{"_id":"5f4564ab8ebc3e3cb57dd35d","slug":"hindi-is-our-indenty-rohtakcity-news-rtk570453129","type":"story","status":"publish","title_hn":"#हिंदीहैंहमः हिंदी को आगे बढ़ाने से ही बनेगी हमारी पहचान, सबसे ज्यादा बोली और समझी जाती है","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
#हिंदीहैंहमः हिंदी को आगे बढ़ाने से ही बनेगी हमारी पहचान, सबसे ज्यादा बोली और समझी जाती है
Wed, 26 Aug 2020 12:41 PM IST
रोहतक ब्यूरो
अमर उजाला, रोहतक
अमर उजाला, रोहतक
Published by: रोहतक ब्यूरो
Updated Wed, 26 Aug 2020 12:41 PM IST
विज्ञापन
Hindi Hai Hum
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
हिंदी भारत में सबसे ज्यादा बोली व समझी जाने वाली भाषा है। यही हमारी मातृभाषा है। इसे पहचान दिलाना व मातृभाषा का दर्जा दिलाने की जरूरत है। हिंदी को आगे बढ़ाने से ही हमारी पहचान बनेगी। यह समय की ही नहीं, हमारी भी जरूरत है।
युवाओं को हिंदी में बातचीत व काम करने के लिए प्रेरित करने के साथ-साथ मातृभाषा के प्रोत्साहन में सहयोग के लिए भी आगे आना होगा। इसके लिए उन्हें जागरूक बनाने की जरूरत है। यह बातें शिक्षकों से अमर उजाला के हिंदी हैं हम अभियान के तहत हिंदी को बढ़ावा देने के लिए बातचीत करने पर सामने आई।
हिंदी के विस्तार व प्रोत्साहन की जरूरत
हमें भारतीय होने पर गर्व है। यहां की बोलचाल की भाषा हिंदी है। बचपन से ही भाषा में संवाद करते हुए हम बड़े हुए हैं। हमारे पूर्वज भी यही भाषा बोलते रहे हैं। ऐसे में यही हमारी मातृभाषा है। इसके विस्तार व प्रोत्साहन की जरूरत है। वर्तमान समय में यह जरूरत और बढ़ गई है। सभी को मिलकर हमारी मातृभाषा को आगे लाने के सकारात्मक प्रयास करने होंगे। हिंदी के उत्थान में यह जरूरी कदम शीघ्र उठाने की जरूरत है।
विज्ञापन
- सुषमा आर्य, राजकीय उच्च विद्यालय, गढ़ी बोहर
साक्षात्कार व परीक्षाएं हिंदी में हो
हिंदी भाषी देश में अपनी मातृभाषा न होना चिंता का विषय है। हर देश की अपनी मातृभाषा है। वही उसकी पहचान भी होती है। हमारे देश में मातृभाषा तो है, मगर उसे वह मान सम्मान अब तक नहीं मिल पाया है। देश की आजादी के 70 साल बाद भी हम अपनी मातृभाषा को बिसराए बैठे हैं। हर तरफ अंग्रेजी की धूम मची है। अंग्रेजी स्कूल। अंग्रेजी पढ़ाई। इसी भाषा में साक्षात्कार व परीक्षा हो रही है। इस परंपरा को बदलने की जरूरत है।
- डॉ. उर्मिला, मिडिल हेड, राजकीय उच्च विद्यालय, मसूदपुर
हिंदी का बढ़ रहा दायरा, सकारात्मक पहल की जरूरत
राष्ट्रभाषा हिंदी हमारा सम्मान है। देश दुनिया में यह भाषा बोली जाती है। इसका दायरा लगातार बढ़ रहा है। इसके बावजूद हिंदी को मातृभाषा का दर्जा नहीं मिला है। यह सोचने का विषय है। इस बारे में सभी को मिलकर सकारात्मक पहल करनी होगी। हिंदी को बढ़ावा देने के लिए इसे कामकाजी भाषा बनाने के साथ शिक्षण संस्थानों में विशेष तौर पर पढ़ाया जाए। यही नहीं अंग्रेजी से ज्यादा इसे महत्व देना होगा।
- राजरूप राठी, राजकीय उच्च विद्यालय, गढ़ी बोहर
विज्ञापन
युवाओं को हिंदी में बातचीत व काम करने के लिए प्रेरित करने के साथ-साथ मातृभाषा के प्रोत्साहन में सहयोग के लिए भी आगे आना होगा। इसके लिए उन्हें जागरूक बनाने की जरूरत है। यह बातें शिक्षकों से अमर उजाला के हिंदी हैं हम अभियान के तहत हिंदी को बढ़ावा देने के लिए बातचीत करने पर सामने आई।
विज्ञापन
हिंदी के विस्तार व प्रोत्साहन की जरूरत
हमें भारतीय होने पर गर्व है। यहां की बोलचाल की भाषा हिंदी है। बचपन से ही भाषा में संवाद करते हुए हम बड़े हुए हैं। हमारे पूर्वज भी यही भाषा बोलते रहे हैं। ऐसे में यही हमारी मातृभाषा है। इसके विस्तार व प्रोत्साहन की जरूरत है। वर्तमान समय में यह जरूरत और बढ़ गई है। सभी को मिलकर हमारी मातृभाषा को आगे लाने के सकारात्मक प्रयास करने होंगे। हिंदी के उत्थान में यह जरूरी कदम शीघ्र उठाने की जरूरत है।
विज्ञापन
- सुषमा आर्य, राजकीय उच्च विद्यालय, गढ़ी बोहर
साक्षात्कार व परीक्षाएं हिंदी में हो
हिंदी भाषी देश में अपनी मातृभाषा न होना चिंता का विषय है। हर देश की अपनी मातृभाषा है। वही उसकी पहचान भी होती है। हमारे देश में मातृभाषा तो है, मगर उसे वह मान सम्मान अब तक नहीं मिल पाया है। देश की आजादी के 70 साल बाद भी हम अपनी मातृभाषा को बिसराए बैठे हैं। हर तरफ अंग्रेजी की धूम मची है। अंग्रेजी स्कूल। अंग्रेजी पढ़ाई। इसी भाषा में साक्षात्कार व परीक्षा हो रही है। इस परंपरा को बदलने की जरूरत है।
- डॉ. उर्मिला, मिडिल हेड, राजकीय उच्च विद्यालय, मसूदपुर
हिंदी का बढ़ रहा दायरा, सकारात्मक पहल की जरूरत
राष्ट्रभाषा हिंदी हमारा सम्मान है। देश दुनिया में यह भाषा बोली जाती है। इसका दायरा लगातार बढ़ रहा है। इसके बावजूद हिंदी को मातृभाषा का दर्जा नहीं मिला है। यह सोचने का विषय है। इस बारे में सभी को मिलकर सकारात्मक पहल करनी होगी। हिंदी को बढ़ावा देने के लिए इसे कामकाजी भाषा बनाने के साथ शिक्षण संस्थानों में विशेष तौर पर पढ़ाया जाए। यही नहीं अंग्रेजी से ज्यादा इसे महत्व देना होगा।
- राजरूप राठी, राजकीय उच्च विद्यालय, गढ़ी बोहर