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कोविड मरीजों का सांस लेना मुश्किल कर देगी आतिशबाजी
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कोविड-19 संक्रमण मरीजों को ठीक होने के बाद भी सता रहा है। पीजीआई समेत अन्य अस्पतालों में सांस की परेशानी वाले मरीजों की भीड़ भी कुछ यही बयां कर रही है। ऐसे में दिवाली पर आतिशबाजी हुई तो संक्रमित होने के बाद सांस की परेशानी से जूझ रहे मरीजों के लिए सांस लेना भी मुश्किल हो जाएगा। आतिशबाजी हुई तो सेहत बिगड़ जाएगी। पिछले दो वर्षों से दिवाली पूर्व 400 पार रहे एक्यूआई के आंकड़े भी सेहत के बारे में सोचने के लिए मजबूर कर रहे हैं।
महामारी की पहली व दूसरी लहर के बाद भी संक्रमण का खतरा बना हुआ है। इस खतरे से अलग पोस्ट कोविड मरीजों की मुश्किलें भी कम नहीं हुई हैं। पीजीआई के पल्मनरी विभाग, छाती रोग व मेडिसन विभाग में लगातार कोविड के बाद से सांस लेने में तकलीफ की शिकायतें लेकर मरीज पहुंच रहे हैं। क्षय रोग व सिविल अस्पताल ही नहीं, निजी अस्पतालों में भी ऐसे मरीज कम नहीं हैं। पल्मनरी विभाग में ही रोजाना करीब पांच से ज्यादा केस पहुंच रहे हैं। इनकी आधुनिक उपकरणों से जांच से फेफड़ों की स्थिति का पता कर उपचार दिया जा रहा है। क्षय रोग अस्पताल में भी 80 से 100 मरीज सांस की तकलीफ वाले आ रहे हैं। इनमें पोस्ट कोविड मरीज भी शामिल हैं।
पटाखों से निकलती है हानिकारक गैस
दिवाली पर होने वाली आतिशबाजी प्रदूषण की बड़ी वजह बनती जा रही है। पटाखे जलने पर उससे हानिकारक गैस निकलती है। यह गैस हवा को जहरीला बनाती है। इस हवा में सांस लेना मुश्किल हो जाता है। इसीलिए ग्रीन पटाखों को प्रोत्साहन दिया जा रहा है। इनमें सामान्य पटाखों की तुलना में 40 से 50 प्रतिशत कम हानिकारक गैस पैदा होती है। पटाखों में नाइट्रोजन ऑक्साइड व सल्फर डाइऑक्साइड की मात्रा कम प्रयोग होती है। इसलिए ये कम प्रदूषण करते हैं।
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नवंबर 2020 में 575.5 दर्ज किया गया था पीएम 2.5
जिले में बगैर आतिशबाजी ही प्रदूषण बढ़ने लगा है। नवंबर 2020 में एक्यूआई 400 से ऊपर रहा। यही नहीं, 10 नवंबर 2020 को पीएम 2.5 का स्तर 575.5 माइक्रोग्राम पर मीटर क्यूब रहा। यह हवा के खतरनाक स्तर को दर्शाता है। यही नहीं, नवंबर 2019 में भी वायु प्रदूषण ने रिकॉर्ड तोड़ते हुए 491 का आंकड़ा पार किया था। एक्यूआई 400 से 500 के बीच रहा था।
प्रदूषण से मिल कर नमी और बढ़ाएगी परेशानी
मौसम में ठंडक बढ़ने लगी है। ऐसे में रविवार को हुई बारिश हवा में नमी बढ़ाएगी। यह नमी धूल कणों के साथ मिलकर स्मॉग की स्थिति पैदा करेगी। स्मॉग से लोगों का सांस लेना मुश्किल होगा। ऐसे मौसम में बाहर निकलने से परहेज बरतना जरूरी है।
यह मौसम बीमारियों का है। वायरल के अलावा कोविड परेशान कर रहा है। पोस्ट कोविड मरीज आ रहे हैं। प्रदूषण व आतिशबाजी के कारण हवा की गुणवत्ता प्रभावित होने पर सांस, दमा, अस्थमा व कोविड के कारण फेफड़ों में संक्रमण झेल चुके मरीजों की परेशानी बढ़ने लगी है। यह स्थिति प्रदूषण के साथ और गंभीर बनने का अंदेशा है।
- डॉ. ध्रुव चौधरी, अध्यक्ष, पीसीसीएम विभाग, पीजीआई
