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Haryana Result: चौधर की सियासत को अलविदा... चेहरे पर दांव कामयाब; बांगड़ की चौधर खत्म कर रोहतक लाए थे हुड्डा
Wed, 09 Oct 2024 11:41 AM IST
शाहरुख खान
योगेश नारायण दीक्षित, अमर उजाला, रोहतक
योगेश नारायण दीक्षित, अमर उजाला, रोहतक
Published by: शाहरुख खान
Updated Wed, 09 Oct 2024 11:41 AM IST
सार
Haryana Result: हरियाणा के मतदाताओं ने चौधर की सियासत को अलविदा कह दिया है। नतीजों से नई सियासत का आगाज हो गया है। रोहतक की चौधर 2005 में हुड्डा के सीएम बनने पर चर्चा में आई थी।
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haryana election
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
चौधर की बिसात पर लोगों को गोलबंद करने की सियासत को इस विधानसभा चुनाव में हरियाणा के मतदाताओं ने अलविदा कह दिया है। इसकी जगह वोटर को स्वीकार्य चेहरे पर दांव लगाने की नई सियासत का आगाज हो गया है।
खास यह है कि समाज में कुछ बदलाव लाने की क्षमता दिखाने वाले ज्यादातर युवाओं को अपना नेता चुनकर लोगों ने कई सियासी दिग्गजों को बड़ा संदेश भी दिया है। करीब छह माह पहले लोकसभा चुनाव में कांग्रेस को पांच सीटों पर जीत मिली थी।
इसमें रोहतक से पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा के बेटे दीपेंद्र हुड्डा की बड़ी जीत हुई थी। हुड्डा के नजदीकी नेता हिसार, सोनीपत और अंबाला से सीट से जीते थे। तब हुड्डा खेमे की ओर 10 साल बाद हरियाणा की चौधर रोहतक वापस लाने का नारा बुलंद किया गया था।
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फिर विधानसभा चुनाव की घोषणा के साथ इसी चौधर के नाम पर कांग्रेस के पक्ष में माहौल बनाया गया। हालांकि खुद हुड्डा रोहतक की चौधर जैसे जुमलों से बचते रहे और हर रैली में 36 बिरादरी को साथ होने का दावा करते रहे।
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खास यह है कि समाज में कुछ बदलाव लाने की क्षमता दिखाने वाले ज्यादातर युवाओं को अपना नेता चुनकर लोगों ने कई सियासी दिग्गजों को बड़ा संदेश भी दिया है। करीब छह माह पहले लोकसभा चुनाव में कांग्रेस को पांच सीटों पर जीत मिली थी।
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इसमें रोहतक से पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा के बेटे दीपेंद्र हुड्डा की बड़ी जीत हुई थी। हुड्डा के नजदीकी नेता हिसार, सोनीपत और अंबाला से सीट से जीते थे। तब हुड्डा खेमे की ओर 10 साल बाद हरियाणा की चौधर रोहतक वापस लाने का नारा बुलंद किया गया था।
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फिर विधानसभा चुनाव की घोषणा के साथ इसी चौधर के नाम पर कांग्रेस के पक्ष में माहौल बनाया गया। हालांकि खुद हुड्डा रोहतक की चौधर जैसे जुमलों से बचते रहे और हर रैली में 36 बिरादरी को साथ होने का दावा करते रहे।
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दूसरी ओर, भारतीय जनता पार्टी के सारे नेताओं ने डबल इंजन की सरकार और मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के काम करने के तरीके को सामने रखकर चुनाव लड़ा। कार्यकर्ताओं में नीचे तक यह संदेश दिया गया कि रोहतक समेत किसी क्षेत्र विशेष को न टारगेट किया जाए और न चौधर जैसे शब्दों का प्रयोग न किया जाए।
मंगलवार को आए विधानसभा चुनाव के परिणाम में भाजपा को राज्य के सभी क्षेत्रों में जिस तरह सफलता मिली है, उससे किसी क्षेत्र विशेष की चौधर की सियासत की एक तरह से विदाई हो गई है।
बांगड़ की चौधर खत्म कर रोहतक लाए थे हुड्डा
हरियाणा की राजनीति के मूल में ‘चौधर’ समाया रहा है। सतीश त्यागी की पुस्तक ‘पॉलिटिक्स ऑफ चौधर’ के मुताबिक चौधरी छोटूराम के बाद उनकी चौधर पर बागड़ी नेताओं देवीलाल, बंसीलाल और भजनलाल ने कब्जा कर लिया था। सूबे का मुख्यमंत्री इन्हीं में से एक नेता बनता रहा और चौधर बांगड़ की होकर रह गई।
हरियाणा की राजनीति के मूल में ‘चौधर’ समाया रहा है। सतीश त्यागी की पुस्तक ‘पॉलिटिक्स ऑफ चौधर’ के मुताबिक चौधरी छोटूराम के बाद उनकी चौधर पर बागड़ी नेताओं देवीलाल, बंसीलाल और भजनलाल ने कब्जा कर लिया था। सूबे का मुख्यमंत्री इन्हीं में से एक नेता बनता रहा और चौधर बांगड़ की होकर रह गई।
2005 के विधानसभा चुनाव में जब भूपेंद्र सिंह हुड्डा राज्य की सत्ता के शिखर पर पहुंचने की कोशिश कर रहे थे, तब ‘रोहतक में चौधर लानी है’ का जुमला खूब चर्चित हुआ था। इसी का नतीजा था कि नतीजों से पहले ही वह रोहतक और आसपास के चौधरी बन गए। अब नए दौर की सियासत में क्षेत्रीय दलों के कमजोर पड़ने और राज्य में भाजपा की लगातार तीसरी बार सरकार बनने से ‘चौधर’ जैसे जुमले मायने खो चुके हैं।