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पहले रकबा, अब पीआर धान बेचने वाले किसान हुए गायब

Mon, 26 Oct 2020 12:41 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Mon, 26 Oct 2020 12:41 AM IST
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First acreage, now farmers selling PR paddy disappear
अभी तक किसानों का बिक्री के समय रकबा गायब हो रहा था। लेकिन अब पीआर धान बेचने वाले किसान गायब हो रहे हैं। जितनी संख्या में किसानों का धान की बिक्री का शेड्यूल तैयार होता है, उसकी तुलना में बहुत ही कम किसान फसल बेचने मंडी पहुंच रहे हैं। अधिकारी खुद इसे लेकर असमंजस में हैं, हर कोई अपने-अपने ढंग से इसकी व्याख्या कर रहा है।
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सरकार ने इस बार भी फसलें बेचने के लिए मेरी फसल, मेरा ब्योरा पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन अनिवार्य किया था। रजिस्ट्रेशन करवाते समय किसानों को भरना था कि उनकी कौन सी फसल का कितना रकबा है। बाद में किसानों के पास यह सुविधा भी थी कि वे बता सकें कि किस हफ्ते में अपनी फसल बेचने मंडी आएंगे। जैसे-जैसे किसान फसल बेचने को मंडी आने का सप्ताह भरते हैं, उसी के साथ मुख्यालय में किसानों विभिन्न दिनों का शेड्यूल तैयार कर दिया जाता है। उसकी जानकारी किसानों को दे दी जाती है। ताकि वे अपने निर्धारित दिन ही मंडी आएं। क्योंकि उसके बिना उन्हें गेट पास जारी नहीं हो सकता। रोहतक जिले में पीआर धान की खरीद के लिए सिर्फ रोहतक अनाज मंडी को अधिकृत किया गया है। लेकिन शुरू से ही बाजरा की आमद तो यहां तेज रही है पर धान की रफ्तार बहुत सुस्त थी। पहले धान विक्रेता किसानों का शेड्यूल भी कम रखा जा रहा था। लेकिन पिछले दिनों से उनका शेड्यूल काफी बनाया जा रहा है। लेकिन उतनी संख्या में किसान मंडी आ ही नहीं रहे। 21 अक्तूबर को 87 किसानों की धान बेचने के लिए शेड्यूलिंग की गई थी, लेकिन सिर्फ तीन पहुंचे। 22 अक्तूबर को 99 की शेड्यूलिंग थी तो 16 पहुंचे। 23 अक्तूबर को 92 की शेड्यूलिंग थी, पर सिर्फ 11 किसान ही अपनी पीआर धान की फसल लेकर मंडी में पहुंचे।
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कुछ और जगहों से भी ऐसी शिकायत आई है। आशंका है कि जब किसान मेरी फसल, मेरा ब्योरा पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन करवा रहे थे तो उन्होंने गलत जानकारी भर दी। अगर किसी ने बासमती या 1509 लगाई है, उसने भी धान ही भर दिया। लेकिन सरकारी खरीद सिर्फ पीआर धान की है। इसलिए शेड्यूल बनने के बाद भी किसान फसल बेचने नहीं आ रहे हैं।
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- देवेंदर ढुल, सचिव, मार्केट कमेटी, रोहतक।
जिले में पीआर धान का रकबा बहुत कम है। लगभग 1200 हेक्टेयर रकबे में पीआर धान लगाया गया है। इसकी लेट बुआई हुई है, इसलिए अब तक बहुत ज्यादा कटाई नहीं हो सकी है। संभव है कि अभी ज्यादातर किसानों की फसल पकी न हो। किसान अंदाजे से हफ्ता भर देते हैं, लेकिन फसल न पकने के कारण वे मंडी नहीं आए होंगे।

- डॉ. रोहताश सिंह, उप निदेशक, कृषि।
राज्य सरकार ने पहले कहा था कि वह 1509 वैराइटी भी एमएसपी पर खरीदेगी। इसके चलते बड़ी संख्या में 1509 वैराइटी लगाने वाले किसानों ने भी रजिस्ट्रेशन करवा लिया था। लेकिन बाद में सरकार ने कह दिया कि वह 1509 नहीं खरीदेगी। बड़ी संख्या में मंडी न पहुंचने वाले किसान वे हैं जिन्होंने 1509 धान लगाया था।
- प्रीत सिंह, प्रधान, किसान सभा।
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