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Ghevar Sweet: रोहतक के घेवर की प्रसिद्धि सबसे ऊपर; गुजरात, महाराष्ट्र, चंडीगढ़ व दिल्ली में होती है सप्लाई

Mon, 03 Jul 2023 09:17 AM IST
नवीन दलाल माई सिटी रिपोर्टर, रोहतक (हरियाणा)
माई सिटी रिपोर्टर, रोहतक (हरियाणा) Published by: नवीन दलाल Updated Mon, 03 Jul 2023 09:17 AM IST
सार

कोथली में जाने वाला घेवर अब शुगर फ्री ही नहीं बल्कि देशी खांड में भी तैयार किया जा रहा है। जिसकी मांग प्रदेश में ही नहीं देश में भी है। रोहतक के घेवर की प्रसिद्धि सबसे ऊपर मानी जाती है। जिसकी सप्लाई गुजरात, महाराष्ट्र, चंडीगढ़ व दिल्ली आदि राज्यों में होती है। 

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Ghevar Sweet: famous of Rohtak Ghevar at top; Supply done in Gujarat, Maharashtra, Chandigarh and Delhi
रोहतक में घेवर बनाते कारीगर - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

सदियों पुरानी परंपरा के अनुसार बहन-बेटियों को दी जाने वाली कोथली में शामिल घेवर आधुनिकता के युग में भी अपनी जगह बनाए हैं। समय के साथ इसकी गुणवत्ता और स्वाद को और भी बेहतर बनाया जा रहा है। लोगों के स्वास्थ्य को देखते हुए पहले यह शुगर फ्री हुआ और अब यह देशी खांड में बनने लगा है। हर वर्ग की पहुंच में रहे, इसके लिए यह वनस्पति घी से लेकर देशी घी में भी तैयार होता है। इसकी मांग प्रदेश ही नहीं देश के कोने-कोने के अलावा विदेशों में भी है। रोहतक शहर की बात करें तो प्रतिदिन लाखों रुपये का इसका कारोबार होता है।

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मिष्ठान भंडारों में मानसून सीजन में सबसे अधिक होती बिक्री
मिष्ठान भंडारों में मानसून सीजन में सबसे अधिक बिक्री घेवर की होती है। प्रदेश में रोहतक के घेवर की प्रसिद्धि सबसे ऊपर है। मई से ही कारीगर लगे हैं। मांग को पूरा करने के लिए जब हरियाणा के कारीगर कम पड़ते हैं तो उत्तर प्रदेश से कारीगर बुलाए जाते हैं। रोहतक जिले से गुजरात, महाराष्ट्र, चंडीगढ़, दिल्ली नियमित घेवर की सप्लाई होती है। यह कूरियर से भेजा जाता है। इसकी ऑनलाइन बुकिंग आती है। इसके अलावा रोहतक का घेवर कनाड़ा सहित कई देशों में भी जाता है। विदेश से आने वाले भी अपने साथ घेवर खरीदकर ले जाते हैं। उत्तर प्रदेश के आगरा से आए कारीगर भीमसेन व ओमप्रकाश ने बताया कि वह और उनके कई साथी आए हैं। सीजन में कारीगरों की मांग बढ़ जाती है। पूरे शहर में जगह-जगह घेवर बन रहा है। जब मौसम में नमी होती है तब घेवर का असली स्वाद आता है।
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हजारों किलो घेवर रोज तैयार कर रहे हरियाणा व उत्तर प्रदेश के कारीगर
जिले में प्रतिदिन 1000 किलो से अधिक की खपत है। इसमें 200 से 300 किलो राज्य के बाहर जाता है। इसमें पैकिंग व कूरियर का खर्च मंगाने वाले से लिया जाता है। साधारण व दूध वाला घेवर एक सप्ताह चल जाता है। देश में तीन दिन में कूरियर से पहुंचता है। इसके लिए कूरियर कंपनी 120 रुपये प्रति किलो का चार्ज लेती हैं। बाजार की बात करें तो छोटे-बडे़ 200 से अधिक व्यवसायी घेवर बनाते हैं और जिले में रोजाना की बिक्री 10 लाख रुपये से अधिक का अनुमान है।

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एसोसिएशन के प्रधान अनुसार

हमारे यहां सालों से घेवर बन रहा है। अब चीनी का प्रयोग बंद कर दिया है क्योंकि स्वास्थ्य के चलते जनता इसे पसंद नहीं कर रही है। अब देशी खांड में ही हम घेवर तैयार करवा रहे हैं। 15 मई से इसे बनाने का काम शुरू है और 8 अगस्त तक चलेगा। यदि मौसम में नमी आगे भी रहती है तो काम जारी रहेगा। इसमें जब तक स्वाद रहता है तब तक लोग इसे खरीदते हैं। - वीरेंद्र राठी, प्रधान, दुर्गा कॉलोनी ट्रेडर एसोसिएशन।

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