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आईसी कॉलेज : बीए अंग्रेजी में 107 बच्चों को 15 से कम अंक मिले

Fri, 29 Oct 2021 01:39 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Fri, 29 Oct 2021 01:39 AM IST
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IC College: 107 children got less than 15 marks in BA English
एमडीयू में प्रदर्शन कर रहे विद्यार्थियों को समझाते परीक्षा नियंत्रक बीएस सिंधु। अमर उजाला
रिजल्ट को लेकर विद्यार्थियों ने एमडीयू में प्रदर्शन किया। छात्र नेता दीपक धनखड़ की अगुवाई में विद्यार्थियों ने परीक्षा सदन पहुंच कर नारेबाजी की। परीक्षा नियंत्रक डॉ. बीएस सिंधु विद्यार्थियों से बात करने के लिए बाहर आए। लेकिन धनखड़ ने नारेबाजी शुरू कर दी तो माहौल तनावपूर्ण हो गया। सुरक्षाकर्मियों ने धनखड़ को नीचे धकेलने की कोशिश की और इस दौरान धक्कामुक्की भी हुई। डॉ. सिंधु ने कहा कि मैं बच्चों से बात करने आया हूं, राजनीति नहीं करने दूंगा। वहीं, छात्र नेता धनखड़ ने कहा कि मैं छात्रों के हित में राजनीति कर रहा हूं। विद्यार्थियों ने चंद मिनट बाद नारेबाजी बंद कर की उसके बाद डॉ. सिंधु ने उनकी समस्याएं सुनीं। उन्होंने कहा कि कर्मचारियों की हड़ताल के कारण रिजल्ट पेंडिंग है, इसे 15 दिन में निपटा दिया जाएगा।
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विद्यार्थियों ने बताया कि आईसी कॉलेज में बीए अंग्रेजी के चौथे सेमेस्टर में 107 छात्राओं के 15 से कम अंक आए हैं, कॉलेज वाले कहते हैं एमडीयू जाओ। डॉ. सिंधु ने कहा कि एक माह से हड़ताल थी, तब ये नेता क्या कर रहे थे, थोड़ा समय लगेगा। द्रोणाचार्य कॉलेज गुरुग्राम में बीकॉम के 400 में से चार बच्चे पास हुए, री-चेकिंग करवाई तो वही रिजल्ट आया। नियमानुसार री-चेकिंग तभी होती है जब 90 प्रतिशत बच्चे फेल हों। इस दौरान छात्राओं ने कहा कि इतने डफर नहीं हो सकते कि जीरो आए। डॉ. सिंधु ने कहा कि आपके कॉलेज के टीचर ने ही कॉपियां चेक की हैं। जांच करवाएंगे, दस दिन में आपके प्राचार्य को बता देंगे। दीपक धनखड़ ने कहा कि हजारों बच्चों की एडब्ल्यू, आरएलए, आरएलई (किन्हीं कारणों से रिजल्ट रुका होना) आई है, उनकी क्या गलती है। डॉ. सिंधु ने कहा कि ऑनलाइन में समस्या है, एमडीयू को मार्क्स नहीं मिले हैं। धनखड़ ने कहा कि पहली बार इतनी ज्यादा संख्या में री-वैल्यूएशन के केस आए हैं। डॉ. सिंधु ने कहा कि मेरे पास रिकॉर्ड पड़ा है, पहले भी इतने ही आते थे। छात्रों ने कहा कि कोई अनुमानित तारीख बता दें, कब रिजल्ट आएगा। डॉ. सिंधु ने कहा कि 15 दिन में सारे पेंडिंग केस निपटा देंगे। वहीं, विद्यार्थियों ने कैंपस खोलने की मांग भी की।
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पहली बार कॉलेजों में चेक हुई कॉपियां
अब तक हमेशा उत्तर पुस्तिकाओं की जांच एमडीयू में ही होती थी। पहली बार ऑनलाइन परीक्षा होने के कारण कॉलेजों को अधिकार दिया गया था। रिजल्ट रुकने के बाद बच्चे कॉलेज जाते हैं तो कहा जाता है कि एमडीयू भेज दिया। एमडीयू वाले कहते हैं कि यहां आया नहीं है।
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री-वैल्यूएशन पर संकट
विश्वविद्यालय के नियमों के अनुसार रिजल्ट जारी होने के एक माह तक बच्चे री-वैल्यूएशन के लिए आवेदन कर सकते हैं। दीपक धनखड़ ने बताया कि बड़ी संख्या में ऐसे बच्चे हैं कि जिनकी वह एक माह की अवधि पूरी होने वाली है। अगर जल्द उनका रिजल्ट जारी न हुुआ तो वे री-वैल्यूएशन भी नहीं करवा सकेंगे।

आईसी कॉलेज से बात कर ली गई है, बीए अंग्रेजी चौथे सेमेस्टर में 29.8 फीसदी बच्चे पास हुए हैं। इसलिए री-चेकिंग नहीं करवाई जा सकती है। रिजल्ट लेट होने के लिए ऑनलाइन परीक्षा और विद्यार्थी जिम्मेदार हैं। ऑफलाइन में कभी दिक्कत नहीं आई। ऑनलाइन परीक्षा के बाद विद्यार्थियों ने पीडीएफ सही ढंग से अपलोड नहीं की, कॉलेजों को मिली ही नहीं। अगर हड़ताल नहीं होती तो ये सारे केस निपटा दिए जाते।
- डॉ. बीएस सिंधु, परीक्षा नियंत्रक, एमडीयू
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