किसानों ने आरोप लगाया है कि तीन कृषि कानूनों के जरिये खेती और मंडी तबाह करने के बाद अब भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) सरकार के निशाने पर है। एफसीआई को तोड़ने के विरोध में किसान संगठनों ने सोमवार को झंग कॉलोनी स्थित एफसीआई दफ्तर का घेराव किया। निगम के जिला मैनेजर को ज्ञापन सौंपा। इस दौरान किसानों ने छत्तीसगढ़ में नक्सल हमले में मारे गए जवानों को श्रद्धांजलि भी दी।
किसान पहले मानसरोवर पार्क में इकट्ठे हुए और करीब साढ़े 11 बजे वहां मार्च करते हुए झंग कॉलोनी की तरफ बढ़े। पुलिस मानसरोवर पार्क में थी, एफसीआई दफ्तर के आसपास भी काफी फोर्स थी, बैरिकेड लगाकर रास्ता बंद कर दिया गया था। एफसीआई के कर्मचारियों ने भी अंदर से ताला लगाकर गेट बंद कर रखा था। वहां पहुंच कर किसानों ने धरना दिया। इस दौरान विभिन्न किसान संगठनों के नेताओं ने धरने को संबोधित किया। किसान सभा के इंद्रजीत सिंह ने कहा कि मोदी सरकार किसानों की मांगो के प्रति तानाशाही रवैया अपनाए हुए है। किसान खेती बचाने की लड़ाई लड़ रहे हैं पर सरकार को किसानों, मजदूरों के बजाय कारपोरेट घरानों की चिंता है। इसलिए कानून बनने से पहले ही अंबानी को साइलो के लिए जमीन दे दी गई। केंद्र की शांता कुमार कमेटी ने एफसीआई खत्म करने, सार्वजनिक वितरण प्रणाली को तहस-नहस करने और कारपोरेट को किसानों से खुली लूट करने की सिफारिश की है। उन्हीं सिफारिशों का नतीजा है कि सरकार एफसीआई सहित प्रमुख खरीद एजेंसियों बंद करने जा रही है। कृषि कानूनों के खिलाफ और एमएसपी की गारंटी के लिए किसान कई माह से लड़ रहे हैं। वहीं 300 से ज्यादा किसान शहीद हो चुके हैं पर मोदी सरकार आंदोलन कुचलना चाहती है। इसी के विरोध में एफसीआई पर धरना दिया गया। धरने को किसान सभा के प्रीत सिंह, भाकियू के जयभगवान अहलावत, भाकियू (किसान सरकार) के वीरेंद्र हुड्डा, भाकियू (अंबावता) के अनिल नांदल, हरियाणा पंजाब एकता मंच के सतीश राणा ने भी संबोधित किया।