मौसम का असर सेहत पर पड़ रहा है। सीओपीडी, अस्थमा, टीबी व सांस संबंधी रोगियों की संख्या बढ़ने लगी है। बदलते मौसम में हवा में नमी बढ़ने लगी है। यह नमी धूल कणों के साथ मिलकर स्मॉग की स्थिति पैदा करेगी। स्मॉग सेहत के लिए हानिकारक है। हवा में बढ़ता प्रदूषण का स्तर सेहत बिगाड़ रहा है। इसलिए सतर्क रहने की जरूरत है।
- डॉ. इंदु, जिला क्षय रोग अधिकारी
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महामारी की पहली व दूसरी लहर के बाद भी संक्रमण का खतरा बना हुआ है। इस खतरे से अलग पोस्ट कोविड मरीजों की मुश्किलें भी कम नहीं हुई हैं। पीजीआई के पल्मनरी विभाग, छाती रोग व मेडिसन विभाग में लगातार कोविड के बाद से सांस लेने में तकलीफ की शिकायतें लेकर मरीज पहुंच रहे हैं। क्षय रोग व सिविल अस्पताल ही नहीं, निजी अस्पतालों में भी ऐसे मरीज कम नहीं हैं। पल्मनरी विभाग में ही रोजाना करीब पांच से ज्यादा केस पहुंच रहे हैं। इनकी आधुनिक उपकरणों से जांच से फेफड़ों की स्थिति का पता कर उपचार दिया जा रहा है। क्षय रोग अस्पताल में भी 80 से 100 मरीज सांस की तकलीफ वाले आ रहे हैं। इनमें पोस्ट कोविड मरीज भी शामिल हैं।
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पटाखों से निकलती है हानिकारक गैस
दिवाली पर होने वाली आतिशबाजी प्रदूषण की बड़ी वजह बनती जा रही है। पटाखे जलने पर उससे हानिकारक गैस निकलती है। यह गैस हवा को जहरीला बनाती है। इस हवा में सांस लेना मुश्किल हो जाता है। इसीलिए ग्रीन पटाखों को प्रोत्साहन दिया जा रहा है। इनमें सामान्य पटाखों की तुलना में 40 से 50 प्रतिशत कम हानिकारक गैस पैदा होती है। पटाखों में नाइट्रोजन ऑक्साइड व सल्फर डाइऑक्साइड की मात्रा कम प्रयोग होती है। इसलिए ये कम प्रदूषण करते हैं।
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नवंबर 2020 में 575.5 दर्ज किया गया था पीएम 2.5
जिले में बगैर आतिशबाजी ही प्रदूषण बढ़ने लगा है। नवंबर 2020 में एक्यूआई 400 से ऊपर रहा। यही नहीं, 10 नवंबर 2020 को पीएम 2.5 का स्तर 575.5 माइक्रोग्राम पर मीटर क्यूब रहा। यह हवा के खतरनाक स्तर को दर्शाता है। यही नहीं, नवंबर 2019 में भी वायु प्रदूषण ने रिकॉर्ड तोड़ते हुए 491 का आंकड़ा पार किया था। एक्यूआई 400 से 500 के बीच रहा था।
प्रदूषण से मिल कर नमी और बढ़ाएगी परेशानी
मौसम में ठंडक बढ़ने लगी है। ऐसे में रविवार को हुई बारिश हवा में नमी बढ़ाएगी। यह नमी धूल कणों के साथ मिलकर स्मॉग की स्थिति पैदा करेगी। स्मॉग से लोगों का सांस लेना मुश्किल होगा। ऐसे मौसम में बाहर निकलने से परहेज बरतना जरूरी है।
यह मौसम बीमारियों का है। वायरल के अलावा कोविड परेशान कर रहा है। पोस्ट कोविड मरीज आ रहे हैं। प्रदूषण व आतिशबाजी के कारण हवा की गुणवत्ता प्रभावित होने पर सांस, दमा, अस्थमा व कोविड के कारण फेफड़ों में संक्रमण झेल चुके मरीजों की परेशानी बढ़ने लगी है। यह स्थिति प्रदूषण के साथ और गंभीर बनने का अंदेशा है।
- डॉ. ध्रुव चौधरी, अध्यक्ष, पीसीसीएम विभाग, पीजीआई
मौसम का असर सेहत पर पड़ रहा है। सीओपीडी, अस्थमा, टीबी व सांस संबंधी रोगियों की संख्या बढ़ने लगी है। बदलते मौसम में हवा में नमी बढ़ने लगी है। यह नमी धूल कणों के साथ मिलकर स्मॉग की स्थिति पैदा करेगी। स्मॉग सेहत के लिए हानिकारक है। हवा में बढ़ता प्रदूषण का स्तर सेहत बिगाड़ रहा है। इसलिए सतर्क रहने की जरूरत है।
- डॉ. इंदु, जिला क्षय रोग अधिकारी