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Rohtak News: आईआईएम रोहतक ने अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में दुबई के साथ की सह-मेजबानी
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दुबई में आयोजित कार्यक्रम में आईआईएम के निदेशक प्रो. धीरज शर्मा को सम्मानित करते आयोजक।विज्ञप्
रोहतक। आईआईएम रोहतक ने एकेडमी फॉर ग्लोबल बिजनेस एडवांसमेंट अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में दुबई के साथ सह-मेजबानी की है। यहां एजीबीए की 19वीं विश्व कांग्रेस 20 से 22 मई तक दुबई में आयोजित हुई। इसमें शोधकर्ता 32 देश शामिल रहे, इन्होंने ''एक वैश्वीकृत और डिजिटल युग में व्यवसाय और उद्यमिता विकास'' पर 250 से अधिक पत्र प्रस्तुत किए। यह जानकारी निदेशक भारतीय प्रबंधन संस्थान रोहतक प्रो. धीरज शर्मा ने दी।
प्रो. धीरज ने बताया कि सम्मेलन में सम्मानित अतिथि के रूप में वी मुरलीधरन राज्य मंत्री विदेश मंत्रालय रहे। उन्होंने कार्यक्रम में बताया कि हमने उन चुनौतियों को देखा है, जिन्होंने दुनिया को मौलिक रूप से बदल दिया। कोविड में भारत ने 100 से अधिक देशों को लाखों टीके उपलब्ध कराए। अगले 25 वर्षों में भारत सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में से एक बना रहेगा, यह भारतीय युवाओं की उद्यमशीलता की प्रवृत्ति पर फल-फूल रहा है। भारत की जी 20 की अध्यक्षता काफी महत्वपूर्ण रही है। पीएम की अध्यक्षता में वॉइस ऑफ ग्लोबल साउथ समिट ने एकता और उद्देश्य की एकता पर प्रकाश डाला है। जी-20 की भारतीय अध्यक्षता के दौरान अफ्रीकी देशों की भागीदारी सबसे अधिक थी।
इन -इन विषयों पर शोध पत्र प्रस्तुत किए गए
आईआईएम रोहतक की ओर से दुबई के विद्वानों, शिक्षाविदों और व्यापारिक समुदाय को बताया कि दुनिया के प्रबंधन विद्वानों को खाद्यान्न संकट जैसी प्रासंगिक और समयबद्ध समस्याओं की जांच करने की आवश्यकता है। वैश्विक व्यापार के लिए वैकल्पिक व्यापार मार्गों को देखना चाहिए कि वैश्विक आपूर्ति शृंखला को कैसे सुगम बनाया जाए। सम्मेलन में व्यापार और उद्यमिता विकास पर अनुसंधान से संबंधित विभिन्न विषयों पर कई संकाय विकास कार्यशालाएं भी आयोजित की गईं। इसमें नवाचार प्रबंधन, आईटी क्षमताओं, स्वास्थ्य देखभाल, साइबर सुरक्षा, उपभोक्ता व्यवहार और स्थिरता जैसे विषयों पर शोध पत्रों की विस्तृत किस्में प्रस्तुत की गईं।दो प्रमुख पैनलों पर हुई चर्चा
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सम्मेलन में ''वैश्विक आर्थिक स्थिरता बनाने में जी 20 की भूमिका'' व ''वीयूसीए दुनिया में वैश्विक संबंधों को मजबूत करने के लिए क्षेत्रीय सहयोग'' दो विषयों पर चर्चा हुई। पैनल एक की अध्यक्षता आईआईएम रोहतक के निदेशक ने की। प्रो. धीरज शर्मा ने बताया कि भारत ने शीर्ष श्रेणी के बिजनेस लीडर तैयार करके वैश्विक व्यापार में योगदान दिया है। सम्मेलन निकाय इस बात पर आम सहमति पर पहुंचा कि भारत को पारंपरिक भारतीय ज्ञान के माध्यम से बढ़ते वैश्विक संघर्षों के प्रबंधन में एक महत्वपूर्ण और सक्रिय भूमिका निभानी होगी।
दूसरे पैनल चर्चा का विषय था ''वीयूसीए दुनिया में वैश्विक संबंधों को मजबूत करने के लिए क्षेत्रीय सहयोग'' था। पैनलिस्टों में खलीफा यूनिवर्सिटी ऑफ साइंस के प्रोफेसर ग्लेन मस्कर्ट, प्रोफेसर मेलडेङा स्टीफेंस, प्रोफेसर ऑफ़ इनोवेशन, मुहम्मद बिन रशीद स्कूल ऑफ़ गवर्नमेंट और प्रोफ. मक्सिमे जफर, असिस्टेंट प्रोफेसर, यूएई यूनिवर्सिटी आदि शामिल रहे।
