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निगम के फर्नीचर घोटाले में विजिलेंस जांच शुरू, शासन से आदेश जारी

Fri, 22 Jul 2016 02:11 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, रोहतक
ब्यूरो/अमर उजाला, रोहतक Updated Fri, 22 Jul 2016 02:11 AM IST
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furniture scam, furniture scam of 19 lakhs in rohtak, government order to vigilance probe
पार्षदों के कार्यालयों के लिए 19 लाख के फर्नीचर खरीद मामले में हुआ था घोटाला - फोटो : amar ujala
नगर निगम में हुए 19 लाख रुपये के फर्नीचर खरीद मामले की विजिलेंस जांच शुरू हो गई है। इसके लिए शासन से आदेश पत्र जारी कर दिया गया है। खुद सीएम खट्टर ने 15 दिन पहले मामले में विजिलेंस जांच कराने के आदेश दिए थे। इस जांच में उस समय तैनात रहे अफसरों को भी शामिल किया जा सकता है। जांच रिपोर्ट एक माह में देनी होगी, यदि विजिलेंस को घपला मिलता है तो इसमें मुकदमा दर्ज किया जाएगा।
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19 फरवरी 2014 को नगर निगम की बैठक में हर वार्ड में पार्षद का कार्यालय खोलने का प्रस्ताव पास किया गया। कार्यालयों के लिए फर्नीचर खरीदने के लिए एक कमेटी बनाई गई। इसमें मेयर रेनू डाबला, सीनियर डिप्टी मेयर मंजू हुड्डा, डिप्टी मेयर अशोक भाटी, एकाउंट ऑफिसर और एमई को रखा गया। तीन दुकानदारों से कुटेशन मंगवाई गई, जिनमें से एक फर्नीचर हाउस से सामान मंगवा लिया गया। इसके बाद 19.63 लाख रुपये का भुगतान किया गया। पार्षद अशोक खुराना, जयकिशन शर्मा, पूनम किलोई, अजय जैन, ममता रानी और सुशीला इंदौरा ने फर्नीचर खरीद में घोटाले का आरोप लगाते हुए तत्कालीन ज्वाइंट कमिश्नर अनु श्योकंद को शिकायत दी। उस समय जांच में खानापूर्ति की गई और जांच ट्रेनी आईएएस विक्रम को दी गई। उनकी जांच में आरोप सही पाए गए। यह फाइल दिसंबर 2015 में शासन को भेज दी गई। इस पर ही संज्ञान लेते हुए सीएम मनोहर लाल ने 6 जुलाई को विजिलेंस जांच के आदेश दिए। उस समय निगम में तैनात एमई और एकाउंट ऑफिसर के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई के आदेश भी दिए गए। सीएम के आदेश के बाद शासन से विजिलेंस को जांच के लिए पत्र जारी कर दिया गया है और इसकी जांच शुरू हो गई है। पार्षद अशोक खुराना ने भी चंडीगढ़ में अधिकारियों से इस मामले में बातचीत की तो उनको भी जांच शुरू होने की बात कही गई। यह जांच एक माह में पूरी करनी होगी, जिसमें उस समय तैनात रहे निगम के वरिष्ठ अधिकारियों को भी शामिल किया जा सकता है। जिससे उनके लिए भी परेशानी खड़ी हो सकती है।
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इस तरह पकड़ा गया था घोटाला

ट्रेनी आईएएस विक्रम ने बाजार से कई दुकानों से सामान के रेट मंगवाए। इसमें पता चला कि जिन कुर्सियों को 850 रुपये में खरीदा गया है, उनका बाजार में रेट 525-530 रुपये है। कोई भी चीज ब्रांडेड नहीं है। अन्य सामान भी ज्यादा दाम पर खरीदा गया है। एक कुटेशन फर्जी लगाई गई थी, जिसमें रेट ज्यादा दिखाए गए थे। आईएएस विक्रम की जांच रिपोर्ट पूरी होने पर शासन को फाइल भेजी गई थी। हालांकि जब मामले ने तूल पकड़ा तो दुकानदार ने एक लाख रुपये का चेक लौटा दिया था और उसे निगम में जमा कराया गया था। उससे भी शक बढ़ गया था।
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