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बड़े भाई सात साल से प्रदेश के मुख्यमंत्री, दो बार ही चंडीगढ़ गए गुलशन

Sat, 14 Aug 2021 01:42 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Sat, 14 Aug 2021 01:42 AM IST
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Elder brother, Chief Minister of the state for seven years, Gulshan went to Chandigarh only twice
थ्रेसर से सरसों निकालते सीएम मनोहर लाल के भाई गुलशन खट्टर। फाइल फोटो - फोटो : RohtakCity
बड़े भाई मनोहर लाल सात साल से प्रदेश के मुख्यमंत्री हैं, लेकिन दो बार ही छोटे भाई गुलशन खट्टर चंडीगढ़ गए। हालांकि माता-पिता के देहांत के बाद बड़े भाई मनोहर लाल को फोन करके या रोहतक आने पर मार्गदर्शन जरूर लेते थे। साधारण किसान की तरह जीवन व्यापन करने वाले गुलशन खट्टर के निधन पर शुक्रवार को सांत्वना देने वालों का तांता लगा रहा। चाहे नेता सत्ता पक्ष से हों या विपक्ष से, हर कोई उनकी सादगी का कायल दिखाई दिया।
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सीएम मनोहर लाल पांच भाइयों में सबसे बड़े हैं। उनसे छोटे जगदीश, चरणजीत, गुलशन व सबसे छोटे विजय खट्टर हैं। 57 वर्षीय गुलशन पैतृक गांव बनियानी में खेतीबाड़ी करते थे। हालांकि दो साल पहले शहर की राजेंद्रा कॉलोनी में मकान बना लिया था, लेकिन अब भी साइकिल या मोटरसाइकिल पर गांव व खेत में जरूर जाते थे। उनके दो बेटे केशव व नीरज निजी सेक्टर में नौकरी करते हैं, जबकि बेटी जनता कॉलोनी के अग्रवाल परिवार में शादीशुदा हैं। उनके भानजे सन्नी हंस ने बताया कि सात साल से मनोहर लाल प्रदेश के मुख्यमंत्री हैं, लेकिन उनके छोटे भाई गुलशन दो बार ही पारिवारिक कार्यक्रमों में भाग लेने चंडीगढ़ गए थे।
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पीजीआई में डॉक्टरों को बताना पड़ा, सीएम के भाई हैं गुलशन
हंस ने बताया कि 15 दिन पहले उनके मामा गुलशन को बुखार हुआ था। पूर्व मंत्री मनीष ग्रोवर पीजीआई में दाखिल कराने के लिए ले गए। वहां पर डॉक्टरों को बताना पड़ा कि गुलशन सीएम मनोहर लाल के भाई हैं। एक तरह से गुलशन इतना सादा जीवन जीते थे। किसी को यह नहीं बताते थे कि उनके बड़े भाई मुख्यमंत्री हैं।
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दीपेंद्र हुड्डा बोले - बेहद साधारण जीवन जीते थे गुलशन
कांग्रेस के राज्यसभा सांसद दीपेंद्र हुड्डा अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए शीला बाईपास स्थित रामबाग श्मशान भूमि में पहुंचे। सांत्वना देने के बाद मीडिया के सामने दीपेंद्र ने बताया कि गुलशन बेहद साधारण जीवन जीते थे। किसी तरह का सियासी अहम नहीं था। पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा भी उनके निधन पर रोहतक आना चाहते थे, लेकिन कोविड-19 से ठीक होने के बाद आम लोगों के बीच नहीं आने लगे हैं।
ये पहुंचे परिवार को सांत्वना देने
गुलशन खट्टर के निधन पर लोगों का परिवार को सांत्वना देने के लिए तांता लगा रहा। सांत्वना देने वालों में
मेयर मनमोहन गोयल, मुख्यमंत्री के ओएसडी प्रचार गजेंद्र फौगाट, मुख्यमंत्री के मीडिया को आर्डिनेटर राजकुमार कपूर, महामंत्री एडवोकेट वेदपाल, शमशेर खरकड़ा, प्रदीप जैन, विधायक सत्यप्रकाश जवराता, मंडलायुक्त पंकज यादव, उपायुक्त कैप्टन मनोज कुमार, अतिरिक्त उपायुक्त महेंद्रपाल, एमडीयू के वीसी राजबीर सिंह, भाजपा के जिलाध्यक्ष अजय बंसल, सीनियर डिप्टी मेयर राजकमल सहगल, रमेश भाटिया, रामअवतार वाल्मीकि, प्रतिभा सुमन, सुनीता लोहचब, किरण, सतीश नांदल, प्रदेश प्रवक्ता सूरजपाल अम्मू, सह मीडिया प्रभारी शमशेर खरक, जिला मीडिया प्रभारी तरुण सन्नी शर्मा, सन्नी हंस, सुरेश किराड़, राज शर्मा, रेनू डाबला, राजेश सहगल, राजू भुटानी, पवन आहूजा, गुलशन दुआ, कुलविंदर सिंह सिक्का, बाबा कालीदास, महंत बाबा कर्णपुरी, स्वामी परमानंद महाराज व अन्य लोग भी शामिल रहे।

गुलशन जैसी सादगी नहीं मिली राजनीतिक परिवारों में : ग्रोवर
भाजपा प्रदेश उपाध्यक्ष और पूर्व सहकारिता मंत्री मनीष कुमार ग्रोवर का कहना है कि गुलशन सादे और सरल इंसान थे। सात साल में कभी अपने बड़े भाई के मुख्यमंत्री होने का दुरुपयोग नहीं किया। बल्कि खेत में मेहनत कर अपने परिवार को पालते रहे।
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