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डॉक्टर : बगैर कंप्यूटर, इंटरनेट कैसे हो काम, निदेशक : गेट आउट
ब्यूरो/ अमर उजाला, रोहतक
Updated Sat, 09 Jan 2016 02:33 AM IST
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पीजीआई के निदेशक कार्यालय समस्या लेकर पहुंचे फोरेंसिक विभाग के पीजी और रेजिडेंट डॉक्टरों को समाधान तो नहीं मिला, लेकिन डांट जरूर खानी पड़ गई। शुक्रवार शाम पीजीआई निदेशक के पास डॉक्टर कंप्यूटर और इंटरनेट उपलब्ध न होने की समस्या लेकर पहुंचे थे।
इस पर दोनों पक्षाें में कहासुनी हुई। आरोप है कि निदेशक ने डॉक्टरों को गेट आउट कहते हुए बाहर का रास्ता दिखाया।
शुक्रवार शाम डॉक्टर कंप्यूटर और इंटरनेट की समस्या को लेकर निदेशक डॉ. राकेश गुप्ता के कक्ष में पहुंचे। उनका कहना था कि वे ऑनलाइन काम नहीं करते तो कोर्ट के आदेशों की अवहेलना होती है। ऐसे में कैसे काम किया जा सकता है।
इसी बीच डॉक्टरों और निदेशक के बीच सवाल जवाब होने लगे। सूत्रों की मानें तो निदेशक ने डॉक्टरों को अपने लैपटॉप से काम करने की बात कही। इस पर डॉक्टरों ने कहा कि लैपटॉप उनका निजी है और इस पर इतना कार्य करना संभव नहीं है।
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इस बात पर निदेशक भड़क गए और उन्होंने कहा कि पीजी हो, जो कहेंगे वह करना पडे़गा। सूत्रों की मानें तो बात झाडू़ लगाने तक पहुंच गई। इस पर डॉक्टरों ने विरोध भी किया।
पीजी डॉक्टरों की मानें तो उन्हें बगैर सुविधाओं के चार साल का रिकॉर्ड एक साथ अपलोड करने को कहा गया है। तीन दिन से इंटरनेट सेवा ठप है। कंप्यूटर का इंतजाम नहीं है।
सूत्रों की मानें तो संस्थान में करीब 217 कंप्यूटर आए थे, इन्हें विभिन्न विभागों में बांट दिया गया। हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने हिदायत दी है कि सभी डॉक्टर एमएलआर और पोस्टमार्टम रिपोर्ट ऑनलाइन करेंगे, जिससे बाद में किसी भी बदलाव की संभावना न बचे। लेकिन इस कार्य में सबसे बड़ी कमी फोरेंसिक विभाग के पास कंप्यूटर और इंटरनेट सुविधा न होना है। फोरेंसिक विभाग के आंकड़ों पर नजर डालें तो हर दिन 12 से 17 पोस्टमार्टम होते हैं। विभाग में सात पीजी और 11 रेजिडेंट हैं। इसकी एवज में विभाग के पास महज पांच कंप्यूटर हैं।
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इस पर दोनों पक्षाें में कहासुनी हुई। आरोप है कि निदेशक ने डॉक्टरों को गेट आउट कहते हुए बाहर का रास्ता दिखाया।
शुक्रवार शाम डॉक्टर कंप्यूटर और इंटरनेट की समस्या को लेकर निदेशक डॉ. राकेश गुप्ता के कक्ष में पहुंचे। उनका कहना था कि वे ऑनलाइन काम नहीं करते तो कोर्ट के आदेशों की अवहेलना होती है। ऐसे में कैसे काम किया जा सकता है।
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इसी बीच डॉक्टरों और निदेशक के बीच सवाल जवाब होने लगे। सूत्रों की मानें तो निदेशक ने डॉक्टरों को अपने लैपटॉप से काम करने की बात कही। इस पर डॉक्टरों ने कहा कि लैपटॉप उनका निजी है और इस पर इतना कार्य करना संभव नहीं है।
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इस बात पर निदेशक भड़क गए और उन्होंने कहा कि पीजी हो, जो कहेंगे वह करना पडे़गा। सूत्रों की मानें तो बात झाडू़ लगाने तक पहुंच गई। इस पर डॉक्टरों ने विरोध भी किया।
पीजी डॉक्टरों की मानें तो उन्हें बगैर सुविधाओं के चार साल का रिकॉर्ड एक साथ अपलोड करने को कहा गया है। तीन दिन से इंटरनेट सेवा ठप है। कंप्यूटर का इंतजाम नहीं है।
सूत्रों की मानें तो संस्थान में करीब 217 कंप्यूटर आए थे, इन्हें विभिन्न विभागों में बांट दिया गया। हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने हिदायत दी है कि सभी डॉक्टर एमएलआर और पोस्टमार्टम रिपोर्ट ऑनलाइन करेंगे, जिससे बाद में किसी भी बदलाव की संभावना न बचे। लेकिन इस कार्य में सबसे बड़ी कमी फोरेंसिक विभाग के पास कंप्यूटर और इंटरनेट सुविधा न होना है। फोरेंसिक विभाग के आंकड़ों पर नजर डालें तो हर दिन 12 से 17 पोस्टमार्टम होते हैं। विभाग में सात पीजी और 11 रेजिडेंट हैं। इसकी एवज में विभाग के पास महज पांच कंप्यूटर हैं।