इनकी रही उपस्थिति
यूएसए, भारत, इंडोनेशिया, यूएई, अफगानिस्तान, थाईलैंड, केन्या, ताइवान, श्रीलंका, कतर, बांग्लादेश, फिनलैंड, वियतनाम, पाकिस्तान, मलेशिया, जॉर्डन, इराक, तुर्की, लेबनान, दक्षिण अफ्रीका, मिस्र , न्यूजीलैंड, युगांडा, कजाकिस्तान, सऊदी अरब, यूके, ओमान नाइजीरिया आदि।
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प्रो. धीरज ने बताया कि सम्मेलन में सम्मानित अतिथि के रूप में वी मुरलीधरन राज्य मंत्री विदेश मंत्रालय रहे। उन्होंने कार्यक्रम में बताया कि हमने उन चुनौतियों को देखा है, जिन्होंने दुनिया को मौलिक रूप से बदल दिया। कोविड में भारत ने 100 से अधिक देशों को लाखों टीके उपलब्ध कराए। अगले 25 वर्षों में भारत सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में से एक बना रहेगा, यह भारतीय युवाओं की उद्यमशीलता की प्रवृत्ति पर फल-फूल रहा है। भारत की जी 20 की अध्यक्षता काफी महत्वपूर्ण रही है। पीएम की अध्यक्षता में वॉइस ऑफ ग्लोबल साउथ समिट ने एकता और उद्देश्य की एकता पर प्रकाश डाला है। जी-20 की भारतीय अध्यक्षता के दौरान अफ्रीकी देशों की भागीदारी सबसे अधिक थी।
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इन -इन विषयों पर शोध पत्र प्रस्तुत किए गए
आईआईएम रोहतक की ओर से दुबई के विद्वानों, शिक्षाविदों और व्यापारिक समुदाय को बताया कि दुनिया के प्रबंधन विद्वानों को खाद्यान्न संकट जैसी प्रासंगिक और समयबद्ध समस्याओं की जांच करने की आवश्यकता है। वैश्विक व्यापार के लिए वैकल्पिक व्यापार मार्गों को देखना चाहिए कि वैश्विक आपूर्ति शृंखला को कैसे सुगम बनाया जाए। सम्मेलन में व्यापार और उद्यमिता विकास पर अनुसंधान से संबंधित विभिन्न विषयों पर कई संकाय विकास कार्यशालाएं भी आयोजित की गईं। इसमें नवाचार प्रबंधन, आईटी क्षमताओं, स्वास्थ्य देखभाल, साइबर सुरक्षा, उपभोक्ता व्यवहार और स्थिरता जैसे विषयों पर शोध पत्रों की विस्तृत किस्में प्रस्तुत की गईं।दो प्रमुख पैनलों पर हुई चर्चा
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सम्मेलन में ''वैश्विक आर्थिक स्थिरता बनाने में जी 20 की भूमिका'' व ''वीयूसीए दुनिया में वैश्विक संबंधों को मजबूत करने के लिए क्षेत्रीय सहयोग'' दो विषयों पर चर्चा हुई। पैनल एक की अध्यक्षता आईआईएम रोहतक के निदेशक ने की। प्रो. धीरज शर्मा ने बताया कि भारत ने शीर्ष श्रेणी के बिजनेस लीडर तैयार करके वैश्विक व्यापार में योगदान दिया है। सम्मेलन निकाय इस बात पर आम सहमति पर पहुंचा कि भारत को पारंपरिक भारतीय ज्ञान के माध्यम से बढ़ते वैश्विक संघर्षों के प्रबंधन में एक महत्वपूर्ण और सक्रिय भूमिका निभानी होगी।
दूसरे पैनल चर्चा का विषय था ''वीयूसीए दुनिया में वैश्विक संबंधों को मजबूत करने के लिए क्षेत्रीय सहयोग'' था। पैनलिस्टों में खलीफा यूनिवर्सिटी ऑफ साइंस के प्रोफेसर ग्लेन मस्कर्ट, प्रोफेसर मेलडेङा स्टीफेंस, प्रोफेसर ऑफ़ इनोवेशन, मुहम्मद बिन रशीद स्कूल ऑफ़ गवर्नमेंट और प्रोफ. मक्सिमे जफर, असिस्टेंट प्रोफेसर, यूएई यूनिवर्सिटी आदि शामिल रहे।
इनकी रही उपस्थिति
यूएसए, भारत, इंडोनेशिया, यूएई, अफगानिस्तान, थाईलैंड, केन्या, ताइवान, श्रीलंका, कतर, बांग्लादेश, फिनलैंड, वियतनाम, पाकिस्तान, मलेशिया, जॉर्डन, इराक, तुर्की, लेबनान, दक्षिण अफ्रीका, मिस्र , न्यूजीलैंड, युगांडा, कजाकिस्तान, सऊदी अरब, यूके, ओमान नाइजीरिया आदि।