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Rohtak News: गांधराव व पाकस्मा ड्रेन ओवरफ्लो, 100 एकड़ फसलें डूबीं
Tue, 05 Aug 2025 02:43 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, रोहतक
संवाद न्यूज एजेंसी, रोहतक
Updated Tue, 05 Aug 2025 02:43 AM IST
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सांपला के गांव गिझी के खेतों में भरा पानी। संवाद
सांपला। बारिश का पानी यमुना नदी तक पहुंचाने वाली पाकस्मा व गांधरा ड्रेन दो गांवों के किसानों के लिए अभिशाप बनती जा रही है। ड्रेन ओवरफ्लो होने के कारण गिझी व भैंसरु गांव के खेतों में तीन से चार फीट पानी भर गया है। इससे किसानों की सौ एकड़ में बोई गई धान, बाजरा, ज्वार की फसल में डूब गई है। खेतों की सिंचाई के लिए लगाए गए डीजल इंजन भी पानी में डूब गए हैं।
इलाके के दर्जनों गांवों को बाढ़ से बचाने के लिए पाकस्मा व गांधरा ड्रेनें निकाली गई हैं। नया बांस गांव की सीमा पर ये ड्रेनें एक हो जाती हैं। व निवासी किसान चांद सिंह, जगबीर, सोमबीर, सोनू, राकेश, सतीश कुमार, लीला, रत्न सिंह का कहना है कि पिछले सप्ताह ड्रेन का जलस्तर बढ़ना शुरू हुआ था।
लोग सुबह उठे तो हालात पूरी तरह बदले मिले। ड्रेन का जलस्तर पूरी तरह से बढ़ गया था और खेतों में हर तरफ पानी ही पानी नजर आ रहा था। फसल पूरी तरह से जलमग्न हो चुकी थी।
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किसानों का कहना है कि अगर पानी जल्दी नहीं उतरा और ड्रेन का जलस्तर कम नहीं हुआ तो उनकी फसलें पूरी तरह से तबाह हो जाएंगी। खेती के सहारे अपने परिवारों का गुजारा करने वाले किसानों के पास फसल के अलावा आमदनी का कोई साधन नहीं है।
फसलों के साथ इंजनों का भी नुकसान हुआ है। पानी में डूबे इंजनों का तेल बदली होने के साथ अब उन्हें ठीक कराने में 500 से 1500 रुपये तक का खर्च वहन करना पड़ेगा। किसानों ने सरकार से उनकी फसलों व इंजनों के नुकसान के मुआवजे की मांग की है।
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इलाके के दर्जनों गांवों को बाढ़ से बचाने के लिए पाकस्मा व गांधरा ड्रेनें निकाली गई हैं। नया बांस गांव की सीमा पर ये ड्रेनें एक हो जाती हैं। व निवासी किसान चांद सिंह, जगबीर, सोमबीर, सोनू, राकेश, सतीश कुमार, लीला, रत्न सिंह का कहना है कि पिछले सप्ताह ड्रेन का जलस्तर बढ़ना शुरू हुआ था।
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लोग सुबह उठे तो हालात पूरी तरह बदले मिले। ड्रेन का जलस्तर पूरी तरह से बढ़ गया था और खेतों में हर तरफ पानी ही पानी नजर आ रहा था। फसल पूरी तरह से जलमग्न हो चुकी थी।
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किसानों का कहना है कि अगर पानी जल्दी नहीं उतरा और ड्रेन का जलस्तर कम नहीं हुआ तो उनकी फसलें पूरी तरह से तबाह हो जाएंगी। खेती के सहारे अपने परिवारों का गुजारा करने वाले किसानों के पास फसल के अलावा आमदनी का कोई साधन नहीं है।
फसलों के साथ इंजनों का भी नुकसान हुआ है। पानी में डूबे इंजनों का तेल बदली होने के साथ अब उन्हें ठीक कराने में 500 से 1500 रुपये तक का खर्च वहन करना पड़ेगा। किसानों ने सरकार से उनकी फसलों व इंजनों के नुकसान के मुआवजे की मांग की है।