार सड़क और रेलमार्ग को जाम करने की जगह जेल भरो आंदोलन छेड़ा जा सकता है। खाप प्रधान, जाट संघर्ष समिति के नेता और युवाओं के बीच इसे लेकर मंथन चल रहा है। बुधवार को हिसार रोड पर अठगामा भवन में हुई बैठक में सभी ने यह बात रखी। लेकिन आंदोलन की रणनीति और तरीके पर अंतिम फैसला बृहस्पतिवार को जाट भवन में लिया जाएगा।
यहां फिर से खापों, जाट नेताओं व युवाओं को बुलाया गया है। हां, इतनी सहमति जरूर बनी कि आंदोलन भले ही किसी भी तरह चले, लेकिन इसे शांतिपूर्ण तरीके से चलाया जाएगा। इससे पहले, बुधवार सुबह अठगामा भवन में मेजर मेहर सिंह की अध्यक्षता में खाप प्रधानों, जाट संघर्ष समितियों के नेताओं व युवा नेताओं की पंचायत हुई। सीटीएम कैप्टन मनोज खत्री व तहसीलदार गुलाब सिंह भी बातचीत करने पहुंचे। दोनों अधिकारी पंचायत के बीच में बैठकर बातचीत करने लगे। पंचायत में अधिकारियों के सामने कहा गया कि हॉस्टलों में जाकर छात्रों की पिटाई करने वाले पुलिस कर्मियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करके गिरफ्तारी की जाए।
माल व जान में किसी तरह का भेदभाव नहीं किया जाए और जिस तरह से नुकसान होने वालों को मुआवजा दिया जा रहा है, उसी तरह मरने वालों को मुआवजा दिया जाए। आंदोलन के दौरान दर्ज हुए सभी मुकदमों को खत्म किया जाना चाहिए। सीटीएम ने कहा कि उनकी सभी मांगों पर विचार चल रहा है और किसी भी निर्दोष को नहीं पकड़ा जाएगा। वहीं आरक्षण बिल भी जल्द रखा जाएगा। सरकार इस पर काम कर रही है। उन्होंने कहा कि जिस तरह से 72 घंटे का अल्टीमेटम दिया गया है, उसमें आंदोलन कर सकते हैं। लेकिन किसी तरह का उपद्रव नहीं होना चाहिए। इसे रोकने की जिम्मेदारी पुलिस-प्रशासन और समाज के सभी लोगों की है। इसके बाद पंचायत में मौजूद सभी लोगों ने कहा कि कुछ देर वे आपस में बातचीत करना चाहते हैं।
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अधिकारी उनका ज्ञापन लेने के लिए बाहर बैठकर इंतजार कर सकते हैं। इस पर सीटीएम और तहसीलदार बाहर आकर बैठ गए, लेकिन कई घंटों तक अंदर पंचायत होती रही। काफी देर इंतजार के बाद सीटीएम व तहसीलदार ने उनसे पुलिस व प्रशासन का सहयोग करने की अपील की और वहां से चल दिए। पंचायत में भी आंदोलन को लेकर कोई फैसला नहीं हो सका। केवल यह कहा गया कि आंदोलन किसी भी तरह से चलाया जाए, लेकिन वह शांतिपूर्ण होगा। आंदोलन किस तरह का होगा, यह जाट भवन में तय होगा। भवन में सुबह 11 बजे सभी खापों के प्रधान, जाट संघर्ष समितियों के नेता व युवाओं को बुलाया गया है।
पंचायत में अठगामा प्रधान आनंद सिंह, 84 खाप प्रधान हरदीप अहलावत, ग्रेवाल खाप से तुलसी ग्रेवाल, दहिया खाप से सुरेंद्र दहिया, सरोहा खाप से रणदीप सरोहा, कादियान खाप से केदार कादियान, इनसो के प्रदेशाध्यक्ष प्रदीप देशवाल, संघर्ष समिति से रामफल हुड्डा, कैप्टन राजेंद्र सिंह, महासिंह देशवाल, प्रो. आत्मानंद देशवाल, राजेंद्र तोमर, जलकरण बल्हारा, दिलावर सिंह, ओमप्रकाश, दीपक मलिक, चिंटू प्रधान, जयपाल मलिक और ऋषिपाल मौजूद रहे।
अध्यक्ष बनाने को लेकर नोकझोंक
पंचायत में कहा गया कि जिस जगह पंचायत होती है, अध्यक्ष भी वहां का बनाया जाता है। अठगामा के प्रधान आनंद सिंह की अध्यक्षता में पंचायत होनी चाहिए थी। इसको लेकर वहां गहमागहमी शुरू हो गई और नोकझोंक भी हुई। लेकिन कुछ देर बाद ही माहौल शांत हो गया और पंचायत दोबारा से शुरू की गई।
