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मिलें तीरंदाजों के परिवार से, निशाना सभी का अचूक
ब्यूरो/अमर उजाला, रोहतक
Updated Wed, 07 Sep 2016 02:24 AM IST
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तीरंदाजों का परिवार
- फोटो : अमर उजाला
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हिसार जिले में एक परिवार ऐसा है, जिसे लोग अब तीरंदाजों का परिवार कहने लगे हैं। इस परिवार में पिता, दो बेटियां और चारों ही तीरंदाज हैं। सभी अंतरराष्ट्रीय स्तर के तीरंदाज और निशाना भी अचूक। अपने अचूक निशाने के कारण ही वे एशिया कप समेत कई जगह मेडल जीत चुके हैं। अब बहन-भाई चीन में होने वाले एशिया कप में निशाना लगाने के लिए रवाना हो गए हैं।
हिसार के सेक्टर 13 में रहने वाले विक्रम सिंह धायल इस समय सेना में कर्नल हैं। वे तीरंदाजी के अंतरराष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी रहे हैं और सेना में तीरंदाजी कोच हैं। तीरंदाजी से उनको इतना जुड़ाव है कि अपने बेटे दिग्विजय और बेटियों खुशबू व दिव्या को तीरंदाज बनाने की तैयारी कर ली। कर्नल विक्रम कुछ समय पहले तक हिमाचल प्रदेश में तैनात थे और वहीं पर बेटे और बेटियों को प्रैक्टिस कराने लगे।
बड़ी बेटी खुशबू 16 साल की उम्र में लगातार दो बार से सब जूनियर में नेशनल चैंपियन है और जूनियर नेशनल में भी 2016 की चैंपियन है। उसने 2016 में एशिया कप बैंकाक में खेलते हुए कांस्य पदक जीता। बेटा दिग्विजय 14 साल की उम्र में 2016 का नेशनल चैंपियन बन गया और वह भी 2016 में एशिया कप में खेला, लेकिन मेडल नहीं जीत सका। बेटा व दूसरी बेटी दिव्या जुड़वा हैं। दिव्या ने 14 साल की उम्र में 2016 के जूनियर में गोल्ड जीता तो सब जूनियर में सिल्वर। अब खुशबू और दिग्विजय दोनों ही चीन में एशिया कप खेलने के लिए गए हैं।
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कर्नल बताते है कि इस समय उनका तबादला महाराष्ट्र में हो गया है और बेटे व बेटियों को वहीं प्रैक्टिस कराते हैं। लेकिन उनके बेटे व बेटियां आज भी हरियाणा की ओर से खेलती हैं। इनका सपना इन तीनों को ओलंपिक में खेलकर मेडल जीतते हुए देखना है।
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हिसार के सेक्टर 13 में रहने वाले विक्रम सिंह धायल इस समय सेना में कर्नल हैं। वे तीरंदाजी के अंतरराष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी रहे हैं और सेना में तीरंदाजी कोच हैं। तीरंदाजी से उनको इतना जुड़ाव है कि अपने बेटे दिग्विजय और बेटियों खुशबू व दिव्या को तीरंदाज बनाने की तैयारी कर ली। कर्नल विक्रम कुछ समय पहले तक हिमाचल प्रदेश में तैनात थे और वहीं पर बेटे और बेटियों को प्रैक्टिस कराने लगे।
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बड़ी बेटी खुशबू 16 साल की उम्र में लगातार दो बार से सब जूनियर में नेशनल चैंपियन है और जूनियर नेशनल में भी 2016 की चैंपियन है। उसने 2016 में एशिया कप बैंकाक में खेलते हुए कांस्य पदक जीता। बेटा दिग्विजय 14 साल की उम्र में 2016 का नेशनल चैंपियन बन गया और वह भी 2016 में एशिया कप में खेला, लेकिन मेडल नहीं जीत सका। बेटा व दूसरी बेटी दिव्या जुड़वा हैं। दिव्या ने 14 साल की उम्र में 2016 के जूनियर में गोल्ड जीता तो सब जूनियर में सिल्वर। अब खुशबू और दिग्विजय दोनों ही चीन में एशिया कप खेलने के लिए गए हैं।
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कर्नल बताते है कि इस समय उनका तबादला महाराष्ट्र में हो गया है और बेटे व बेटियों को वहीं प्रैक्टिस कराते हैं। लेकिन उनके बेटे व बेटियां आज भी हरियाणा की ओर से खेलती हैं। इनका सपना इन तीनों को ओलंपिक में खेलकर मेडल जीतते हुए देखना है।