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भाजपा-कांग्रेस की राजनीति में फंसा शहर का विकास, सियासी हमले में लगे पार्षद

Fri, 08 Jul 2016 02:17 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, रोहतक
ब्यूरो/अमर उजाला, रोहतक Updated Fri, 08 Jul 2016 02:17 AM IST
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 furniture scam, furniture scam of 19 lakhs in rohtak, government order to vigilance probe , haryana
फर्नीचर घोटाले के मामले में विजिलेंस जांच के बाद खुलकर सामने आए कांग्रेसी पार्षद - फोटो : amar ujala
फर्नीचर घोटाले की विजिलेंस जांच शुरू होने से निगम में चल रही भाजपा-कांग्रेस की राजनीति चरम पर पहुंच गई है। राजनीति में शहर का विकास पूरी तरह से फंसता दिख रहा है। भाजपा-कांग्रेस के पार्षद एक-दूसरे पर सियासी हमला करने में लगे हैं, लेकिन कोई भी शहर के विकास की बात करने को तैयार नहीं है। फर्नीचर घोटाले का मामला एक बार फिर उठने से कांग्रेस पार्षद भी खुलकर सामने आ गए हैं और पूरी तरह से मेयर के पक्ष में खड़े हैं।
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कांग्रेसी पार्षदों ने यहां तक आरोप लगाया है कि निगम में भर्ती घोटाला उजागर होने के बाद विधायक व भाजपा पार्षद बौखला गए हैं। उसे दबाने के लिए ही यह मामला उछाला गया है। कांग्रेसी पार्षदों ने निगम के सभी विकास कार्यों में होने वाले घपलों को उजागर करने की तैयारी शुरू कर दी। वहीं, भाजपा विधायक और पार्षदों ने घोटाले में मेयर की कुर्सी जाने की बात कही है। नगर निगम में जिस तरह के हालात चल रहे हैं, उससे यह साफ हो गया है कि शहर भाजपा-कांग्रेस की राजनीति में फंस गया है। फर्नीचर घोटाले में विजिलेंस जांच शुरू होने के अलावा मेयर, सीनियर डिप्टी मेयर, डिप्टी मेयर के खिलाफ नोटिस जारी होने के बाद सियासत तेज हो गई है। फर्नीचर घोटाले में विजिलेंस जांच का मामला मीडिया में आने के बाद बृहस्पतिवार को दोनों पार्टियों के पार्षद एक-दूसरे से संपर्क करके आगे की रणनीति तैयार करने में लग गए।  
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अधिकारियों में हड़कंप

फर्नीचर घोटाले की विजिलेंस जांच शुरू होने के बाद केवल भाजपा-कांग्रेस की राजनीति ही नहीं बढ़ी है बल्कि उस समय तैनात अफसरों व निगम में इस समय मौजूद कई अफसरों की धड़कन तेज हो गई है। क्योंकि इस समय तैनात अफसर भी अब नये मामले उछलने पर घिर सकते हैं और राजनीति में उनको भी मोहरा बनाया जा सकता है।
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सरकार पूरी तरह से भ्रष्टाचार को खत्म करने में लगी है। कोई भ्रष्टाचार को बढ़ावा देता है तो उसके खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। अब जांच में साफ हो जाएगा कि किसने घोटाला किया है और जनता का पैसा किसने खाया है। मनीष ग्रोवर, विधायक

विधायक व भाजपा के पार्षद इस समय निगम में भर्ती घोटाला उजागर होने पर बौखलाए हुए हैं। इस कारण ही फर्नीचर वाला मामला उठाया जा रहा है ताकि भर्ती घोटाला दबकर रह जाए। लेकिन हम चुप नहीं बैठने वाले हैं और भर्ती घोटाले के साथ ही अन्य सभी मामले उठाए जाएंगे। अनीता मिगलानी, कांग्रेसी पार्षद

हम उसके साथ हैं, जो न्याय की लड़ाई लड़ेगा। नगर निगम में मेयर के पास ना टेंडर देने का अधिकार है और ना किसी चेक पर साइन करने का अधिकार। ऐसे में मेयर दोषी कैसे होती हैं। बल्कि इस पूरे मामले में अधिकारियों की कमी है और जांच में यह साफ हो जाएगा। नीरा भटनागर, पार्षद वार्ड 14

निगम के फर्नीचर घोटाले में जनता का पैसा मेयर, सीनियर डिप्टी मेयर, डिप्टी मेयर ने खाया है। विजिलेंस जांच में यह दोषी जरूर होंगे और इनकी कुर्सी जाने के साथ ही सदस्यता भी छिनेगी। अशोक खुराना, भाजपा पार्षद


निगम में पूरी तरह से भाजपा नेताओं व अधिकारियों की मनमानी चलती है। जिस फर्नीचर घोटाले की बात कही जा रही है, उसमें ना हमने टेंडर किए, ना चेक जारी किए। किस दुकान पर कितना रेट है, यह अधिकारियों की जिम्मेदारी होती है। ऐसे में हमारा कोई दोष नहीं है, जो निष्पक्ष जांच में साफ हो जाएगा। रेनू डाबला, मेयर नगर निगम
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