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यहां फिर से खापों, जाट नेताओं व युवाओं को बुलाया गया है। हां, इतनी सहमति जरूर बनी कि आंदोलन भले ही किसी भी तरह चले, लेकिन इसे शांतिपूर्ण तरीके से चलाया जाएगा। इससे पहले, बुधवार सुबह अठगामा भवन में मेजर मेहर सिंह की अध्यक्षता में खाप प्रधानों, जाट संघर्ष समितियों के नेताओं व युवा नेताओं की पंचायत हुई। सीटीएम कैप्टन मनोज खत्री व तहसीलदार गुलाब सिंह भी बातचीत करने पहुंचे। दोनों अधिकारी पंचायत के बीच में बैठकर बातचीत करने लगे। पंचायत में अधिकारियों के सामने कहा गया कि हॉस्टलों में जाकर छात्रों की पिटाई करने वाले पुलिस कर्मियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करके गिरफ्तारी की जाए।
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माल व जान में किसी तरह का भेदभाव नहीं किया जाए और जिस तरह से नुकसान होने वालों को मुआवजा दिया जा रहा है, उसी तरह मरने वालों को मुआवजा दिया जाए। आंदोलन के दौरान दर्ज हुए सभी मुकदमों को खत्म किया जाना चाहिए। सीटीएम ने कहा कि उनकी सभी मांगों पर विचार चल रहा है और किसी भी निर्दोष को नहीं पकड़ा जाएगा। वहीं आरक्षण बिल भी जल्द रखा जाएगा। सरकार इस पर काम कर रही है। उन्होंने कहा कि जिस तरह से 72 घंटे का अल्टीमेटम दिया गया है, उसमें आंदोलन कर सकते हैं। लेकिन किसी तरह का उपद्रव नहीं होना चाहिए। इसे रोकने की जिम्मेदारी पुलिस-प्रशासन और समाज के सभी लोगों की है। इसके बाद पंचायत में मौजूद सभी लोगों ने कहा कि कुछ देर वे आपस में बातचीत करना चाहते हैं।
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अधिकारी उनका ज्ञापन लेने के लिए बाहर बैठकर इंतजार कर सकते हैं। इस पर सीटीएम और तहसीलदार बाहर आकर बैठ गए, लेकिन कई घंटों तक अंदर पंचायत होती रही। काफी देर इंतजार के बाद सीटीएम व तहसीलदार ने उनसे पुलिस व प्रशासन का सहयोग करने की अपील की और वहां से चल दिए। पंचायत में भी आंदोलन को लेकर कोई फैसला नहीं हो सका। केवल यह कहा गया कि आंदोलन किसी भी तरह से चलाया जाए, लेकिन वह शांतिपूर्ण होगा। आंदोलन किस तरह का होगा, यह जाट भवन में तय होगा। भवन में सुबह 11 बजे सभी खापों के प्रधान, जाट संघर्ष समितियों के नेता व युवाओं को बुलाया गया है।
पंचायत में अठगामा प्रधान आनंद सिंह, 84 खाप प्रधान हरदीप अहलावत, ग्रेवाल खाप से तुलसी ग्रेवाल, दहिया खाप से सुरेंद्र दहिया, सरोहा खाप से रणदीप सरोहा, कादियान खाप से केदार कादियान, इनसो के प्रदेशाध्यक्ष प्रदीप देशवाल, संघर्ष समिति से रामफल हुड्डा, कैप्टन राजेंद्र सिंह, महासिंह देशवाल, प्रो. आत्मानंद देशवाल, राजेंद्र तोमर, जलकरण बल्हारा, दिलावर सिंह, ओमप्रकाश, दीपक मलिक, चिंटू प्रधान, जयपाल मलिक और ऋषिपाल मौजूद रहे।
अध्यक्ष बनाने को लेकर नोकझोंक
पंचायत में कहा गया कि जिस जगह पंचायत होती है, अध्यक्ष भी वहां का बनाया जाता है। अठगामा के प्रधान आनंद सिंह की अध्यक्षता में पंचायत होनी चाहिए थी। इसको लेकर वहां गहमागहमी शुरू हो गई और नोकझोंक भी हुई। लेकिन कुछ देर बाद ही माहौल शांत हो गया और पंचायत दोबारा से शुरू की गई।