आम लोगों को समय पर सेवाएं उपलब्ध न करवाना नौकरी पर भारी पड़ सकता है। उक्त बातें उपायुक्त कैप्टन मनोज कुमार ने लघु सचिवालय में विभिन्न योजनाओं की समीक्षा को लेकर आयोजित बैठक में कही।
उपायुक्त ने कहा कि सेवा का अधिकार अधिनियम के तहत कई सेवाएं अधिसूचित की गई हैं, उन्हें समय पर उपलब्ध करवाना संबंधित विभाग के अधिकारी की जिम्मेदारी है। अधिनियम के तहत समय पर सेवा उपलब्ध न करवाने पर तीन बार जुर्माने का प्रावधान है। इसके बाद अधिकारी को नौकरी से निष्कासित किया जा सकता है। उन्होंने समय पर सेवा उपलब्ध न करवाने वाले विभागों के अधिकारियों से जवाब तलब किया। उपायुक्त ने कहा कि सेवाओं के लिए आवेदन करने वाले नागरिकों को संतुष्ट करने के साथ आरटीएस का स्कोर भी बढ़ाना होगा। हर विभाग को रद्द किए जाने वाले आवेदनों की संख्या घटानी होगी। जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र के कुछ आवेदनों में देरी पर उन्होंने पीजीआई के अधिकारियों से जवाब तलब किया। जिन्होंने बताया कि रिकॉर्ड अपडेट कर दिया गया है। उपायुक्त ने हिदायत दी कि भविष्य में ऐसी गलती नहीं होनी चाहिए। उन्होंने महिला व बाल विकास विभाग के अधिकारियों से कहा कि लिंगानुपात में और सुधार की जरूरत है। शुरुआती दिनों में ही गर्भवती महिलाओं की ट्रैकिंग सुनिश्चित की जाए, पूरा डाटा तैयार किया जाए। अगर गर्भपात हुआ तो उसके कारणों का पूरा विवरण होना चाहिए। उपायुक्त ने सीएम विंडो, एसएमजीटी, ई-ऑफिस, मेरी फसल-मेरा ब्योरा, प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना, मंडियों में फसल खरीद, स्वामित्व, जल शक्ति अभियान, परिवार पहचान पत्र, सूक्ष्म सिंचाई स्कीम, अंत्योदय सरल, मुख्यमंत्री परिवार उत्थान योजना, पेंशन योजनाएं, आधार लिंक और जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र की समीक्षा की और अधिकारियों को निर्देश दिए। बैठक में एसडीएम राकेश सैनी व श्वेता सुहाग, जिला परिषद के सीईओ महेश कुमार, डीएसपी सज्जन कुमार, सीएमजीजीए शुभम चतुर्वेदी, डीईओ डॉ. विजय लक्ष्मी नांदल, डीआईओ जितेंद्र मलिक, बीडीपीओ राजपाल चहल, उप निदेशक दर्शन राठी, विनोद धनखड़ भी मौजूद रहे।