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Rohtak News: आज मनाया जाएगा गोवर्धन पर्व, पूजा के लिए तीन शुभ मुहूर्त
Fri, 01 Nov 2024 09:57 PM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, रोहतक
संवाद न्यूज एजेंसी, रोहतक
Updated Fri, 01 Nov 2024 09:57 PM IST
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बहादुरगढ़। दिवाली के दूसरे दिन दो नवंबर को गोवर्धन का त्योहार मनाया जाएगा। यह पर्व कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा तिथि को पड़ता है, लेकिन इस बार यह त्योहार 2 नवंबर को मनाया जाएगा। कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा तिथि को पड़ने वाले इस पर्व पर अन्नकूट और गोवर्धन की पूजा होगी।
गोवर्धन पूजा की प्रतिपदा तिथि की शुरुआत 1 नवंबर की शाम 6 बजकर 16 मिनट से हुई और इसका समापन 2 नवंबर को रात 8 बजकर 21 मिनट पर होगा। गोवर्धन पूजा के लिए 2 नवंबर को तीन शुभ मुहूर्त हैं। इनमें पहला मुहूर्त सुबह 6 बजकर 34 मिनट से शुरू होकर 8 बजकर 46 मिनट तक रहेगा। जबकि दूसरा दोपहर बाद 3 बजकर 23 से शुरू होकर 5:35 तक और तीसरा 5:35 से शाम 6 बजकर 01 मिनट तक रहेगा।
काठमंडी स्थित शिव-हनुमान मंदिर के पुजारी पंडित सियाराम ने बताया कि गोवर्धन पूजा मुख्यत: प्रकृति की पूजा है। इसकी शुरुआत भगवान श्रीकृष्ण ने की थी। इस दिन प्रकृति के आधार के रूप में गोवर्धन पर्वत का पूजन होता है और समाज के आधार के रूप में गाय की पूजा की जाती है। यह पूजा ब्रज से आरंभ हुई थी और धीरे-धीरे भारत मेें प्रचलित हो गई।
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गोवर्धन पूजा विधि
इस दिन स्नान करके साफ सुथरे वस्त्र पहनें और पूजा स्थल पर बैठ जाएं, फिर एक छोटी सी चौकी पर गोवर्धन की मूर्ति या प्रतिमा स्थापित करें। इसके बाद गोवर्धन की मूर्ति को पंचामृत से स्नान कराएं, गोवर्धन की मूर्ति को वस्त्र अर्पित करें। फिर गोवर्धन की मूर्ति को फूलों से सजाएं और धूप-दीप जलाएं। इसके बाद मूर्ति के सामने भोग लगाकर आरती करें, फिर मूर्ति की परिक्रमा करें और अंत में प्रसाद वितरण करें।
अन्नकूट का महत्व
अन्नकूट का अर्थ ''''अन्न का पर्वत'''' होता है। गोवर्धन पूजा के दौरान तरह-तरह की खाद्य चीजों का एक पर्वत जैसा आकार बनाया जाता है और इसे भगवान को चढ़ाया जाता है। इसे ही अन्नकूट कहा जाता है। इस भोग में कढ़ी, चावल, खीर, पूड़ी, सब्जियां और कई अन्य व्यंजन शामिल होते हैं। भगवान को अर्पित करने के बाद इसे प्रसाद के रूप में सभी भक्तों को बांटा जाता है।
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गोवर्धन पूजा की प्रतिपदा तिथि की शुरुआत 1 नवंबर की शाम 6 बजकर 16 मिनट से हुई और इसका समापन 2 नवंबर को रात 8 बजकर 21 मिनट पर होगा। गोवर्धन पूजा के लिए 2 नवंबर को तीन शुभ मुहूर्त हैं। इनमें पहला मुहूर्त सुबह 6 बजकर 34 मिनट से शुरू होकर 8 बजकर 46 मिनट तक रहेगा। जबकि दूसरा दोपहर बाद 3 बजकर 23 से शुरू होकर 5:35 तक और तीसरा 5:35 से शाम 6 बजकर 01 मिनट तक रहेगा।
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काठमंडी स्थित शिव-हनुमान मंदिर के पुजारी पंडित सियाराम ने बताया कि गोवर्धन पूजा मुख्यत: प्रकृति की पूजा है। इसकी शुरुआत भगवान श्रीकृष्ण ने की थी। इस दिन प्रकृति के आधार के रूप में गोवर्धन पर्वत का पूजन होता है और समाज के आधार के रूप में गाय की पूजा की जाती है। यह पूजा ब्रज से आरंभ हुई थी और धीरे-धीरे भारत मेें प्रचलित हो गई।
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गोवर्धन पूजा विधि
इस दिन स्नान करके साफ सुथरे वस्त्र पहनें और पूजा स्थल पर बैठ जाएं, फिर एक छोटी सी चौकी पर गोवर्धन की मूर्ति या प्रतिमा स्थापित करें। इसके बाद गोवर्धन की मूर्ति को पंचामृत से स्नान कराएं, गोवर्धन की मूर्ति को वस्त्र अर्पित करें। फिर गोवर्धन की मूर्ति को फूलों से सजाएं और धूप-दीप जलाएं। इसके बाद मूर्ति के सामने भोग लगाकर आरती करें, फिर मूर्ति की परिक्रमा करें और अंत में प्रसाद वितरण करें।
अन्नकूट का महत्व
अन्नकूट का अर्थ ''''अन्न का पर्वत'''' होता है। गोवर्धन पूजा के दौरान तरह-तरह की खाद्य चीजों का एक पर्वत जैसा आकार बनाया जाता है और इसे भगवान को चढ़ाया जाता है। इसे ही अन्नकूट कहा जाता है। इस भोग में कढ़ी, चावल, खीर, पूड़ी, सब्जियां और कई अन्य व्यंजन शामिल होते हैं। भगवान को अर्पित करने के बाद इसे प्रसाद के रूप में सभी भक्तों को बांटा जाता है।